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आखिरकार बीजेपी के हो गए चंपई सोरेन, बेटों और इतने समर्थकों साथ थामा पार्टी का दामन, शिवराज-हिमंता ने दिलाई सदस्यता

उमाकांत त्रिपाठी। झारखंड के पूर्व सीएम चंपई सोरेन बीजेपी में हुए शामिल हो गए है. रांची में आयोजित कार्यक्रम में कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और असम की सीएम हिमंता विश्वा सरमा ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलवाई. रांची के शहीद मैदान में बीजेपी मिलन समारोह का आयोजन किया गया था. इसमें झारखंड बीजेपी के संगठन प्रभारी लक्ष्मीकांत वाजपाई , झारखंड बीजेपी विधानसभा चुनाव प्रभार शिवराज सिंह चौहान, झारखंड बीजेपी विधानसभा चुनाव सह प्रभारी हिमंता विश्व सरमा, प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ,पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा सहित पार्टी के कई नेता चंपई सोरेन के बीजेपी में शामिल होने के कार्यक्रम में उपस्थित रहे.

कभी नहीं सोचा था जासूसी होगी- सोरेन
इस दौरान बड़ी संख्या में चंपई सोरेन के समर्थक भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे. इस मौके पर चंपई सोरेन ने कहा कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी भी जासूसी होगी. मै दिल का साफ हूं. जिसके झारखंड के लिए लड़ाई लड़ी लोगों ने उसी के पीछे जासूस लगा दिया. उस दिन के बाद से ही हमने कर लिया कि दल में जाएंगे और जनता की सेवा करेंगे.

ये चंपई नहीं आंधी है- शिवराज
इस मौके पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा, बीजेपी के परिवार में सम्मिलित हो रहे वरिष्ठ नेता चंपई सोरेन और उनके साथ आए सभी लोगों का स्वागत है. ये चंपई नहीं आंधी है ,सुन लें अपमान करने वाले जिस चंपई सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा को सींचा उसी का अपमान किया. जेएमएम अब पति और पत्नी की पार्टी बन गई है. ऐसे नेता का अपमान किया गया जिन्होंने शिबू सोरेन के साथ काम किया. चंपई सोरेन सिर्फ जनता के लिए जीते हैं. झारखंड को जिन्होंने लूटा है. दलालों की पार्टी बना दी चंपई सोरेन ने दलालों की दलाली रोका तो अपमानित कर सीएम पद से हटाया. नियुक्ति पत्र बांटने से भी रोक दिया. चंपई भी टायगर हैं कह दिया हम किसी को छेड़ेंगे नहीं पर किसी ने हमें छेड़ा तो छोड़ेंगे भी नहीं. अब पानी सर के ऊपर चला गया है. जनता तैयार है इस सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए.

बीजेपी को मिलेगा फायदा?
चंपई सोरेन के मुख्यमंत्री रहते हुए भी हेमंत सोरेन की पत्नी कल्‍पना सोरेन ही कई कामकाज को नियंत्रित करती थीं। इस बात को लेकर चंपई सोरेन काफी नाराज थे। उस समय भी चंपई सोरेन और कुछ विधायकों को बीजेपी में लाने की कोशिश हुई थी। झारखंड में लोकसभा चुनाव के नतीजे आने पर ओबीसी वर्ग का समर्थन मिला था, लेकिन आदिवासी वर्ग का समर्थन नहीं मिला था। इस वर्ग से किसी के पार्टी में आने से आने वाले विधानसभा चुनाव में बड़ी बढ़त मिल सकती है, ऐसी उम्मीद बीजेपी को है।

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