उमाकांत त्रिपाठी। नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और केंद्र की सत्ता में उनके नेतृत्व को लेकर PM Modi 12 Years के मौके पर उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए प्रमुख फैसलों की चर्चा हो रही है। 2014 में केंद्र की सत्ता संभालने के बाद मोदी सरकार ने कई ऐसे नीतिगत और राजनीतिक फैसले लिए, जिनका असर देश की अर्थव्यवस्था, प्रशासन, सामाजिक नीतियों, सुरक्षा और राजनीति पर पड़ा।
इन फैसलों में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में बदलाव, वस्तु एवं सेवा कर यानी GST, नोटबंदी, डिजिटल इंडिया, तीन तलाक कानून, महिला आरक्षण कानून, अग्निपथ योजना, नागरिकता संशोधन कानून और नए आपराधिक कानून जैसे कदम शामिल हैं।
इनमें से कई फैसलों को सरकार ने बड़े सुधार या अपने चुनावी वादों को पूरा करने के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि विपक्षी दलों और अलग-अलग समूहों ने कुछ फैसलों की आलोचना भी की। इसलिए इन फैसलों को समझने के लिए उनके प्रावधान, समय और प्रभाव को अलग-अलग देखना जरूरी है।
1. अनुच्छेद 370 में बदलाव
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों में बड़ा बदलाव किया। इसके बाद जम्मू-कश्मीर राज्य का पुनर्गठन किया गया और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख को अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया।
सरकार ने इस कदम को राष्ट्रीय एकीकरण और प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव से जोड़कर पेश किया। इस फैसले का जम्मू-कश्मीर की राजनीति और प्रशासन पर व्यापक प्रभाव पड़ा।
इस फैसले को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद भी रहे और इसकी संवैधानिक वैधता को अदालत में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2023 में अनुच्छेद 370 से जुड़े केंद्र सरकार के कदम को बरकरार रखा।
2. नोटबंदी का फैसला
8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1,000 रुपये के तत्कालीन नोटों को कानूनी मुद्रा के रूप में बंद करने की घोषणा की।
सरकार ने इस फैसले के पीछे काले धन, नकली नोट और आतंकवाद की फंडिंग पर रोक लगाने जैसे उद्देश्यों का उल्लेख किया था। घोषणा के बाद देशभर में पुराने नोट बदलने और जमा करने के लिए बैंकों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं।
नोटबंदी का आर्थिक प्रभाव लंबे समय तक चर्चा का विषय रहा। समर्थकों ने इसे औपचारिक अर्थव्यवस्था और डिजिटल भुगतान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया, जबकि आलोचकों ने इसके क्रियान्वयन और आर्थिक असर पर सवाल उठाए।
3. महिला आरक्षण कानून
2023 में संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन पारित किया गया। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया।
कानून का लागू होना जनगणना और परिसीमन जैसी प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ है। इस वजह से इसका वास्तविक राजनीतिक प्रभाव तत्काल चुनावों में दिखाई देने के बजाय संबंधित संवैधानिक प्रक्रियाओं के बाद सामने आएगा।
महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाना इस कानून का प्रमुख उद्देश्य है।
4. तीन तलाक पर कानून
मोदी सरकार के कार्यकाल में मुस्लिम महिलाओं से जुड़े तीन तलाक के मुद्दे पर कानून बनाया गया। मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत तत्काल तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत को अवैध और दंडनीय बनाया गया।
सरकार ने इसे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक न्याय से जोड़ा। वहीं विरोध करने वाले पक्षों ने कानून के आपराधिक प्रावधानों और व्यक्तिगत कानूनों में हस्तक्षेप को लेकर सवाल उठाए।
5. GST लागू करना
1 जुलाई 2017 को देश में वस्तु एवं सेवा कर यानी GST लागू हुआ। इसे स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े अप्रत्यक्ष कर सुधारों में से एक माना जाता है।
GST ने केंद्र और राज्यों के कई अप्रत्यक्ष करों को एक व्यापक कर प्रणाली के तहत लाने की कोशिश की। इसका उद्देश्य टैक्स व्यवस्था को अधिक एकीकृत बनाना और देश में वस्तुओं एवं सेवाओं की आवाजाही को आसान बनाना था।
शुरुआती दौर में कारोबारियों और करदाताओं को तकनीकी तथा अनुपालन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बाद में GST व्यवस्था में कई बदलाव और सुधार किए गए।
6. डिजिटल इंडिया और जनधन योजना
PM Modi 12 Years की चर्चा में डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशन से जुड़ी योजनाओं का भी उल्लेख होता है।
2015 में डिजिटल इंडिया अभियान शुरू किया गया। इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं और डिजिटल सुविधाओं की पहुंच बढ़ाना था। इससे डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिला।
इससे पहले 2014 में प्रधानमंत्री जनधन योजना शुरू की गई थी। इसका लक्ष्य उन लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना था जो औपचारिक बैंकिंग सुविधाओं से बाहर थे।
जनधन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी को मिलाकर JAM ढांचे ने सरकारी लाभों के सीधे हस्तांतरण में भी भूमिका निभाई।
7. अग्निपथ योजना और अग्निवीर मॉडल
