लुधियाना: Ludhiana Minor Rape Case ने पूरे पंजाब को झकझोर कर रख दिया है। शहर में 13 वर्षीय एक नाबालिग बच्ची के सात महीने की गर्भवती होने का मामला सामने आया है। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और पॉक्सो (POCSO) कानून के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। **Ludhiana Minor Rape Case** की जांच जारी है और पुलिस मेडिकल रिपोर्ट व अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
परिवार के अनुसार, बच्ची को अचानक पेट में तेज दर्द हुआ, जिसके बाद उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया। जांच में पता चला कि वह लगभग सात महीने की गर्भवती है। इसके बाद बच्ची ने अपनी मां को कथित यौन उत्पीड़न की जानकारी दी।
बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर हुआ खुलासा
परिजनों ने बताया कि दो दिन पहले बच्ची के पेट में अचानक तेज दर्द शुरू हुआ। दर्द बढ़ने पर उसकी मां ने उसकी तबीयत की जांच की और स्थिति असामान्य लगने पर डॉक्टर से संपर्क किया।
एक निजी डॉक्टर ने जांच के बाद बताया कि बच्ची गर्भवती है और गर्भ लगभग सात महीने का है। यह जानकारी मिलने के बाद परिवार पूरी तरह हैरान रह गया।
इसके बाद मां ने बच्ची से विस्तार से बात की। परिवार का आरोप है कि बच्ची ने दो अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा उसके साथ यौन शोषण किए जाने की जानकारी दी।
परिजनों का आरोप
पीड़िता के परिवार का आरोप है कि एक आरोपी उनका दूर का रिश्तेदार है, जिस पर परिवार भरोसा करता था। वहीं दूसरा आरोपी उसी इलाके में किराए पर रह रहा था।
परिजनों का कहना है कि बच्ची डर और धमकियों की वजह से लंबे समय तक किसी को घटना के बारे में नहीं बता सकी। जब उसकी तबीयत बिगड़ी और गर्भावस्था का पता चला, तब पूरी घटना सामने आई।
पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
परिवार की शिकायत के आधार पर थाना डिवीजन नंबर-6 पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है। नाबालिग का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है तथा डॉक्टरों की राय के आधार पर आगे की चिकित्सकीय प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
मामले में POCSO कानून के तहत भी कार्रवाई की जा रही है, क्योंकि पीड़िता नाबालिग है।
डॉक्टरों की निगरानी में बच्ची
पुलिस के अनुसार बच्ची की स्वास्थ्य स्थिति पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम नजर रखे हुए है। मेडिकल रिपोर्ट और अन्य जांच पूरी होने के बाद आगे का उपचार तय किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि बच्ची की सुरक्षा और गोपनीयता सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी कारण उसकी पहचान से जुड़ी किसी भी जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है।
जांच के कई पहलुओं पर काम
जांच अधिकारी मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। पुलिस घटनाक्रम, मेडिकल रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्य और गवाहों के बयान एकत्र कर रही है।
यदि जांच में अतिरिक्त तथ्य सामने आते हैं तो उनके आधार पर अन्य कानूनी धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
POCSO कानून क्या है?
बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए भारत में **POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) Act** लागू है।
इस कानून के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के साथ यौन अपराधों के मामलों में विशेष प्रावधान किए गए हैं। ऐसे मामलों की जांच संवेदनशील तरीके से की जाती है और पीड़ित की पहचान को गोपनीय रखना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में समय पर शिकायत, मेडिकल जांच और मनोवैज्ञानिक सहायता पीड़ित के पुनर्वास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।
पुलिस की अपील
लुधियाना पुलिस ने लोगों से अपील की है कि मामले को लेकर किसी भी तरह की अफवाह या अपुष्ट जानकारी सोशल मीडिया पर साझा न करें। जांच पूरी होने तक केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
पुलिस ने यह भी कहा कि यदि किसी बच्चे के साथ किसी प्रकार का यौन उत्पीड़न या शोषण होने की आशंका हो तो तुरंत पुलिस या संबंधित प्राधिकरण को सूचना दें, ताकि समय रहते कानूनी कार्रवाई और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।














