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पीएम मोदी संग होगी पुतिन की बैठक, BRICS समिट के लिए भारत आएंगे रूसी राष्ट्रपति, इस दिन होगी मीटिंग

उमाकांत त्रिपाठी।PM Modi Putin Meeting: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें BRICS Summit में शामिल होने के लिए भारत आ रहे हैं। नई दिल्ली में होने वाले BRICS नेताओं के सम्मेलन से पहले 11 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इसकी पुष्टि की है।

भारत सरकार के मुताबिक, 18वां BRICS Summit 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने 31 अगस्त को बिश्केक में SCO Summit के दौरान पुतिन से मुलाकात की थी और उस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी, रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की थी। मोदी ने पुतिन को BRICS Summit के लिए भारत आने का निमंत्रण भी दिया था।

PM Modi Putin Meeting में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

क्रेमलिन के अनुसार, मोदी-पुतिन की बैठक में भारत और रूस के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने पर खास जोर रह सकता है। दोनों देश अपने कारोबार को और विस्तार देने, कंपनियों के लिए नए अवसर तलाशने और द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने पर चर्चा कर सकते हैं।

रूस और भारत के बीच आर्थिक रिश्ते हाल के वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच व्यापार 2024 में रिकॉर्ड करीब 70 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। अब दोनों देश भुगतान व्यवस्था को और आसान बनाने तथा स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।

Su-57 Fighter Jet पर भी नजर

PM Modi Putin Meeting का सबसे अहम हिस्सा रक्षा सहयोग हो सकता है। रूस ने भारत को अपने पांचवीं पीढ़ी के Su-57 लड़ाकू विमान की पेशकश की है और क्रेमलिन के मुताबिक इस विमान की बिक्री का मुद्दा बैठक के एजेंडे में शामिल है।

Su-57 रूस का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है। इसमें आधुनिक एवियोनिक्स, सेंसर और रडार सिस्टम के साथ स्टील्थ क्षमता है। भारत लंबे समय से अपनी वायुसेना की लड़ाकू क्षमता को आधुनिक बनाने पर जोर दे रहा है। ऐसे में Su-57 को लेकर होने वाली बातचीत दोनों देशों के रक्षा संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हालांकि, Su-57 की खरीद को लेकर भारत की ओर से अभी कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक बातचीत में विमान के साथ तकनीक और औद्योगिक सहयोग जैसे पहलुओं पर भी चर्चा की संभावना है।

रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक संकट पर भी बात

मोदी और पुतिन की बैठक केवल द्विपक्षीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहने वाली। रूस-यूक्रेन युद्ध और उसके वैश्विक प्रभाव पर भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हो सकती है। भारत लगातार युद्ध के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर देता रहा है।

31 अगस्त को बिश्केक में मोदी और पुतिन की पिछली मुलाकात के दौरान भी दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की थी। भारत सरकार के अनुसार, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र में चल रहे संघर्षों से जुड़े मुद्दों पर भी विचार साझा किए थे।

खाड़ी संकट का असर भी चर्चा में

फारस की खाड़ी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है, इसलिए ऊर्जा सुरक्षा उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है।

जुलाई 2026 में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता रहा। रॉयटर्स के मुताबिक, उस महीने भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 50.83 प्रतिशत तक पहुंच गई थी और आयात लगभग 24.7 लाख बैरल प्रतिदिन रहा।

हालांकि अगस्त में रूसी तेल की हिस्सेदारी घटकर करीब 45 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद रूस भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार बना हुआ है।

भारत-रूस संबंधों की मजबूत नींव

भारत और रूस के रिश्ते कई दशक पुराने हैं। सोवियत संघ के दौर से दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, उद्योग और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग रहा है। रक्षा क्षेत्र में भारत लंबे समय से रूसी मूल के लड़ाकू विमानों, टैंकों, मिसाइल प्रणालियों और अन्य सैन्य उपकरणों का इस्तेमाल करता रहा है।

आज दोनों देश ब्रह्मोस मिसाइल, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और रक्षा उत्पादन जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं। हाल के वर्षों में ऊर्जा और व्यापार ने भी इस साझेदारी को नया आयाम दिया है।

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद भारत ने मॉस्को के साथ अपने आर्थिक और ऊर्जा संबंध जारी रखे। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार में बड़ी वृद्धि हुई। रॉयटर्स के अनुसार, 2024 में द्विपक्षीय व्यापार करीब 70 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा था।

BRICS Summit से पहले अहम होगी मोदी-पुतिन मुलाकात

नई दिल्ली में होने वाला BRICS Summit ऐसे समय में हो रहा है, जब वैश्विक राजनीति, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और युद्धों को लेकर कई बड़े बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में PM Modi Putin Meeting को भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ व्यापक वैश्विक कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

11 सितंबर की बैठक में रक्षा और Su-57 के अलावा व्यापार, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा, भुगतान व्यवस्था और क्षेत्रीय संकट जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। इसके अगले दिन BRICS नेताओं की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन समेत कई देशों के नेता वैश्विक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

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