उमाकांत त्रिपाठी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट बैठक में मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को सादगी अपनाने और संसाधनों का सही उपयोग करने की सलाह दी। सूत्रों के अनुसार पीएम मोदी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने व्यवहार और कार्यशैली से लोगों के सामने अच्छा उदाहरण पेश करना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश के उपलब्ध संसाधनों का सबसे बेहतर तरीके से उपयोग होना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने सरकारी काफिलों में गाड़ियों की संख्या कम रखने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि जब देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है, तब मंत्रियों और अधिकारियों को बिना जरूरत नई गाड़ियां खरीदने से बचना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में सादगी और जिम्मेदारी दोनों जरूरी हैं।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ प्रेरणादायक उदाहरण भी साझा किए। उन्होंने जबलपुर हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश का जिक्र किया, जो साइकिल से अदालत जाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने गुजरात के राज्यपाल द्वारा हाल ही में बस से यात्रा करने का उदाहरण भी दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के ऐसे कदम समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और आम नागरिकों को भी प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी सामान्य लोगों से अधिक होती है, इसलिए उन्हें अपने आचरण में अनुशासन और सादगी बनाए रखनी चाहिए।
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल टेक्नोलॉजी और वर्क फ्रॉम होम को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी ने लोगों की जिंदगी को आसान बनाया है और कई काम अब घर बैठे आसानी से किए जा सकते हैं।
पीएम मोदी ने सरकारी और निजी दोनों दफ्तरों में वर्चुअल मीटिंग और वर्क फ्रॉम होम को ज्यादा प्राथमिकता देने की अपील की। उनका मानना है कि इससे समय, ऊर्जा और संसाधनों की बचत होगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को ऊर्जा और ईंधन की बचत पर भी गंभीरता से काम करना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने लोगों से सोने की खरीदारी को लेकर भी अपील की।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत का काफी पैसा सोने के आयात में विदेश चला जाता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक सोने की खरीदारी टालने पर विचार करें।
प्रधानमंत्री ने बैठक में यह भी कहा कि देशहित में छोटे-छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। जनप्रतिनिधियों को अपने व्यवहार से ऐसा उदाहरण पेश करना चाहिए, जिससे समाज में जिम्मेदारी और सादगी का संदेश पहुंचे।














