उमाकांत त्रिपाठी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साइप्रस यात्रा दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस यात्रा के दौरान, उन्होंने साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडोलाइड्स के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और व्यापारिक नेताओं को संबोधित किया।
7 पॉइंट में समझें यात्रा का मकसद
1- ऐतिहासिक और राजनयिक संबंध: साइप्रस और भारत के बीच गर्मजोशी भरे राजनयिक संबंध हैं, जो साइप्रस की ब्रिटेन से स्वतंत्रता के बाद से हैं।
2- आर्थिक संबंध: दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2023-24 में 136.96 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। भारत साइप्रस को फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा, लोहा और स्टील, सिरेमिक उत्पाद, मशीनरी और रसायन निर्यात करता है।
3- रक्षा सहयोग: भारत और साइप्रस ने दिसंबर 2022 में रक्षा सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए और जनवरी 2025 में एक द्विपक्षीय रक्षा सहयोग कार्यक्रम पर हस्ताक्षर किए।
4- सांस्कृतिक संबंध: दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए कई समझौते हुए हैं।
5- तुर्की का कोण: साइप्रस की तुर्की के साथ जटिल संबंध हैं, जो भारत के लिए एक महत्वपूर्ण विचार है।
6- आईएमईसी और यूरोपीय संघ: साइप्रस भारत- मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने की उम्मीद है।
7- व्यापार और निवेश: दोनों देशों ने व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें साइप्रस स्टॉक एक्सचेंज और भारत के एनएसई के बीच सहयोग शामिल है।
मजबूत होंगे दोनों देशों के संबंध
प्रधानमंत्री मोदी की साइप्रस यात्रा दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने और नए अवसरों को तलाशने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह यात्रा व्यापार, निवेश, रक्षा और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर करने का अवसर प्रदान करती है।















