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मेलोनी को Melody ही नहीं, ये 2 खास तोहफे भी मिले, पीएम मोदी ने दिया खास गिफ्ट, पहनेंगी तो खिल उठेंगी

उमाकांत त्रिपाठी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी देने की हर ओर जबर्दस्त चर्चा है. पीएम मोदी का ये खास तोहफा पाकर मेलोनी भी फूली नहीं समाईं और उन्होंने वीडियो में खुशी भी बयां की. दोनों प्रधानमंत्रियों का ये मोमेंट कल से सोशल मीडिया पर छाया हुआ है. हालांकि पीएम ने मेलोनी को सिर्फ Melody नहीं दी, बल्कि वे दो बेहद खास और खूबसूरत तोहफे भी देकर आए हैं. जिन्हें पहनकर मेलोनी खिल उठेंगी. इसके अलावा पीएम मोदी ने 5 देशों की यात्रा में अन्य देशों के प्रमुखों को भी भारत के अद्भत तोहफे दिए हैं, आइए आगे जानते हैं इन सभी के बारे में…

प्रधानमंत्री मोदी इटली की सीएम मेलोनी को बेहद खूबसूरत मूंगा सिल्क से बनी सुनहरी रेशम की साड़ी देकर आए हैं. जिसे पहनकर मेलोनी किसी परी से कम नहीं लगेंगी. डार्क रॉयल ब्लू कलर और गोल्डन धागों से बुनी गई ये साड़ी असम की गोल्डन रेशम से बनी है. यह बेहद खास और महंगी रेशम है. सबसे खास बात है कि इसे बनाने में कोई केमिकल या डाई इस्तेमाल नहीं होती. यह पूरी तरह प्राकृतिक और पर्यावरण अनुकूल है.यह पसीना सोखने और धूप से बचाने का भी काम करती है. असम की सुनहरी रेशन की बनावट काफी रॉयल है और इटली की लग्जरी टेक्सटाइल व डिजाइन से मिलती है.
सिर्फ साड़ी ही नहीं पीएम मोदी मेलोनी को मणिपुर के दुर्लभ फूल से प्रेरित शिरुई लिली सिल्क से बनी एक स्टोल भी भेंट करके आए हैं. सफेद रंग की इस शॉल की किनारी लाल है और इस पर गुलाबी रंग के फूल बने हैं. दरअसल इस स्टोल का फ्रेबिक और डिजाइन दोनों ही शिरुई लिली फूल जैसे हैं.घंटी के आकार का यह फूल काफी नाजुक होता है, इसकी पंखुड़ियां हल्के गुलाबी-सफेद रंग की होती हैं. सबसे खास बात है कि यह फूल दुनिया में कहीं और नहीं, सिर्फ मणिपुर में ही खिलता है. यह स्टोल हिमालयी कारीगरी और भारतीय संस्कृति का संगम है. वास्तव में यह मेलोनी के लिए बेहतरीन गिफ्ट है.

प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा में 5 देशों में गए थे. यूरोप के अन्य देशों की विजिट के दौरान पीएम मोदी को भी कई उपहार मिले हैं. यूनाइटेड नेशंस फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन ने भी पीएम को तोहफा दिया, वहीं पीएम मोदी भी डायरेक्टर जनरल FAO के लिए भारत से नायाब तोहफा लेकर गए. पीएम ने डीजी को भारत की समृद्ध खाद्यान्न विरासत में से हेल्दी मिलेट्स बार भेंट किए जो ज्वार, बाजरा आदि ऑर्गनिक मोटे अनाजों से बने थे.मिलेट्स को देशभर में और खासतौर पर महाराष्ट्र में उगाया जाता है. ये फसलें सूखे मौसम और कम पानी वाली जगहों पर होती हैं. बेहद पोष्टिक मिलेट्स फाइबर, प्रोटीन और जरूरी मिनरल्स का खजाना होते हैं.

