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हर तीन महीने में मिलेंगे ₹61500, सिर्फ ब्याज से ही कमा डालेंगे ₹2.46 लाख… धांसू स्कीम

खबर इंडिया की।रिटायरमेंट के बाद नियमित आय के लिए Senior Citizens Savings Scheme (SCSS) यानी सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम को सुरक्षित निवेश विकल्पों में गिना जाता है। इसमें निवेश करने वाले वरिष्ठ नागरिकों को सरकार की ओर से तय ब्याज मिलता है और ब्याज का भुगतान तिमाही आधार पर किया जाता है। हालांकि, निवेश करने से पहले इसके टैक्स नियमों को समझना भी जरूरी है।

SCSS के ब्याज पर कैसे लगता है टैक्स?

SCSS में जमा की गई रकम पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता है। यानी बैंक या पोस्ट ऑफिस से मिलने वाली ब्याज आय को आपकी कुल आय में जोड़ा जाता है और आपकी लागू इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार उस पर टैक्स देना पड़ सकता है।

वहीं, SCSS में किए गए निवेश पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत निर्धारित सीमा तक टैक्स कटौती का लाभ मिल सकता है। हालांकि, 80C का लाभ पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत उपलब्ध होता है। नई टैक्स व्यवस्था चुनने वाले करदाताओं के लिए इस कटौती के नियम अलग हैं।

ब्याज पर TDS कब कट सकता है?

SCSS से मिलने वाले ब्याज पर निर्धारित सीमा से अधिक वार्षिक ब्याज होने की स्थिति में TDS (Tax Deducted at Source) भी काटा जा सकता है। इसलिए वरिष्ठ नागरिकों को यह देखना चाहिए कि वित्त वर्ष में उनकी SCSS से कितनी ब्याज आय होने वाली है।

TDS कट जाने का मतलब यह नहीं है कि आपकी अंतिम टैक्स देनदारी इतनी ही है। रिटर्न दाखिल करते समय आपकी कुल आय और लागू टैक्स नियमों के आधार पर अंतिम टैक्स की गणना होती है।

SCSS में खाता कैसे खोलें?

Senior Citizens Savings Scheme का खाता नजदीकी पोस्ट ऑफिस या अधिकृत बैंक शाखा में खोला जा सकता है। इसके लिए निर्धारित आवेदन फॉर्म भरने के साथ जरूरी KYC दस्तावेज जमा करने होते हैं।

आवेदन के समय आम तौर पर आधार कार्ड, PAN कार्ड, फोटो और पहचान व पते से जुड़े वैध दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है। निवेश की रकम निर्धारित तरीके से जमा करने के बाद SCSS अकाउंट खोला जाता है।

SCSS में निवेश करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अगर रिटायरमेंट के बाद आपको नियमित अतिरिक्त आय की जरूरत है और आप बाजार के उतार-चढ़ाव से अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प चाहते हैं, तो SCSS आपके लिए एक विकल्प हो सकता है। हालांकि, इसमें निवेश करने से पहले ब्याज दर, निवेश सीमा, पात्रता, टैक्स नियम और मैच्योरिटी से जुड़े नियमों को जरूर समझ लेना चाहिए।

SCSS की ब्याज दर सरकार समय-समय पर छोटी बचत योजनाओं की दरों की समीक्षा के तहत तय करती है। इसलिए किसी एक ब्याज दर को हमेशा के लिए निश्चित नहीं माना जा सकता।

निवेश से पहले यह भी देखना जरूरी है कि मौजूदा वित्त वर्ष में लागू ब्याज दर क्या है और आपके निवेश पर कितनी ब्याज आय बनने वाली है। खासकर बड़े निवेश पर ब्याज आय टैक्स और TDS के दायरे में आ सकती है।

कुल मिलाकर, SCSS रिटायरमेंट के बाद नियमित आय के लिए उपयोगी विकल्प हो सकता है, लेकिन केवल ब्याज दर देखकर निवेश करने के बजाय इसके टैक्स प्रभाव को भी समझना जरूरी है।

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