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केंद्रीय मंत्री शिवराज ने पीएम मोदी पर लिखी किताब, 26 मई को दिल्ली में होगा ‘अपनापन’ का विमोचन, जानिए इसमें क्या है खास

उमाकांत त्रिपाठी। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व और कार्यशैली पर आधारित नई पुस्तक ‘अपनापन’ लिखी है। शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। इस पुस्तक का विमोचन 26 मई को दिल्ली में किया जाएगा।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘अपनापन’ उनके लिए केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बिताए गए 33 वर्षों के अनुभवों को शब्दों में उतारने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि दुनिया नरेंद्र मोदी को एक बड़े नेता के रूप में देखती है, लेकिन उन्होंने उनमें एक साधक, कर्मयोगी और असाधारण इंसान को करीब से महसूस किया है।

उन्होंने लिखा कि लोगों ने मोदी को बड़े मंचों से भाषण देते देखा है, लेकिन उन्होंने उस व्यक्ति को भी करीब से देखा है, जो देर रात तक काम करने के बाद अगली सुबह उसी ऊर्जा और समर्पण के साथ फिर देश सेवा में जुट जाता है।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हृदय गरीबों, किसानों, माताओं, बहनों, बेटियों और पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए धड़कता है। उनके मुताबिक मोदी का नेतृत्व केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण की भावना से जुड़ा हुआ है।

अपने पोस्ट में शिवराज सिंह चौहान ने 1991 की एकता यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय कई लोग इसे केवल राजनीतिक यात्रा मान रहे थे, लेकिन नरेंद्र मोदी ने इसे राष्ट्रीय चेतना का अभियान बना दिया था। उनकी सोच थी कि तिरंगा केवल श्रीनगर के लाल चौक तक नहीं, बल्कि देश के हर युवा के दिल तक पहुंचना चाहिए।

शिवराज ने कहा कि उसी दौरान उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि नेतृत्व केवल भाषणों से नहीं आता, बल्कि तपस्या, अनुशासन, समर्पण और अपनेपन से बनता है।

उन्होंने बताया कि इस पुस्तक में केवल घटनाओं का जिक्र नहीं किया गया है, बल्कि उस सोच और दृष्टिकोण को भी शामिल किया गया है, जिसने देश को बदलने का साहस दिखाया।

शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया कि यह पुस्तक युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीति में काम करने वाले लोगों को प्रेरित करेगी। उन्होंने कहा कि यह किताब बताएगी कि बड़े बदलाव केवल बड़े पदों से नहीं, बल्कि बड़े संकल्प, अनुशासन और सामूहिक प्रयासों से संभव होते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि इस पुस्तक को पढ़ने के बाद लोगों को यह महसूस हो कि देश बदलने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति और समर्पण जरूरी है, तो वे अपने इस प्रयास को सफल मानेंगे।

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