उमाकांत त्रिपाठी।आज भारत आजादी की 79वीं सालगिरह मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लालकिले से कई अहम ऐलान किए हैं। कुल 103 मिनट के भाषण में उन्होंने किसानों, महिलाओं और युवाओं को लेकर कई अहम बातें कहीं। उन्होंने आतंकियों को साफ संदेश दिया है कि अगर दुश्मनों ने फिर कोई हरकत की तो सेना चुप नहीं रहेगी। हम मुंहतोड़ जवाब देंगे। उन्होंने लालकिले से प्रधानमंत्री विकसित भारत योजना को शुरू करने का भी ऐलान कर दिया। इसके अलावा पीएम मोदी ने मिशन सुदर्शन चक्र लॉन्च करने का ऐलान किया है। यह ऐसा मौका होता है जब प्रधानमंत्री देश के विकास और सरकार के कामों का हिसाब-किताब देने के साथ ही आगे की रूपरेखा को भी देश के सामने रखते हैं।
मिशन सुदर्शन चक्र से सुरक्षित होगा देश
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि- तकनीक का विस्तार हआ है। ऐसे में राष्ट्र की सुरक्षा के लिए महारथ हासिल करने की जरूरत है। 2025 तक महत्वपूर्ण जगहों जैसे कि सामरिक और सिविलियन क्षेत्र, अस्पताल, रेलवे, आस्था के केंद्रों को तकनीक से सुरक्षा कवच दिया जाएगा। देश का हर नागरिक सुरक्षा महसूस करे। उन्होंने कहा,कि- अगले दस साल में भगवान श्रीकृष्ण से प्रेरणा लेकर सुरर्शन चक्र का मार्ग चना है। अब देश मिशन सुदर्शन चक्र लॉन्च करेगा। यह चक्र एक पावर फुल वेपन सिस्टम होगा जो कि दुश्मन के हमले को नाकाम कर देगा। यह मिशन आधुनिक सिस्टम पर आधारित होगा।
ये मिशन संकट को निपटाने में काम करेगा- पीएम
प्रधानमंत्री ने कहा कि- मैं देश को एक चिंता और चुनौती के लिए आगाह करना चाहता हूं सोची समझी साजिश से देश की डेमोग्राफी को बदला जा रहा है। नए संकट के बीज बोए जा रहे हैं। यह बर्दाश्त नहीं है। घुसपैठिए आदिवासियों की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। जब डेमोग्राफिक परिवर्तन होता है तो देश की सुरक्षा के लिए संकट पैदा होता है। हम देश में ऐसी हरकतों को स्वीकार नहीं करेंगे। इसलिए हमने हाई पावर डेमोग्राफी मिशन की शुरुआत की है। ये मिशन संकट को निपटाने में काम करेगा।
20 जिलों तक ही सीमित रह गया नक्सलवाद- पीएम
पीएम मोदी ने कहा कि- समृद्धि का रास्ता सुरक्षा से होकर गुजरता है। हमने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए समर्पण भाव से काम किया है। हम बदलाव लाने में सफल हुए हैं। देश का एक बहुत बड़ा हिस्सा नक्सलवाद के चपेट में था। सबसे ज्यादा नुकसान हमारे आदिवासी परिवारों का हुआ। हमने फौलादी हाथ से काम किया। कभी 125 से ज्यादा जिलों में नक्सलवाद अपनी जड़े जमा चुका था। आज9 ये सिर्फ 20 जिलों में सिमट गया है। हमने जनजातीय समाज की सेवा की है। एक जमाना था जब बस्तर को याद करते ही नक्सलवाद याद आता था। आज उसी बस्तर से नौजवान ओलंपिक में जा रहे हैं।














