उमाकांत त्रिपाठी।दिल्ली के सीएम अंरविद केजरीवाल ने रखा प्रस्तावआतिशी मार्लेना दिल्ली की नई मुख्यमंत्री होंगी। अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (AAP) की विधायक दल की बैठक में उनके नाम का प्रस्ताव रखा। जिस पर विधायकों की सहमति जताई। आतिशी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही हैं।
गोपाल राय ने आतिशी के नाम का ऐलान करते हुए कहा कि-हमने विषम परिस्थियों में ये फैसला लिया है। केजरीवाल की ईमानदारी पर कीचड़ उछाला गया। जनता जब तक उन्हें नहीं चुनती, वे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे।
AAP की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने कहा, जिसके परिवार ने आतंकी अफजल गुरु के लिए लड़ाई लड़ी, उसे आम आदमी पार्टी ने मुख्यमंत्री बना दिया। भगवान दिल्ली की रक्षा करे। दिल्ली के लिए आज बहुत दुख का दिन है।
आतिशी के सीएम बनने के बाद अब केजरीवाल शाम 4:30 बजे उपराज्यपाल (LG) विनय सक्सेना को इस्तीफा सौंपेंगे। नई सरकार बनाने का प्रस्ताव पेश किया जाएगा। दिल्ली सरकार 26 और 27 सितंबर को 2 दिन का विधानसभा सत्र बुलाया है।13 सितंबर को शराब नीति केस में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद केजरीवाल ने 15 सितंबर को मुख्यमंत्री पद छोड़ने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था, कि-अब जनता तय करे कि मैं ईमानदार हूं या बेईमान। जनता ने दाग धोया और विधानसभा चुनाव जीता तो फिर से कुर्सी पर बैठूंगा।
कैलाश गहलोत बोले
आतिशी डमी CM नहीं, दिल्ली AAP विधायक दल की नेता और नई CM के तौर पर आतिशी के चुने जाने के बाद दिल्ली के मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा, ‘सभी ने सर्वसम्मति से आतिशी के नाम पर सहमति जताई।’ भाजपा के डमी CM के आरोपों पर उन्होंने कहा, ‘आरोप लगाना भाजपा का काम है।’
पीयूष गोयल बोले- सीएम बदलने से भाग्य नहीं बदलने वाला
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री बदल दिया है, इससे आम आदमी पार्टी का भाग्य नहीं बदलने वाला। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, “अरविंद केजरीवाल ने उन्हें अनिच्छा से सीएम बनाया। मनीष सिसोदिया के दबाव के कारण वे मनचाहा सीएम नहीं बना पाए। मनीष सिसोदिया के कारण ही उन्हें सारे विभाग दिए गए। उनके दबाव में ही आतिशी को सीएम बनाया गया है। चेहरा बदल गया है लेकिन भ्रष्ट चरित्र जस का तस है और दिल्ली की जनता जवाब मांगेगी…”
AAP ने कहा- नवंबर तक कराए जाएं विधानसभा चुनाव
गोपाल राय ने कहा, “जिस तरह भाजपा ने देश के पीएम ने षडयंत्र करके, एजेंसियों का दुरुपयोग करके दिल्ली की सरकार और आम आदमी पार्टी को तोड़ने का अभियान चलाया। उस अभियान को तोड़ते हुए हमने अपना काम जारी रखा। इन्होंने कोशिश की केजरीवाल जेल में इस्तीफा दें, लेकिन उन्होंने जेल में इस्तीफा नहीं दिया। केजरीवाल ने सरकार चलाई। उनकी ताकत ईमानदारी है। उन्होंने वो काम किया, जो आज देश में कोई राज्य सरकार नहीं कर पाई। उन्होंने फैसला किया कि सुप्रीम अदालत ने हमें जेल से बाहर कर दिया है, लेकिन जब तक दिल्ली की जनता दोबारा चुनकर उन्हें नहीं भेजती, वे मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे। विधायक दल की बैठक में यह फैसला हुआ कि चुनाव नवंबर तक कराए जाएं।”
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बोले- चेहरा बदल सकते हैं, चरित्र नहीं
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि AAP के नेता पार्टी का कायाकल्प करने की कोशिश कर रहे हैं। वे भूल जाते हैं कि वे पार्टी का चेहरा बदल सकते हैं, लेकिन चरित्र नहीं। वे अपने चरित्र पर लगे भ्रष्टाचार के काले दागों को नहीं धो सकते। दिल्ली की जनता के लिए चुनाव में एकमात्र मुद्दा अरविंद केजरीवाल का भ्रष्टाचार होगा।
सौरभ भारद्वाज बोले- हम में से कोई कुर्सी पर बैठेगा
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठता है क्योंकि जनादेश अरविंद केजरीवाल का है।
जनता ने अरविंद केजरीवाल को चुना है। जब तक जनता उन्हें दोबारा नहीं चुनेगी, तब तक वे CM की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे। चुनाव होने तक हममें से कोई एक उस कुर्सी पर बैठेगा।
केजरीवाल ने इस्तीफा क्यों दिया,आइए जानते है 3 अहम बातें…
1. मुख्यमंत्री तो हैं, लेकिन पावर नहीं दिल्ली शराब नीति केस में अरविंद केजरीवाल 177 दिन बाद जमानत पर जेल से बाहर आए। सुप्रीम कोर्ट ने शर्त रखी कि वे CM ऑफिस नहीं जाएंगे और न ही किसी फाइल पर साइन करेंगे। यानी जेल से बाहर आने और मुख्यमंत्री रहते हुए भी उनके पास पावर नहीं रही।
2. सिर्फ 5 महीने का कार्यकाल बचा दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल फरवरी 2025 में खत्म हो रहा है। यानी सरकार के पास चुनाव में सिर्फ 5 महीने ही बचे हैं। इस दौरान सरकारें लोक-लुभावन चुनावी फैसले लेती हैं। केजरीवाल कोर्ट की शर्तों में बंधे हैं। जेल से छूटने के बाद केजरीवाल के साथ सहानुभूति है। दो-तीन महीने पहले दिल्ली में चुनाव की मांग कर केजरीवाल इसे भुनाना चाहेंगे।
3. ईमानदार नेता की छवि को मजबूत करेंगे दिल्ली शराब नीति केस में नाम आने और गिरफ्तारी के बाद से ही भाजपा के नेता अरविंद केजरीवाल से मुख्यमंत्री पद छोड़ने की मांग कर रहे थे। इस्तीफा देने के बाद वे भाजपा नेताओं को सीधे कह सकेंगे कि सिर्फ आरोप रहते उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया। अब उनकी ईमानदारी का फैसला जनता करेगी।














