उमाकांत त्रिपाठी।मध्य प्रदेश के सागर में सामने आए Sagar Poisonous Liquor Case ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है। जहरीली शराब पीने से बड़ी संख्या में लोगों की तबीयत बिगड़ने और मौतों के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा फेरबदल किया है। इरशाद वली को सागर का नया आईजी बनाया गया है, जबकि दिलीप कुमार संभागायुक्त का पद संभाल चुके हैं।
सागर जहरीली शराबकांड में मौतों के आंकड़े को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अब तक 28 लोगों की मौत होने का दावा सामने आया है, जबकि प्रशासन ने इनमें से 15 मौतों की पुष्टि की है। बड़ी संख्या में मरीजों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इस पूरे मामले में पुलिस ने 33 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है और अब तक 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अस्पताल पहुंचकर जाना मरीजों का हाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को सागर जिला अस्पताल पहुंचे और जहरीली शराब पीने के बाद भर्ती मरीजों से मुलाकात की। उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत कर इलाज की स्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
सीएम ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ बेहद गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि दोषियों पर ऐसी धाराओं के तहत कार्रवाई होगी, जिनमें आजीवन कारावास और फांसी तक का प्रावधान है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रशासन को कार्रवाई के लिए फ्री हैंड दिया गया है।
उन्होंने साफ किया कि अवैध शराब के नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ केवल गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। जहां भी अवैध गतिविधियों से जुड़े निर्माण या अतिक्रमण पाए जाएंगे, वहां प्रशासन आवश्यक कार्रवाई करेगा।
मुख्यमंत्री के न्यायिक जांच के आदेश के बाद अब इस बात की भी जांच होगी कि जहरीली शराब तैयार करने और उसकी सप्लाई का नेटवर्क कितना बड़ा था और इस पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
33 आरोपियों में 16 गिरफ्तार, फरार आरोपियों पर इनाम
Sagar Poisonous Liquor Case में पुलिस ने कुल 33 आरोपियों को चिह्नित किया है। इनमें से अब तक 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पूछताछ के दौरान पुलिस को कथित तौर पर अवैध शराब तैयार करने, उसकी पैकिंग करने और ग्रामीण इलाकों में सप्लाई किए जाने के नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारी मिली है।
जांच में बरेठी शराब दुकान के लाइसेंसी ठेकेदार मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर, निवासी बंडा की भूमिका भी सामने आने की बात पुलिस ने कही है। पुलिस के मुताबिक मनीष लोधी कथित तौर पर अंतरराज्यीय शराब तस्कर रवि लखेरा के संपर्क में था।
जांच एजेंसियों के अनुसार रवि लखेरा से शराब तैयार करने का तरीका और कथित फार्मूला मिलने के बाद अवैध शराब तैयार की गई। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
फरार मुख्य आरोपी मनीष लोधी और रवि लखेरा पर 20-20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। वहीं, अन्य 15 फरार आरोपियों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम रखा गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश के लिए अलग-अलग टीमें लगाई गई हैं।
खेत में तैयार की गई थी नकली ‘सागर गोल्ड’ शराब
पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक नकली शराब तैयार करने के लिए ग्रामीण इलाके में खेत का इस्तेमाल किया गया था। ततरवारा गांव के सरपंच चंद्रभान उर्फ चंदू राजपूत के खेत से पुलिस ने 164 क्वार्टर सागर गोल्ड प्लेन मदिरा, 27 लीटर अमानक शराब और शराब के निर्माण व पैकिंग में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद किया।
जांच में यह भी सामने आया कि 2 सितंबर को चंदू के मक्का के खेत में करीब 50 पेटी नकली शराब तैयार की गई थी। इस शराब को कथित तौर पर ‘सागर गोल्ड’ के नाम से पैक किया गया और आसपास के गांवों में सेल्समैन के जरिए पहुंचाया गया।
