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‘बच्चों के जीवन में करना होगा प्रवेश…’, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीचरों से की ये अपील

उमाकांत त्रिपाठी।शिक्षक दिवस से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों से बातचीत की और शिक्षा के बदलते स्वरूप पर महत्वपूर्ण बातें कहीं। PM Modi Teachers Advice के दौरान प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि उनका काम केवल किताबों और तय पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होना चाहिए। शिक्षकों को बच्चों की जिंदगी, उनकी रुचियों, समस्याओं और प्रतिभाओं को समझने की कोशिश करनी चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि शिक्षा केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं है। एक शिक्षक की भूमिका बच्चों को परीक्षा के लिए तैयार करने से कहीं ज्यादा बड़ी होती है। शिक्षक बच्चों के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास और रचनात्मक सोच को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुने गए शिक्षकों के साथ बातचीत के दौरान कहा कि शिक्षकों को बच्चों के जीवन में प्रवेश करना होगा और उनकी रोजमर्रा की समस्याओं को समझना होगा। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों की जिज्ञासा और रचनात्मकता को बनाए रखने पर विशेष ध्यान दें।

किताबों और पाठ्यक्रम से बाहर निकलने की जरूरत

प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से कहा कि उन्हें केवल किताबों और तय किए गए पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को समझने के लिए शिक्षक को उनकी दुनिया और उनके अनुभवों को जानना जरूरी है।

पीएम मोदी ने कहा कि हमें किताबों से बाहर निकलना होगा और पाठ्यक्रम से भी बाहर निकलना होगा। इसके साथ ही हमें बच्चों के जीवन में प्रवेश करना होगा। उनका कहना था कि शिक्षक बच्चों की सोच और उनके व्यक्तित्व को समझकर उन्हें सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि बच्चों के अंदर बचपन से मौजूद जिज्ञासा, रचनात्मकता और खुलेपन को खत्म नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि ‘बचपन मरने नहीं देना चाहिए’। इसका मतलब यह है कि बच्चों पर केवल पढ़ाई और परीक्षा का दबाव डालने के बजाय उन्हें सीखने, सवाल पूछने और अपनी रुचियों के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।

हर बच्चे की प्रतिभा को पहचानें शिक्षक

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से पूछा कि क्या वे उन बच्चों की खूबियों को पहचानने की कोशिश करते हैं, जो पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते।

प्रधानमंत्री ने कहा कि संभव है कि कोई बच्चा पढ़ाई में अच्छा न हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसमें प्रतिभा नहीं है। भगवान ने हर बच्चे को कोई न कोई खास प्रतिभा दी है। जरूरत इस बात की है कि शिक्षक उस प्रतिभा को पहचानें और उसे आगे बढ़ने का अवसर दें।

एक शिक्षक ने प्रधानमंत्री को बताया कि हर बच्चे के अंदर अलग-अलग गुण, प्रतिभा और चुनौतियां होती हैं। ऐसे में शिक्षक की जिम्मेदारी है कि वह बच्चे की क्षमता को पहचाने और उसके अनुसार उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे।

बातचीत के दौरान शिक्षकों ने यह भी बताया कि वे बच्चों के आत्मविश्वास और अलग-अलग स्किल को बढ़ाने के लिए कक्षा के बाहर भी कई गतिविधियां आयोजित करते हैं। इन गतिविधियों के जरिए बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने और दूसरों के सामने अपनी बात रखने का मौका मिलता है।

अच्छा वक्ता बनने के लिए आत्मविश्वास और अभ्यास जरूरी

प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान एक शिक्षिका से पब्लिक स्पीकिंग को लेकर भी सवाल किया। उन्होंने पूछा कि अगर वह उनके छात्र होते और एक अच्छा वक्ता बनना चाहते तो उन्हें क्या करना चाहिए।

शिक्षक ने बताया कि अच्छा वक्ता बनने के लिए सबसे जरूरी चीज आत्मविश्वास है। इसके साथ ही लगातार अभ्यास करना भी जरूरी है। बच्चों को अपनी बात रखने के अधिक से अधिक अवसर दिए जाने चाहिए, जिससे उनके अंदर झिझक कम हो और आत्मविश्वास बढ़े।

प्रधानमंत्री ने बच्चों में बातचीत करने की क्षमता, रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास विकसित करने के लिए ऐसी गतिविधियों को महत्वपूर्ण बताया।

बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम पर PM मोदी की चिंता

प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम पर भी चिंता जताई। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि बच्चों को मोबाइल फोन और दूसरे डिजिटल उपकरणों पर ज्यादा समय बिताने के बजाय खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा कि बच्चों को ऐसी गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है, जिनसे उनका शारीरिक और मानसिक विकास हो। खेलकूद के साथ-साथ रचनात्मक गतिविधियां बच्चों के आत्मविश्वास और सामाजिक कौशल को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।

उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों को मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन की दुनिया से बाहर निकालकर वास्तविक गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश करें। इससे बच्चों में टीम भावना, बातचीत करने की क्षमता और सामाजिक व्यवहार भी विकसित होगा।

स्तन कैंसर और स्वास्थ्य जागरूकता पर भी हुई चर्चा

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं के साथ प्रधानमंत्री की बातचीत में शिक्षा के अलावा स्वास्थ्य जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

एक शिक्षिका ने महिलाओं में स्तन कैंसर को लेकर जागरूकता फैलाने के अपने प्रयासों के बारे में प्रधानमंत्री को बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को बीमारी के प्रति जागरूक करना और समय पर जांच के लिए प्रेरित करना जरूरी है, ताकि किसी संभावित बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सके और डॉक्टर से सलाह ली जा सके।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने शिक्षकों की ऐसी सामाजिक पहलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल स्कूल तक सीमित भूमिका निभाने वाले व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे समाज में जागरूकता फैलाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

बच्चों में नशे के खिलाफ जागरूकता जरूरी

बातचीत में छात्रों के बीच नशीली दवाओं को लेकर जागरूकता फैलाने पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर बच्चे के व्यवहार, बातचीत या दिनचर्या में कोई बदलाव दिखाई देता है तो शिक्षक को उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बच्चों की समस्याओं को समझने और उनसे बातचीत करने की कोशिश करनी चाहिए।

प्रधानमंत्री के मुताबिक, शिक्षक बच्चों के काफी करीब होते हैं और इसलिए वे कई बार उन बदलावों को जल्दी पहचान सकते हैं, जिन्हें परिवार या दूसरे लोग तुरंत नहीं समझ पाते।

शिक्षक का काम सिर्फ परीक्षा की तैयारी कराना नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि शिक्षक का काम सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा कराना और बच्चों को परीक्षा के लिए तैयार करना नहीं है। एक शिक्षक की भूमिका इससे कहीं व्यापक है।

शिक्षकों को बच्चों की खूबियों को पहचानना चाहिए, उनकी परेशानियों को समझना चाहिए और उन्हें अपनी क्षमताओं के अनुसार आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। बच्चों को बातचीत करने, सवाल पूछने, रचनात्मक तरीके से सोचने और अपनी बात आत्मविश्वास के साथ रखने के अवसर भी दिए जाने चाहिए।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले सभी शिक्षकों को बधाई दी और कहा कि देश के बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने में शिक्षकों की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देने के बजाय उन्हें जीवन की चुनौतियों के लिए भी तैयार करने का आह्वान किया।

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