उमाकांत त्रिपाठी।महाशिवरात्रि के मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बुधवार को तमिलनाडु के कोयंबटूर थे. यहां वह ईशा फाउंडेशन की ओर से आयोजित भव्य भक्ति महाशिवरात्रि कार्यक्रम में शामिल हुए. अमित शाह ने यहां मिट्टी के प्रति लोगों को जागरूक करने के फाउंडेशन के प्रयास की सराहना की. महाशिवरात्रि पर कोयंबटूर में अमित शाह की सद्गुरु ने तारीफ की. सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने कहा कि देश को एकजुट करने का जो काम सरदार पटेल ने किया था, कुछ वैसा ही मौजूदा गृह मंत्री अमित शाह ने किया है. इस पर अमित शाह ने कहा कि सद्गुरु राष्ट्र की संपत्ति समान हैं.
पीएम मोदी ने पूरी दुनिया को योग के लिए आकर्षित करने का काम किया-शाह
गृह मंत्री काम किया ने कहा,कि- ‘संसार को बदलने का रास्ता स्वयं को बदलने से ही शुरू होता है. मैं आपके मिट्टी बचाओ अभियान (सेव सॉइल कैंपेन) से जुड़ा था. आपने हमारी सबसे अमूल्य धरोहर, हमारी मिट्टी के लिए पूरे देश भर में संस्कार जगाया और पूरे विश्व को पर्यावरण का एक सुंदर संदेश भेजने का काम किया है. मैं सद्गुरु को बड़ी विनम्रता से कहना चाहता हूं कि आप पूरे राष्ट्र की संपत्ति के रूप में दुनिया के सामने उभर कर आए हैं.’ अमित शाह ने कहा कि- सद्गुरु ने ‘आदि योगी’ के माध्यम से योग को एक नया रूप देने का काम किया और पीएम मोदी ने विश्व योग दिवस मना कर पूरी दुनिया को योग के लिए आकर्षित करने का काम किया है.
शाह ने की ईशा योग सेंटर की तारीफ
अमित शाह ने सद्गुरु को संबोधित करते हुए कहा कि- आपने यह जो स्थान बनाया है, जहां हम सब आज बैठे हैं, वह केवल एक तीर्थ स्थल नहीं है, बल्कि योग, साधना, भक्ति, आत्मचिंतन और मुक्ति का केंद्र बनकर आज पूरे विश्व में उभरा है. ईशा योग केंद्र ने योग और ध्यान के माध्यम से करोड़ों-करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक सोच तथा सकारात्मक दिशा का उद्भव करने का काम किया है. ‘आदि योगी’ की यह 112 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा हमें अपनी आध्यात्मिक यात्रा के 112 मार्गों की अनुभूति और परिचय दोनों कराती है. हमें यहां आकर ही मालूम पड़ता है कि जीवन का अंतिम लक्ष्य शिवत्व की प्राप्ति करना है.
ध्यान अंधविश्वास नहीं, विज्ञान’-शाह
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि- उन्होंने सद्गुरु के शिवरात्रि महोत्सव के बारे में बहुत सुना था. लेकिन आज मैं यहां आया हूं तब मैं निश्चित रूप से पूरे विश्व को कहना चाहता हूं, यह अद्भुत है, अकल्पनीय है, अवर्णनीय है. उन्होंने कहा कि तीर्थ स्थान की रचना में सद्गुरु ने विज्ञान और अध्यात्म को साथ में लाकर यह सिद्ध किया है कि ध्यान, ऊर्जा और चेतना की अवस्थाएं अंधविश्वास नहीं हैं, बल्कि मूलभूत विज्ञान है. आपने सभी को यह अनुभूति कराई है कि शिव ही शाश्वत है, शिव ही चेतना है और शिवत्व को जागृत करने का यही एक रास्ता है.
जानें-अमित शाह के भाषण की अहम बातें-
महाशिवरात्रि में आदि शिव के दर्शन हुए. आज शिव और पार्वती के मिलन का दिन है. आज भक्ति के माध्यम से भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है.
यहां शिव आदियोगी के रूप में विराजमान हैं. वो अलग-अलग रूप में हैं. शिव आराध्य नहीं बल्कि भक्ति का मूल आधार हैं. ये भक्ति की पराकाष्ठा का स्वरूप हैं.
यहां आकर ही मालूम चलता है कि शिवत्व ही अंतिम लक्ष्य.
ईशा योग इश्वर से युवाओं को जोड़ने का माध्यम बन गया है. सद्गुरु जी ने युवाओं को धर्म से जोड़ने का का ही नहीं बल्कि उनको धर्म का महत्व समझाया है. सधगुरु जग्गी वासुदेव आज लोगों को जीने का रास्ता सिखा रहे हैं.
पूरी दुनिया को आपके जरिए सनातन धर्म को समझने का मौका मिला है. पूरे दुनिया को आपके जरिए पर्यावरण के लिए भी संदेश आपके जरिए मिला है.
योग प्राचिन होकर भी प्रासंगिक है. स्थिर होकर भी हमारे जीवन में हैं. योग भक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है और परमात्मा से जोड़ता है.
भारत के अध्यात्मिक संस्कृति की व्याख्या तमिल इतिहास के बगैर सम्भव नहीं है. महर्षि तिरुमूलन ने अध्यन किया और हमारे वेदों के 3000 से ज्यादा श्लोकों की रचना की.अगस्त्य मुनि का भी योगदान है.