पुलिस ने बंडा और विनायका थाने में दर्ज दो मामलों में 252.12 लीटर से अधिक शराब जब्त करने की जानकारी दी है। अब जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि खेत में तैयार की गई शराब किन-किन इलाकों में पहुंचाई गई और इससे कितने लोग प्रभावित हुए।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस और प्रशासन अवैध शराब की सप्लाई चेन में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रहे हैं। अधिकारियों का फोकस उन लोगों तक पहुंचने पर भी है, जिन्होंने शराब के निर्माण के लिए सामग्री उपलब्ध कराई और फिर इसे अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचाया।
आरोपियों के खिलाफ पहले से दर्ज हैं कई मामले
पुलिस के अनुसार इस मामले में सामने आए प्रमुख आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड भी है। अंतरराज्यीय शराब तस्कर बताए जा रहे रवि लखेरा के खिलाफ पहले से 25 मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
इसी तरह चंद्रभान उर्फ चंदू राजपूत के खिलाफ पांच मामले दर्ज बताए गए हैं। मुख्य आरोपी मनीष लोधी के खिलाफ भी कुल 11 मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। इनमें से छह मामले शराब तस्करी से जुड़े बताए गए हैं।
पुलिस अब पुराने मामलों और वर्तमान मामले के बीच संभावित कड़ियों की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर अवैध शराब के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
5 सितंबर को अचानक बढ़ने लगे थे मरीज
Sagar Poisonous Liquor Case की शुरुआत 5 सितंबर की शाम बंडा सिविल अस्पताल में मरीजों के अचानक पहुंचने के बाद सामने आई। अस्पताल आने वाले कई मरीजों में शरीर में अकड़न, उल्टी, शरीर का नीला पड़ना और आंखों की रोशनी कम होने जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दिए।
डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन ने मरीजों से पूछताछ की तो कई लोगों ने शराब पीने की बात बताई। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए मरीजों को सागर जिला अस्पताल और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) रेफर किया गया।
रविवार सुबह तक नौ लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद रविवार शाम तक मृतकों की संख्या 15 से ज्यादा हो गई। सोमवार को यह आंकड़ा 22 के पार पहुंचने की बात सामने आई, जबकि मंगलवार को भी दो और मौतों की सूचना मिली।
इसी के बाद मामला तेजी से प्रदेश स्तर पर चर्चा में आया और प्रशासन ने अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी।
मौतों के आंकड़े पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा
मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। जिला कांग्रेस कमेटी सागर ग्रामीण के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह मोहासा ने सरकार पर मौतों के वास्तविक आंकड़े छिपाने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस ने सभी मृतकों के विसरा की जांच भोपाल की स्वतंत्र फॉरेंसिक लैब से कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मौतों की वास्तविक वजह और जहरीली शराब की भूमिका की स्वतंत्र जांच जरूरी है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने जहरीली शराब से लोगों की मौत का मुद्दा उठाते हुए सरकार की कार्रवाई को लेकर सवाल किए।
हालांकि, मौतों के आंकड़े को लेकर प्रशासन की पुष्टि और विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों में अंतर है। इसलिए न्यायिक जांच और फॉरेंसिक जांच के निष्कर्ष इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
अब न्यायिक जांच से सामने आएगी पूरी सच्चाई
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से न्यायिक जांच के आदेश के बाद Sagar Poisonous Liquor Case में जांच का दायरा और बढ़ गया है। अब केवल शराब बनाने और बेचने वालों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में संभावित लापरवाही और जिम्मेदारी की भी जांच की जा सकती है।
सरकार की ओर से प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश कर रही है, जबकि प्रशासन अवैध शराब से जुड़े ठिकानों और गतिविधियों पर कार्रवाई कर रहा है।
फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नकली शराब का नेटवर्क कितना बड़ा था, जहरीली शराब कितने लोगों तक पहुंची और इस पूरी प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही। न्यायिक जांच, पुलिस की विवेचना और फॉरेंसिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही Sagar Poisonous Liquor Case की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।