प्रधानमंत्री नॉर्वे भी गए, जहां वे नॉर्वे के प्रधानमंत्री से मिले. पीएम ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को सिक्किम में तैयार प्रेस्ड फूलों से बनी पेंटिंग और पेपरवेट उपहार में दिए. वहीं पीएम मोदी नॉर्वे के राजा के लिए चांदी की बनी सेलबोट लेकर गए. यह सेलबोट का मॉडल ओडिशा के कटक शहर की प्रसिद्ध तारकसी कला का शानदार नमूना है. तारकसी को चांदी की जालीदार नक्काशी की कला कहते हैं. कटक को भारत का “सिल्वर सिटी” भी कहा जाता है. 500 साल पुरानी यह कला बेहद महीन और जालीदार नक्काशी पर काम करती है. यह उपहार नॉर्वे के राजा हाराल्ड V के लिए खास महत्व रखता है चूंकि राजा साहब को नौकायन (sailing) का बहुत शौक है. उन्होंने ओलंपिक खेलों में नॉर्वे का प्रतिनिधित्व भी किया था.
पीएम मोदी नॉर्वे के क्राउन प्रिंस के लिए भी उपहार लेकर गए. उन्होंने क्राउन प्रिंस को बेहद खूबसूरत कलमकारी पेंटिंग दी. जिस पर सूर्य और चंद्रमा बने हैं. कलमकारी भारत की प्राचीन और प्रसिद्ध कला है. इसमें सूती कपड़े पर हाथ से पेंटिंग की जाती है या लकड़ी के ब्लॉक से प्रिंट किया जाता है. इसमें प्राकृतिक रंगों का ही इस्तेमाल होता है. यह कला आंध्र प्रदेश में शुरू हुई थी. उपहार में दी गई पेंटिंग सूर्य और चंद्रमा के मोटिफ पर आधारित है. जो ऊर्जा जीवन शक्ति और जागरूकता का प्रतीक है होने के साथ ही शांति, अंतर्ज्ञान और अंदरूनी भावनाओं का प्रतीक है.यह पेंटिंग पूरे ब्रह्मांड में संतुलन और जीवन की दोहरा स्वभाव (duality) को दर्शाती है.
स्वीडन के प्रधानमंत्री के लिए पीएम मोदी दो उपहार लेकर गए. ये दोनों ही काफी खास हैं. पीएम ने उन्हें लोकताक टी भेंट की जो पूर्वोत्तर में मणिपुर के लोकताक झील के आसपास की हरी-भरी पहाड़ियों से आई एक खास और शुद्ध चाय है. लोकताक झील पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है, जहां यह चास उगती है. इसके अलावा दूसरा गिफ्ट उन्होंने लद्दाख की प्योर वूल स्टोल भी दी, जिसे भारत में पश्मीना शॉल कहा जाता है. इसे देखकर ऐसा लगता है जैसे हिमालय की आत्मा को कपड़े में बुना गया है. यह स्टोल लद्दाख के ऊंचे चांगथांग पठार (5,000 मीटर से ज्यादा ऊंचाई) पर बनाया जाता है. यहां बहुत ठंड पड़ती है. इस स्टोल को चांगथांगी बकरी के बहुत नरम और महीन ऊन (under-fleece) से बनाया जाता है.
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दौरे पर गए पीएम मोदी वहां के क्राउन प्रिंस के लिए बिहार के मिथिला का खास उपहार लेकर गए. वे प्रिंस के लिए मिथिला का मखाना लेकर गए, जिसे फॉक्स नट या कमल के बीज भी कहते हैं. यह मिथिला का प्रीमियम उत्पाद है. यूएई में बाहर से ही मेवाएं जाती हैं, ऐसे में भारत का विशिष्ट GI टैग वाला मखाना एक खास उपहार बन गया. यह मखाना मीठे पानी के तालाबों और जलाशयों से लिया जाता है. यह हल्का, कुरकुरा और स्वादिष्ट होता है.मखाना बहुत पौष्टिक है. इसमें प्रोटीन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसे पारंपरिक खाने, नाश्ते, मिठाइयों और धार्मिक प्रसाद में इस्तेमाल किया जाता है.
<br />वहीं संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति के लिए पीएम मोदी फलों में खास और मेघालय का अनानास लेकर गए.मेघालय के अनानास दुनिया के सबसे बेहतरीन अनानासों में से एक माने जाते हैं. इन्हें Geographical Indication (GI) टैग मिला हुआ है, जो उनकी बेहतर गुणवत्ता और मेघालय की पहचान दर्शाता है. ये अनानास मेघालय की साफ-सुथरी और ऊंची पहाड़ियों पर उगाए जाते हैं. इनकी खासियत यह है कि इनमें चीनी की मात्रा बहुत ज्यादा और खटास बहुत कम होती है. स्वाद बेहद मीठा और खुशबूदार होता है.

यूएई प्रेसिडेंट को पीएम मोदी ने उपहार में सिर्फ अनानास ही नहीं बल्कि गुजरात का प्रसिद्ध केसर आम भी दिया. जीआई टैग वाले केसर आम सबसे बड़ी खासियत उसका खूबसूरत केसरिया (सुनहरा-नारंगी) रंग, बिना रेशे वाला गूदा और बेहद मीठी तीव्र खुशबू है.<br />गुजरात में केसर आम का स्वागत आमरस के भोज के रूप में किया जाता है. यह गुजराती मेहमाननवाजी और आतिथ्य का प्रतीक माना जाता है. केसर आम गुजरात की उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) कृषि विरासत की शान है.

स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया को भी पीएम मोदी ने तोहफा दिया. यह गोंड पेंटिंग मध्य प्रदेश की एक जीवंत और रंग-बिरंगी जनजातीय कला का बेजोड़ नमूना है. यह गोंड समुदाय द्वारा बनाई जाती है, जो भारत के सबसे बड़े आदिवासी समुदायों में से एक है. गोंड कला की मान्यता है कि “अच्छी तस्वीर देखने से अच्छा भाग्य आता है”. पहले यह चित्र त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान घर की दीवारों और फर्श पर बनाए जाते थे. अब इसे पेंटिंग का रूप दिया गया है. गोंड कलाकार पशु-पक्षी, जंगल और प्राकृतिक दृश्यों को बहुत खूबसूरत ढंग से बनाते हैं. स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया को यह उपहार इसलिए खास है क्योंकि स्वीडन में भी प्रकृति का सम्मान, सस्टेनेबिलिटी और पर्यावरण संरक्षण को बहुत महत्व दिया जाता है.

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