उमाकांत त्रिपाठी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। इस चुनाव में सिर्फ राजनीतिक समीकरण ही नहीं बदले, बल्कि कई ऐसे रिकॉर्ड भी बने जो पहले कभी देखने को नहीं मिले थे। बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद अब पूरे देश में बंगाल चुनाव की चर्चा हो रही है।
इस बार के चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी की रणनीति की रही। पीएम मोदी ने बंगाल चुनाव को लेकर जिस गंभीरता का परिचय दिया, वह पहले शायद ही किसी राज्य चुनाव में देखने को मिला हो।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार के लिए कई राज्यों में जाते रहे हैं, लेकिन आमतौर पर वे रात्रि विश्राम नहीं करते। हालांकि बंगाल चुनाव में पहली बार पीएम मोदी ने कोलकाता में राज्यपाल भवन में रात्रि विश्राम किया। इसे बीजेपी की चुनावी रणनीति और बंगाल को लेकर पार्टी की गंभीरता के तौर पर देखा गया।
इस चुनाव में रिकॉर्ड तोड़ मतदान भी देखने को मिला। पश्चिम बंगाल में मतदान प्रतिशत 92.47 तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। इससे पहले 2011 के चुनाव में करीब 84 प्रतिशत मतदान हुआ था। भारी मतदान ने साफ संकेत दे दिए थे कि इस बार जनता बदलाव के मूड में है।
बंगाल की राजनीति में पिछले 50 वर्षों से चुनावी मुकाबले ज्यादातर एकतरफा रहे। कभी कांग्रेस, कभी वाम दल और फिर तृणमूल कांग्रेस का दबदबा देखने को मिला। लेकिन 2026 का चुनाव पूरी तरह अलग रहा। इस बार बीजेपी और टीएमसी के बीच सीधी और कड़ी टक्कर दिखाई दी। चुनावी माहौल ने शुरुआत से ही मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया था।
एक और बड़ी बात रही चुनाव के दौरान हिंसा में कमी। बंगाल चुनाव अक्सर हिंसा और विवादों को लेकर चर्चा में रहते थे। लेकिन इस बार केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 2 लाख 40 हजार अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए थे। इसका असर यह हुआ कि चुनाव अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा और बड़ी हिंसक घटनाएं सामने नहीं आईं।
बीजेपी की जीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की जोड़ी को भी अहम माना जा रहा है। अमित शाह लंबे समय तक बंगाल में डटे रहे और लगातार रैलियां तथा रोड शो करते नजर आए। बीजेपी ने बूथ स्तर तक अपनी रणनीति मजबूत की, जिसका असर चुनाव नतीजों में साफ दिखाई दिया।















