उमाकांत त्रिपाठी।शिक्षक दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुने गए शिक्षकों से खास बातचीत की। पीएम मोदी ने शनिवार को उन 48 स्कूली शिक्षकों से संवाद किया, जिन्हें आज राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इस बातचीत का करीब 5 मिनट का वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक YouTube चैनल पर जारी किया गया।
बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने शिक्षकों से शिक्षा, बच्चों के बदलते व्यवहार, पब्लिक स्पीकिंग, स्क्रीन टाइम और स्कूलों में ड्रेस कोड जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। पीएम मोदी ने एक महिला शिक्षक से पब्लिक स्पीकिंग को लेकर सवाल भी पूछा और उनसे जानना चाहा कि अगर वह उनके स्कूल के छात्र होते और एक अच्छा स्पीकर बनना चाहते, तो उन्हें क्या करना चाहिए।
पीएम मोदी ने पूछा- अच्छा स्पीकर कैसे बनूं?
बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने महिला शिक्षक से कहा कि आप बच्चों को पब्लिक स्पीकिंग सिखाती हैं। अगर मैं आपका स्टूडेंट हूं और मुझे एक अच्छा स्पीकर बनना है, तो मुझे क्या करना चाहिए?
शिक्षक ने जवाब दिया कि एक अच्छा स्पीकर बनने के लिए सबसे पहले कॉन्फिडेंस दिखाना जरूरी है। इस पर पीएम मोदी ने मुस्कुराते हुए पूछा कि आखिर यह कॉन्फिडेंस आएगा कैसे?
टीचर ने बताया कि कॉन्फिडेंस के लिए लगातार प्रैक्टिस करनी होती है। यानी पब्लिक स्पीकिंग में बेहतर बनने के लिए बच्चों को नियमित रूप से बोलने का अवसर देना और उनका अभ्यास कराना जरूरी है।
स्क्रीन टाइम को लेकर पीएम मोदी ने कही बड़ी बात
पीएम मोदी ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि स्क्रीन टाइम अब एक तरह की लत बन गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों को वास्तविक खेलों की तरफ बढ़ाया जाना चाहिए।
पीएम मोदी ने कहा कि अगर कोई बच्चा खेलों में गहरी रुचि लेना शुरू कर दे और खेल से मतलब वीडियो गेम नहीं बल्कि मैदान पर जाकर वास्तविक खेल खेलने से हो, तो धीरे-धीरे वह स्क्रीन की इस लत से बाहर निकल सकता है।
उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बच्चों को सिर्फ पढ़ाई तक सीमित रखने के बजाय उन्हें खेल और दूसरी गतिविधियों से भी जोड़ना जरूरी है।
ड्रेस कोड और बच्चों के व्यवहार पर भी चर्चा
प्रधानमंत्री ने ड्रेस कोड के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ड्रेस कोड का मुद्दा कुछ बड़े शहरों या विश्वविद्यालयों में सामने आया है। ऐसे मामलों में कई बार जागरूकता की कमी होती है। कभी-कभी नियम बिना पर्याप्त स्पष्टीकरण के लागू कर दिए जाते हैं।
पीएम मोदी ने शिक्षकों से बच्चों के बदलते व्यवहार को समझने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बच्चों के मन में पैदा होने वाली आशंकाओं और उनके प्रभावों के प्रति लगातार जागरूक रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को यह देखना चाहिए कि कौन से कदम बच्चों के व्यवहार में बदलाव ला रहे हैं। इससे बच्चों की समस्याओं को समय रहते समझने और उनका समाधान करने में मदद मिल सकती है।
इस साल 82 शिक्षकों और एजुकेटर्स को राष्ट्रीय पुरस्कार
इस वर्ष तीन अलग-अलग विभागों से कुल 82 शिक्षकों और एजुकेटर्स को National Teachers Award के लिए चुना गया है। इनमें 48 स्कूली शिक्षक शामिल हैं।
इसके अलावा उच्च शिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक से 21 फैकल्टी सदस्यों को चुना गया है। वहीं कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय से 13 स्किल ट्रेनर्स को भी इस सम्मान के लिए चयनित किया गया है।
यह पुरस्कार शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों और शिक्षाविदों को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है।
2024 में पीएम मोदी ने तमिलनाडु की शिक्षिका से की थी बातचीत
यह पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री मोदी ने National Teachers Award पाने वाले शिक्षकों से बातचीत की है। वर्ष 2024 में भी उन्होंने पुरस्कार विजेता शिक्षकों से मुलाकात की थी।
उस दौरान तमिलनाडु से आई एक शिक्षिका ने बताया था कि उनके इलाके में कई लोग स्थानीय भाषा में पढ़ना चाहते हैं। इस पर पीएम मोदी ने कहा था कि हमारे बीच यह भ्रम है कि तमिलनाडु में सभी लोग अंग्रेजी जानते होंगे।
पीएम मोदी ने इसी संदर्भ में नई शिक्षा नीति में मातृभाषा पर दिए गए जोर का उल्लेख किया था।
2025 में शिक्षकों से GST और ऑनलाइन गेमिंग पर चर्चा
वर्ष 2025 में भी प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षक दिवस से एक दिन पहले दिल्ली में राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले 45 शिक्षकों से मुलाकात की थी। पीएम मोदी ने करीब 35 मिनट तक शिक्षकों को संबोधित किया था।
उस बातचीत में GST में सुधार, ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े कानून और आत्मनिर्भर भारत जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। इस बार की बातचीत में भी बच्चों से जुड़े कई समसामयिक मुद्दे प्रमुख रहे, जिनमें स्क्रीन टाइम और बच्चों के बदलते व्यवहार पर विशेष जोर दिया गया।
शिक्षक दिवस के मौके पर पीएम मोदी की शिक्षकों से यह बातचीत शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास से जुड़े मुद्दों पर भी केंद्रित रही।















