उमाकांत त्रिपाठी।बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ा मुद्दा मिल गया है. मां को भगवान का स्थान देने वाले देश में किसी की मां को गाली देना मुद्दा तो बनता ही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत मां को सार्वजनिक रूप से गाली देना का मुद्दा अब बिहार चुनाव तक गूंजता नजर आ सकता है. बीजेपी के इस मुद्दे को लेकर इरादे साफ नजर आ रहे हैं. बिहार और बिहार के बाहर लगातार बीजेपी नेता इसे मुद्दा बना रहे हैं, रोज कोई न कोई कांग्रेस पर भड़क रहा है. मंगलवार को पीएम मोदी के- ‘मां के अपमान के लिए मैं राजद-कांग्रेस को क्षमा कर सकता हूं, बिहार की जनता कभी माफ नहीं करेगी’, बयान के बाद एनडीए की महिला बिग्रेड ने भी मोर्चा खोल दिया है. 4 सितंबर को बिहार बंद का ऐलान भी कर दिया गया है.
कांग्रेस से ऐसी गलतियां होती रही हैं और बीजेपी ऐसे मुद्दों को पकड़ने और फिर उसे बड़े मंच पर ले जाने में काफी अनुभवी. बीजेपी जानती है कि विपक्ष की किस भूल को कितना बड़ा मुद्दा बनाया जा सकता है. कैसे इससे वोटरों की भावनाओं को अपने पक्ष में किया जा सकता है. पीएम की मां को गाली देकर महागठबंधन फंस गई है. राहुल गांधी अपनी वोटर अधिकार यात्रा के दौरान इसे लेकर सफाई दे चुके हैं, लेकिन बीजेपी इसे बड़ा मुद्दा बनाती नजर आ रही है.
बिहार के अखबारों में भावुक अपील
बिहार के अखबारों में आज एनडीए की तरफ से विज्ञापन दिया गया है, जिसमें लोगों से 4 सितंबर को बिहार बंद में स्वेच्छा से शामिल होने की भावुक अपील की गई है. विज्ञापन में एक मां का फोटो और भड़कते हुए शख्स की फोटो भी लगाई गई है. इससे जाहिर हो रहा है कि बीजेपी पीएम मोदी की मां के अपमान को बड़ा मुद्दा बनाने जा रही.
राहुल के किए-कराए पर पानी फेर दिया?
राहुल गांधी बिहार चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का मुद्दा जोर-शोर से उठा रहे हैं. बिहार में इसे लेकर उन्होंने ‘वोटर अधिकार यात्रा’की. बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले लोगों का कहना है कि राहुल की इस रैली को इसमें आने वाली भीड़ से आंका जा सकता है. युवाओं में राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा को लेकर काफी उत्साह देखने को मिला. बिहार चुनाव से पहले राहुल ने इस रैली के जरिए अपने पक्ष में माहौल बनाने का पूरा प्रयास किया. लेकिन ऐसा लगता है कि ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान दरभंगा में राजद और कांग्रेस के मंच से प्रधानमंत्री और उनकी मां के खिलाफ अभद्र शब्दों के इस्तेमाल अब उनकी इस मेहनत पर पानी फेर सकता है. राहुल की वोटर अधिकार यात्रा समाप्त होते ही, बीजेपी ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. बिहार में 4 सिंबर को बंद भी बुलाया गया है.
BJP करेंगा आज कोर कमिटी की बैठक
भाजपा की कोर कमिटी की बैठक आज होने जा रही है. इसमें पीएम मोदी की मां को गाली पर रणीति बनाएगी. यह मुद्दा बीजेपी कितना गर्माएगी, ये भी तय हो सकता है. बिहार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा के साथ ही केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और नित्यानंद राय बैठक में शामिल होंगे. ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि बिहार को लेकर बीजेपी के पास पार्टी की सर्वे रिपोर्ट चुकी है. इसी आधार पर कमजोर और मजबूत सीटों के आधार पर टिकट बंटवारा होगा.
पीएम मोदी की बात भावनात्मक असर
वोटरों के मिजाज को बीजेपी और पीएम मोदी बहुत अच्छी तरह से समझते हैं. पीएम मोदी जब बोलते हैं, तो लोग उन्हें सुनते ही नहीं उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ते भी हैं. कई बार ऐसा देखा गया है कि पीएम मोदी ने जब-जब अपनी रैलियों में कहा है- विरोधी मुझे गाली देते हैं… लोगों पर इसका भावनात्मक असर देखा गया. इस बार भी कुछ ऐसा ही माहौल बनता नजर आ रहा है. मंगलवार को पीएम मोदी ने जब कहा- मुझे और मेरी मां को भद्दी गालियां दी गईं, तो हर दूसरे शख्स की जुबान पर ‘पीएम मोदी की मां को गाली’ का ही मुद्दा सुनने को मिला.
जब-जब विपक्ष की भूल पर BJP को मिला मुद्दा
मौत का सौदागर: साल 2007 में गुजरात के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर की संभावना जताई जा रही थी. तब सोनिया गांधी की एक चूक ने उन्हें गुजरात में सत्ता से दूर कर दिया था. सोनिया ने एक सभा में पीएम मोदी को ‘मौत का सौदागर’ कह दिया. बीजेपी ने इस मुद्दे को भुनाया और बीजेपी ने 183 में से 117 सीटें जीत लीं. चायवाला: साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने पीएम मोदी को एक कार्यक्रम के दौरान ‘चायवाला’ कहा था. बीजेपी और पीएम मोदी ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया और कांग्रेस को बैकफुट पर धकेल दिया. नीच: साल 2017 में गुजरात के विधानसभा चुनाव के दौरान एक बारर फिर मणिशंकर अय्यर ने बीजेपी को बैठे बिठाए एक मुद्दा दे दिया था. तब उन्होंने पीएम मोदी को ‘नीच’ कह दिया थी. पीएम मोदी ने इसे पूरे ओबीसी समाज के लोगों से जोड़कर उनका अपमान बताया. माहौल बन गया और कांग्रेस चुनाव हार गई. चौकीदार चोर है: साल 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने ‘चौकीदार चोर है’ का नारा दिया. लेकिन यही उनसे भूल हो गई. इसका बीजेपी ने ‘मैं भी चौकीदार’ से पलटवार किया. पीएम मोदी समेत सभी बीजेपी नेताओं ने तब खुद को चौकीदार बताया. पूरे देश में माहौल बन गया और कांग्रेस फिर पिछड़ गई.















