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अब पूरे देश से होगा ड्रग्स नेटवर्क का खात्मा, दिल्ली में जुटेंगे राज्यों के ANTF चीफ, अमित शाह करेंगे बैठक

उमाकांत त्रिपाठीा।देश में नशीले पदार्थों की तस्करी और ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ केंद्र सरकार कार्रवाई को और ज्यादा संगठित और व्यापक बनाने की तैयारी में है। इसी कड़ी में ANTF Conference का तीसरा राष्ट्रीय सम्मेलन 22 और 23 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की ओर से आयोजित इस सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह करेंगे।

सम्मेलन में देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के Anti-Narcotics Task Force (ANTF) प्रमुखों के साथ केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी तथा संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। दो दिन चलने वाले इस सम्मेलन में ड्रग्स के खिलाफ चल रही कार्रवाई की समीक्षा के साथ भविष्य की रणनीति पर चर्चा होगी।

ड्रग्स तस्करी के पूरे नेटवर्क पर फोकस

ANTF Conference का मकसद सिर्फ ड्रग्स की खेप पकड़ने या तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। इस दौरान नशीले पदार्थों के पूरे नेटवर्क को समझने और उसे तोड़ने की रणनीति पर जोर रहेगा।

चर्चा में ड्रग्स की सप्लाई, डिमांड, अवैध वित्तीय लेनदेन, सिंथेटिक ड्रग्स, प्रीकर्सर केमिकल्स, गुप्त ड्रग्स लैब, फरार आरोपियों और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।

ड्रग्स नेटवर्क कई राज्यों और कई देशों तक फैला हो सकता है। ऐसे में जांच एजेंसियों के लिए सिर्फ स्थानीय स्तर पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ना जरूरी हो गया है।

जांच का फोकस इस बात पर भी रहेगा कि ड्रग्स की सप्लाई कहां से हो रही है, इसके लिए किन रास्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है, स्थानीय स्तर पर कौन लोग मदद कर रहे हैं और अवैध कमाई को किस तरह दूसरे वित्तीय चैनलों में लगाया जा रहा है।

ANTF, NCB और दूसरी एजेंसियों के बीच तालमेल पर जोर

ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क का स्वरूप बदलने के साथ एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत भी बढ़ी है। तस्करी के रास्ते एक राज्य से दूसरे राज्य और कई मामलों में सीमा पार तक पहुंचते हैं।

ऐसे में ANTF, NCB, पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों, सीमा से जुड़ी एजेंसियों और अन्य विभागों के बीच इंटेलिजेंस शेयरिंग और संयुक्त कार्रवाई को मजबूत करने पर चर्चा होगी।

सरकार की ओर से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में dedicated ANTF स्थापित करने की दिशा में पहले ही कदम उठाए जा चुके हैं। 2025 में गृह मंत्रालय ने संसद में बताया था कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ANTF स्थापित किए जा चुके हैं। ये स्थानीय स्तर पर NCORD सचिवालय की भूमिका भी निभाते हैं।

इस व्यवस्था का उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच ड्रग्स से जुड़ी सूचनाओं और कार्रवाई को बेहतर तरीके से जोड़ना है।

ड्रग्स कार्टेल और मास्टरमाइंड तक पहुंचने की रणनीति

सम्मेलन में ड्रग्स नेटवर्क और कार्टेल को पूरी तरह खत्म करने के तरीकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसका अर्थ केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी नहीं, बल्कि उस नेटवर्क की सभी कड़ियों तक पहुंचना है।

जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि ड्रग्स की खेप के पीछे कौन लोग हैं, पैसा कहां से आ रहा है, भुगतान कैसे किया जा रहा है और नेटवर्क को संचालित करने वाले मुख्य लोगों तक कैसे पहुंचा जाए।

