उमाकांत त्रिपाठी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडोदरा में आयोजित एक खास कार्यक्रम में Gen-Z से करीब 25 मिनट तक संवाद किया। कार्यक्रम में करीब 6 हजार युवाओं को आमंत्रित किया गया था। इस दौरान प्रधानमंत्री ने युवाओं को झूठे दावों, भ्रामक सूचनाओं और सोशल मीडिया पर फैलने वाली गलत बातों से सावधान रहने की सलाह दी। मोदी ने कहा कि लोग युवाओं को ‘झूठ की गूंज’ के जरिए गुमराह करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन उन्हें हमेशा सच्चाई के साथ खड़ा रहना चाहिए।
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से चलाए जा रहे ‘छात्रों की गूंज’ अभियान की चर्चा हो रही है। मोदी के बयान को राजनीतिक हलकों में कांग्रेस के इस अभियान पर अप्रत्यक्ष तंज के तौर पर भी देखा जा रहा है।
Y आकार के रैंप पर चलकर युवाओं के बीच पहुंचे PM मोदी
वडोदरा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को युवाओं के बीच संवाद के लिहाज से खास अंदाज में तैयार किया गया था। कार्यक्रम स्थल पर विशेष रूप से Y आकार का रैंप बनाया गया था। भाषण शुरू करने से पहले प्रधानमंत्री इसी रैंप पर चलते हुए युवाओं के बीच पहुंचे।
प्रधानमंत्री के मंच पर पहुंचते ही मशहूर ब्रिटिश रॉक बैंड Queen का लोकप्रिय गाना ‘We Will Rock You’ बजाया गया। इसके बाद फिल्म ‘धुरंधर’ का गाना ‘आरी आरी’ भी बजाया गया। कार्यक्रम में युवाओं के साथ प्रधानमंत्री का अंदाज भी काफी अनौपचारिक नजर आया।
इस दौरान एक छात्र ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी तस्वीर भेंट की। पीएम ने भी युवाओं के साथ संवाद करते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी।
‘लोग झूठ की गूंज से गुमराह करने की कोशिश करेंगे’
युवाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज के दौर में जानकारी तेजी से फैलती है। ऐसे में युवाओं के लिए यह समझना जरूरी है कि कौन सी बात सच है और कौन सी भ्रामक।
मोदी ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि लोग उन्हें झूठ की गूंज के जरिए गुमराह करने की कोशिश करेंगे, लेकिन उन्हें सच्चाई के साथ खड़े रहना चाहिए।
प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के बीच मोदी का यह बयान विपक्ष पर निशाना साधने के तौर पर देखा जा रहा है।
मोदी बोले- 2004 में शुरू हुआ विचार, 2014 तक चलती रहीं फाइलें
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का विचार वर्ष 2004 में शुरू हुआ था। इसके बाद 2006 में इसके लिए विशेष कंपनी बनाई गई, लेकिन 2014 तक प्रोजेक्ट से जुड़ी फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल तक जाती रहीं।
मोदी ने कहा कि 2014 के बाद उनकी सरकार ने इस परियोजना को गति दी और करीब 2,000 किलोमीटर डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का काम पूरा किया।
प्रधानमंत्री ने बताया कि इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर से देश में माल ढुलाई की क्षमता और गति दोनों बढ़ती हैं।
‘नाराज फूफाजी’ वाला तंज, ट्रकों की जगह फ्रेट कॉरिडोर की जरूरत समझाई
फ्रेट कॉरिडोर की उपयोगिता समझाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में ‘नाराज फूफाजी’ का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि JNPT मुंबई से डबल कंटेनर मालगाड़ी के जरिए एक बार में 250 से ज्यादा ट्रकों के बराबर माल मुंबई से वडोदरा तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि अब ‘नाराज फूफाजी’ पूछ सकते हैं कि फिर ट्रक वालों का क्या होगा। लेकिन देश के एक कोने से दूसरे कोने तक सामान को तेजी से पहुंचाने के लिए ऐसी कनेक्टिविटी जरूरी है।
