उमाकांत त्रिपाठी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को अरुणाचल प्रदेश पहुंचे. 5100 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की, इसमें ईटानगर के दो हाइड्रो प्रोजेक्ट भी शामिल हैं. हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट से बिजली बनाई जाएगी. यह प्रोजेक्ट कई मायनों में खास होता है क्योंकि बिजली के निर्माण के लिए कोयला, गैस या पेट्रोलियम को नहीं जलाना पड़ता. न ही धुआं, कार्बन डाई ऑक्साइड और प्रदूषण फैलता है. इस प्रोजेक्ट से मिलने वाली ग्रीन एनर्जी बार-बार इस्तेमाल की जा सकती है.इसका इस्तेमाल सिर्फ बिजली पैदा करने तक सीमित नहीं होता. मछली पालन करने, बाढ़ को रोकने और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने समेत यह कई तरह से फायदेमंद साबित होता है.अब सवाल है कि क्या होता है हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट, यह कैसे बिजली पैदा करता है और क्यों इसे जरूरी माना जाता है?
जानिए- क्या है हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट, कैसे बनती है बिजली?
आसान भाषा में समझें तो हाइड्रो पावर प्लांट प्रोजेक्ट का काम पानी की एनर्जी को इलेक्ट्रिकल एनर्जी (बिजली) में बदलना है. यानी पानी से बिजली को बनाना है. इसके अलावा यह भी यह कई तरह से फायदेमंद साबित होता है. इस प्रोजेक्ट के कई हिस्से होते हैं, जैसे- बांध, टर्बाइन, ट्रांसफर, बिजली लाइन और पावरहाउस.
इस पूरे प्रोजेक्ट्स से बिजली कैसे बनती है, अब इसे भी समझ लेते हैं.
हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के लिए पहले नदीं पर बांध बनाया जाता है.
बांध एक तरह से पानी को रोककर उसकी एनर्जी को जमाने का काम करता है.
यहां से पानी को टर्बाइन तक ले जाने के लिए मोटे पाइप का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे पेनस्टॉक्स कहते हैं.
पानी का तेज़ दबाव और वेग (Kinetic Energy) टर्बाइन के ब्लेड्स से टकराता है.
पानी के इसी दबाव से टर्बाइन के ब्लेड घूमते हैं और इससे जुड़ा जनरेटर अपना काम शुरू करता है.
जनरेटर में लगा चुंबक और तार की कुंडली (Coil) घूमती है, इस तरह बिजली पैदा होती है.
यहां से बिजली ट्रांसफॉर्मर तक तक पहुंचती है और पावर लाइन के जरिए शहरों-गांवों में पहुंचाई जाती है.
देश में कई राज्यों में हाइड्रो पावर प्लांट हैं.
सिर्फ बिजली नहीं, हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के कई हैं फायदे
आमतौर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के जरिए बिजली बनाने का लक्ष्य रखा जाता है, लेकिन इस पूरे प्रोजेक्ट के जरिए सिर्फ बिजली उत्पादन ही नहीं, कई तरह से फायदे मिलते हैं.
सिंचाई के लिए पानी: बांध बनने से सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ जाती है.
मछली पालन: बांध के पानी का इस्तेमाल मछली पालन के लिए किया जाता है.
सुरक्षित पर्यावरण: इस प्रक्रिया में कोयला, तेल और जीवाश्म ईधनों का इस्तेमाल नहीं होता, इसलिए प्रदूषण न होने से पर्यावरण सुरक्षित रहता है.
बाढ़ कंट्रोल: बाढ़ की स्थिति में डैम बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और पानी के फ्लो को कंट्रोल करते हैं.
लगातार एनर्जी का सोर्स: पानी लगातार उपलब्ध होने के कारण यहां ऊर्जा का सोर्स खत्म नहीं होता.
रोजगार: हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट खासकर स्थानीय लोगों को रोजगार देने का काम करता है.
टूरिज्म: हाइड्रो पावर प्लांट उस राज्य में आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करके टूरिज्म का दायरा बढ़ाते हैं.
जानिए- देश में कहां-कहां हाइड्रो पावर प्लांट?
उत्तरी भारत
हिमाचल प्रदेश:भाखड़ा नांगल डैम, नाथपा झाकड़ी, कोल डैम, पोंग डैम.
उत्तराखंड:टिहरी डैम, कोटेश्वर परियोजना, धौली गंगा परियोजना.
जम्मू-कश्मीर: सलाल, बगलिहार, किशनगंगा, दुलहस्ती.