इसी वजह से financial investigation को भी ड्रग्स विरोधी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। ड्रग्स के कारोबार से होने वाली अवैध कमाई पर कार्रवाई के जरिए नेटवर्क की आर्थिक रीढ़ पर प्रहार करने की रणनीति पर भी चर्चा हो सकती है।

Synthetic Drugs और गुप्त लैब बनी बड़ी चुनौती

पारंपरिक मादक पदार्थों के साथ अब Synthetic Drugs भी जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं। सिंथेटिक ड्रग्स के निर्माण और सप्लाई का नेटवर्क कई बार अलग तरीके से काम करता है।

छोटी जगहों पर गुप्त लैब स्थापित करके नशीले पदार्थ तैयार करना, प्रीकर्सर केमिकल्स का दुरुपयोग और डिजिटल माध्यमों से खरीदारों तक पहुंच बनाना नई चुनौतियों में शामिल हैं।

इसी कारण सम्मेलन में precursor chemicals की निगरानी और clandestine laboratories की पहचान से जुड़े उपायों पर भी विचार किया जाएगा। गुप्त लैब का पता लगाना और उनसे जुड़े सप्लाई नेटवर्क को तोड़ना एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।

Darknet और टेक्नोलॉजी आधारित तस्करी पर भी नजर

ड्रग्स तस्करी के तरीके लगातार बदल रहे हैं। पारंपरिक नेटवर्क के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल भी जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौती के रूप में सामने आया है।

जून 2026 में जारी Vision Document on Drug Control (2026-2029) में भी सिंथेटिक ड्रग्स, darknet networks, cross-border trafficking और उभरते खतरों पर ध्यान देने की बात कही गई थी।

आने वाले समय में टेक्नोलॉजी आधारित इंटेलिजेंस, डेटा एनालिसिस, डिजिटल ट्रैकिंग और एजेंसियों के बीच real-time information sharing की भूमिका बढ़ सकती है।

इससे जांच एजेंसियों को अलग-अलग मामलों और संदिग्ध नेटवर्क के बीच संबंधों को समझने में मदद मिल सकती है।

सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, ड्रग्स की डिमांड घटाने पर भी जोर

ड्रग्स के खिलाफ अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा demand reduction भी है। जब तक नशीले पदार्थों की मांग बनी रहती है, तब तक उनके सप्लाई नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना चुनौतीपूर्ण रहता है।

इसीलिए ड्रग्स विरोधी रणनीति में कार्रवाई के साथ जागरूकता, रोकथाम और नशे की लत से प्रभावित लोगों के पुनर्वास जैसे पहलुओं को भी शामिल किया जाता है।

तीसरे राष्ट्रीय ANTF सम्मेलन में demand-reduction initiatives को व्यापक और integrated approach के साथ मजबूत करने पर चर्चा होने की उम्मीद है।

सम्मेलन से क्या निकल सकता है रोडमैप?

22 और 23 सितंबर को होने वाला यह सम्मेलन केंद्र और राज्यों की ड्रग्स विरोधी एजेंसियों के लिए साझा रणनीति तैयार करने का मंच होगा। इसमें मौजूदा कार्रवाई की समीक्षा के साथ नए और उभरते ड्रग्स नेटवर्क से निपटने के उपायों पर विचार किया जाएगा।

खास तौर पर Drug Trafficking, Synthetic Drugs, Darknet Networks, Financial Investigation, Precursor Chemicals और Cross-Border Trafficking जैसे मुद्दों पर बेहतर समन्वय और कार्रवाई की दिशा तय करना महत्वपूर्ण रहेगा।

ड्रग्स के खिलाफ अभियान में अब केवल एक खेप पकड़ना या कुछ आरोपियों को गिरफ्तार करना पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। पूरे नेटवर्क, उसकी फंडिंग, सप्लाई चैन और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन तक पहुंचने के लिए कई एजेंसियों के बीच साझा इंटेलिजेंस और संयुक्त कार्रवाई को अहम माना जा रहा है।

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