उमाकांत त्रिपाठी।उत्तर में बादशाहत कायम करने के बाद बीजेपी की नजर अब दक्षिण पर है. सबसे पहले उसके निशाने पर तमितलनाडु है, जहां 2026 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. तमिलनाडु के चीफ मिनिस्टर एमके स्टालिन बीजेपी विरोध का झंडा उठाए घूम रहे हैं. त्रिभाषा फार्मूला नकार रहे हैं. यहां तक कि रुपये का लोगो भी बदल डाला. लेकिन अब बीजेपी उन्हें घेरने के लिए पुराने दोस्त से हाथ मिलाने की तैयारी में है. सूत्रों के मुताबिक, एआईएडीएमके नेता एके पलासामी दिल्ली पहुंच गए हैं और वे गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करने वाले हैं. इसके बाद आगे का एजेंडा तय होगा.
सूत्रों का दावा है कि-दोनों नेताओं के बीच बैठक से एआईएडीएमके के एनडीए में वापसी का रास्ता साफ हो सकता है. कहा ये भी जा रहा है कि तमिलनाडु में अलायंस के लिए बीजेपी और एआईएडीएमके के नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है. जिस तरह स्टालिन बीजेपी को उत्तर भारत की पार्टी बताकर निशाना साध रहे हैं, उससे बीजेपी के लिए भी एक स्थानीय पार्टी को साथ लेने में आसानी होगी. यही वजह है कि रास्ता बनाया जा रहा है.
मजबूरी और जरूरी भी
उधर, एआईएडीएमके को भी पता है कि डीएमके को सत्ता से हटाना है तो बीजेपी का साथ लेना ही होगा. इसलिए तमाम दिक्कतों के बावजूद वे एक बार फिर बीजेपी के साथ जाने का मन बना चुके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, साउथ तमिलनाडु के एक बड़े नेता का कहना है कि अगर बीजेपी उनकी बातों को समझती है तो पलानीसामी गठबंधन के लिए तैयार हो सकते हैं.
आइए समझते है गणित
2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां 23 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा, जिसमें 19 सीटों पर सीधे और 4 सीटों पर सहयोगी दलों के साथ मिलकर उम्मीदवार उतारे थे. बीजेपी को कुल 11.24% वोट मिले, जो 2019 के 3.6% वोट शेयर से तकरीबन चार गुना ज्यादा थे. AIADMK ने 20.46% वोट हासिल किया. इसलिए अगर दोनों के वोट बैंक को जोड़ दें तो कुल वोट 31 फीसदी से ज्यादा हो जाता है. जबकि डीएमके को सिर्फ 6.93% वोट शेयर मिला था. इसलिए इनका साथ आना डीएमके को टेंशन देने वाला है.