पीएम मोदी ने यह भी बताया कि पहले यात्री और मालगाड़ियां एक ही ट्रैक पर चलती थीं। इसकी वजह से दोनों की रफ्तार प्रभावित होती थी। अब अलग फ्रेट कॉरिडोर तैयार होने से मालगाड़ियों को अलग ट्रैक मिल रहा है।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर रोज करीब 430 मालगाड़ियां चल रही हैं। सड़क मार्ग से किसी सामान को पहुंचाने में करीब 30 घंटे लग सकते हैं, जबकि फ्रेट कॉरिडोर के जरिए यही माल करीब 10 घंटे में पहुंचाया जा सकता है।
AI सुपरपावर बनने के लिए युवाओं की स्किल पर जोर
Gen-Z से संवाद के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के क्षेत्र में भारत की संभावनाओं पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अगर भारत को AI सुपरपावर बनना है तो केवल तकनीक विकसित करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इसके लिए पूरा इकोसिस्टम तैयार करना पड़ेगा।
पीएम ने कहा कि इसके लिए यूरेनियम और रेयर अर्थ मटेरियल की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं की स्किल ट्रेनिंग और अपग्रेडेशन पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने युवाओं से कहा कि बदलती दुनिया में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। अब युवाओं को अपनी स्किल पर फोकस करना होगा। तकनीकी बदलावों के दौर में नई क्षमताएं विकसित करना रोजगार और भविष्य की प्रतिस्पर्धा के लिए जरूरी है।
जंतर-मंतर के बाद Gen-Z से मोदी का लगातार संवाद
Gen-Z के साथ प्रधानमंत्री मोदी का यह संवाद अचानक शुरू हुआ अभियान नहीं है। पिछले कुछ समय से प्रधानमंत्री युवाओं के बीच सोशल मीडिया और अनौपचारिक संवाद के जरिए अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश करते नजर आए हैं।
23 जुलाई: प्रधानमंत्री ने पहली बार फ्रंट कैमरे से सीधे युवाओं को संबोधित करते हुए करीब 3 मिनट का सेल्फी वीडियो पोस्ट किया। इसमें उन्होंने पेपर लीक को गंभीर समस्या बताया।
24 जुलाई: इसके अगले दिन पीएम मोदी ने दूसरा सेल्फी वीडियो अपलोड किया और युवाओं को पिछले वीडियो पर प्रतिक्रिया और सुझाव देने के लिए धन्यवाद दिया।
31 जुलाई: प्रधानमंत्री ने इंस्टाग्राम/रील्स के अंदाज में वर्टिकल वीडियो पोस्ट किया। इसमें उन्होंने ‘हाय फ्रेंड्स’ कहकर युवाओं से अनौपचारिक तरीके से संवाद किया।
20 अगस्त: प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को विश्वविद्यालयों में छात्रों के साथ एक दिन बिताने और सरकारी स्कूलों का दौरा करने का निर्देश दिया।
26 अगस्त: एक विश्लेषण के मुताबिक 20 जुलाई के बाद प्रधानमंत्री की प्रति इंस्टाग्राम पोस्ट औसत एंगेजमेंट में बड़ा इजाफा हुआ। यह आंकड़ा 1.19 करोड़ से बढ़कर 4.63 करोड़ बताया गया।
5 सितंबर: SRCC के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री ने युवाओं के बीच लोकप्रिय ‘OG’ और ‘Flex’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और Gen-Z से जुड़ने की कोशिश की।
देश में हर चार में से करीब एक वोटर Gen-Z
Gen-Z को लेकर राजनीतिक दलों की बढ़ती सक्रियता के पीछे एक बड़ा कारण देश की युवा मतदाता आबादी भी है। चुनाव आयोग के मुताबिक लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान 18 से 29 साल के मतदाताओं की हिस्सेदारी 22.78 प्रतिशत थी।
यानी देश के कुल मतदाताओं में लगभग हर चार में से एक मतदाता 18 से 29 वर्ष की आयु का था। ऐसे में युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाना राजनीतिक दलों के लिए लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
वडोदरा में प्रधानमंत्री मोदी का 6 हजार युवाओं के साथ संवाद इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कार्यक्रम में तकनीक, AI, स्किल डेवलपमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं से बचने का संदेश भी दिया गया।