2022 में केंद्र सरकार ने सशस्त्र बलों में सैनिकों की भर्ती के लिए अग्निपथ योजना शुरू की। इसके तहत चयनित युवाओं को अग्निवीर के रूप में सीमित अवधि के लिए सेवा का अवसर दिया गया।
सरकार ने इस मॉडल को सशस्त्र बलों की युवा प्रोफाइल और भर्ती व्यवस्था में बदलाव से जोड़ा। योजना की घोषणा के बाद कई राज्यों में युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किए।
इस योजना को लेकर भर्ती अवधि, भविष्य के रोजगार और सैनिकों के करियर से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस जारी रही।
8. अयोध्या में राम मंदिर
अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया। अदालत ने विवादित भूमि पर राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया और मस्जिद के लिए अलग भूमि देने की व्यवस्था का आदेश दिया।
इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन हुआ। 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा हुई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए।
राम मंदिर लंबे समय से भारतीय राजनीति और सामाजिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय रहा है।
9. नई शिक्षा नीति और नए आपराधिक कानून
2020 में नई शिक्षा नीति यानी NEP 2020 को मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य स्कूली और उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव करना था।
इसके अलावा आपराधिक न्याय व्यवस्था में भी बड़े कानूनी बदलाव किए गए। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने क्रमशः IPC, CrPC और Indian Evidence Act का स्थान लिया। ये नए कानून 1 जुलाई 2024 से लागू हुए, हालांकि कुछ प्रावधानों को लेकर कानूनी और प्रशासनिक चर्चाएं जारी रहीं।
10. नागरिकता संशोधन कानून
नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी CAA को संसद ने दिसंबर 2019 में पारित किया। कानून में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के कुछ लोगों के लिए भारतीय नागरिकता हासिल करने की पात्रता में बदलाव किया गया।
कानून को लेकर देश के कई हिस्सों में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए। सरकार ने इसे पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने वाले संबंधित अल्पसंख्यकों के लिए नागरिकता का रास्ता बताकर बचाव किया। आलोचकों ने इसके धार्मिक आधार और मुस्लिम समुदाय को बाहर रखने पर सवाल उठाए।
मार्च 2024 में CAA के नियम अधिसूचित किए गए, जिसके बाद कानून के तहत आवेदन की प्रक्रिया शुरू हुई।
11. सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और सुरक्षा नीति
2016 के उरी आतंकी हमले के बाद भारत ने नियंत्रण रेखा के पार आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की घोषणा की। इसके बाद फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने बालाकोट में हवाई कार्रवाई की।
बाद के वर्षों में केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ कठोर नीति पर जोर दिया। सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से निपटने के लिए सैन्य तथा कूटनीतिक कदमों को अपनी नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की सैन्य कार्रवाई को ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार और विपक्ष की ओर से अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
12. आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10% आरक्षण
2019 में केंद्र सरकार ने संविधान में संशोधन कर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों यानी EWS के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत तक आरक्षण का प्रावधान किया।
यह व्यवस्था उन लोगों के लिए है जो निर्धारित आर्थिक और अन्य पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं तथा पहले से मौजूद आरक्षण श्रेणियों के अंतर्गत नहीं आते।
EWS आरक्षण को लेकर भी संवैधानिक बहस हुई। नवंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने 3:2 के बहुमत से 103वें संविधान संशोधन की वैधता बरकरार रखी।
PM Modi 12 Years में फैसलों की विरासत पर अलग-अलग राय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल में लिए गए फैसलों का प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में दिखाई देता है। अनुच्छेद 370, राम मंदिर, GST, नोटबंदी, CAA और तीन तलाक जैसे मुद्दे राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में रहे हैं, जबकि डिजिटल इंडिया, जनधन योजना, नई शिक्षा नीति और नए आपराधिक कानूनों का असर प्रशासन तथा संस्थागत व्यवस्था से जुड़ा है।
इन फैसलों पर सरकार, विपक्ष, विशेषज्ञों और विभिन्न सामाजिक समूहों की राय अलग-अलग रही है। कुछ लोग इन्हें बड़े नीतिगत बदलावों के रूप में देखते हैं, जबकि आलोचक इनके आर्थिक, सामाजिक या प्रशासनिक प्रभावों को लेकर अलग निष्कर्ष रखते हैं।
इसलिए PM Modi 12 Years के सफर को समझने के लिए केवल राजनीतिक दावों के बजाय प्रत्येक फैसले की तारीख, कानूनी स्थिति, उद्देश्य और उसके बाद हुए प्रभाव को अलग-अलग देखना महत्वपूर्ण है। आने वाले वर्षों में इन नीतियों के दीर्घकालिक परिणामों का आकलन भी इसी आधार पर किया जाएगा।















