खबर इंडिया की।तमिलनाडु के प्रमुख मंदिरों में 1 सितंबर से लागू हुआ Tamil Nadu Temple Mobile Ban अब चर्चा का विषय बन गया है। कांचीपुरम स्थित देवराजस्वामी अथि वरदराज मंदिर में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध के बाद मंदिर का नजारा बदलता दिखाई दे रहा है। जहां पहले ध्वजस्तंभ के आसपास बड़ी संख्या में युवा श्रद्धालु सेल्फी लेते और मंदिर की तस्वीरें खींचते नजर आते थे, अब वहां बुजुर्ग और मिडिल एज के श्रद्धालुओं की संख्या ज्यादा दिखाई दे रही है।
मंदिर प्रशासन के मुताबिक, मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लागू होने के बाद रोजाना मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में करीब 20 फीसदी तक कमी दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा असर युवाओं की संख्या पर देखने को मिला है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि मंदिर की पवित्रता और धार्मिक माहौल को बनाए रखने के लिए मोबाइल बैन जरूरी है।
52 बड़े मंदिरों में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध
तमिलनाडु में 1 सितंबर से राज्य के 52 बड़े मंदिरों में मोबाइल फोन ले जाने पर रोक लगा दी गई है। श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में प्रवेश करने से पहले अपना स्मार्टफोन निर्धारित काउंटर पर जमा करना होगा।
मोबाइल जमा करने के लिए श्रद्धालुओं से प्रति फोन 5 रुपये का शुल्क लिया जा रहा है। जमा किए गए मोबाइल फोन को लॉकर में सुरक्षित रखा जाता है। श्रद्धालु को टोकन दिया जाता है और वापसी के समय टोकन नंबर के साथ मोबाइल के मॉडल का मिलान करने के बाद फोन लौटाया जाता है।
पहले दिन कई मंदिरों में मोबाइल जमा करने वाले काउंटरों पर लंबी कतारें देखने को मिली थीं। हालांकि, अब इन काउंटरों पर भी मिडिल एज और बुजुर्ग श्रद्धालुओं की संख्या अधिक नजर आ रही है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या मोबाइल बैन की वजह से युवा मंदिरों से दूरी बनाने लगे हैं?
मंदिर प्रशासन ने कहा- हाईकोर्ट के आदेश का कर रहे पालन
देवराजस्वामी मंदिर के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर आर. गणेशन ने श्रद्धालुओं की संख्या में कमी की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि कमी मुख्य रूप से युवाओं में दिखाई दे रही है। हालांकि, उन्होंने मोबाइल बैन के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि मंदिर की पवित्रता सोशल मीडिया कंटेंट से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
मंदिर प्रशासन के मुताबिक, यह फैसला मनमाने तरीके से नहीं लिया गया है। Madras High Court के दिसंबर 2022 के आदेश के तहत मंदिरों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल और उसके दुरुपयोग को रोकने के लिए ऐसे प्रतिबंधों को लागू किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि वह अदालत के निर्देश को ही लागू कर रहा है।
युवाओं को क्यों पसंद नहीं आ रहा मोबाइल बैन?
मोबाइल प्रतिबंध को लेकर युवाओं की प्रतिक्रिया अलग है। चेन्नई के 23 वर्षीय अरुण कुमार अपने तीन दोस्तों के साथ मंदिर पहुंचे थे। लेकिन जब उन्हें पता चला कि अंदर जाने से पहले मोबाइल फोन जमा करना होगा, तो उन्होंने मंदिर के अंदर जाने का फैसला बदल दिया।
अरुण का कहना है कि वह मंदिर और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हैं, लेकिन आज के दौर में मंदिर सिर्फ दर्शन की जगह नहीं हैं। युवा मंदिरों की वास्तुकला, धार्मिक अनुष्ठानों और वातावरण को कैमरे में कैद कर सोशल मीडिया पर शेयर करना चाहते हैं।
उनके मुताबिक, मोबाइल जमा करके मंदिर जाने और वहां कुछ भी रिकॉर्ड नहीं कर पाने से उनका अनुभव अधूरा लगता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मोबाइल इस्तेमाल नहीं कर सकते तो वह ऐसे स्थानीय मंदिरों में जाना पसंद करेंगे, जहां इस तरह के प्रतिबंध नहीं हैं।
19 साल की युवती बोली- सुंदर मंदिर देखकर फोटो न ले पाऊं तो आने का मतलब क्या?
वेल्लोर की 19 वर्षीय प्रिया राजेश भी परिवार के साथ मंदिर पहुंची थीं। लेकिन मोबाइल जमा करने का काउंटर देखकर उन्होंने मंदिर के अंदर जाने के बजाय बाहर रुकने का फैसला किया।
प्रिया के मुताबिक, उनके दादाजी अथि वरदराज के दर्शन के लिए मंदिर आए थे, लेकिन वह अपना मोबाइल अंदर नहीं ले जा सकती थीं। उनका कहना है कि महंगा फोन किसी अनजान काउंटर पर जमा करने को लेकर भी उन्हें चिंता थी।
प्रिया ने कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर रील देखकर मंदिर के बारे में जाना था और इसी वजह से वहां पहुंचीं। उनके लिए मंदिर की खूबसूरत वास्तुकला और माहौल को तस्वीरों और वीडियो में कैद करना यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा था। उनका मानना है कि मोबाइल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना आधुनिक युवाओं को मंदिरों से दूर कर सकता है।
धार्मिक पवित्रता बनाम सोशल मीडिया की आदत
तमिलनाडु के मंदिरों में मोबाइल बैन ने धार्मिक स्थलों पर तकनीक के इस्तेमाल को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ मंदिर प्रशासन का तर्क है कि मोबाइल फोन से सेल्फी, वीडियो और सोशल मीडिया गतिविधियों के कारण मंदिर का धार्मिक वातावरण प्रभावित होता है। दूसरी तरफ युवा श्रद्धालुओं का कहना है कि मोबाइल आज उनके अनुभव का हिस्सा है।
फिलहाल मंदिर प्रशासन अदालत के निर्देश के अनुसार नियम लागू कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि मोबाइल बैन के बावजूद मंदिरों में युवाओं की संख्या सामान्य होती है या वे वास्तव में ऐसे धार्मिक स्थलों से दूरी बनाना शुरू करते हैं।















