खबर इंडिया की।अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में पूजा-पाठ और पुजारियों की दिनचर्या से जुड़े नियमों को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। राम मंदिर धार्मिक न्यास समिति की बैठक में पुजारियों के लिए अर्द्ध क्षौरकर्म से जुड़ा नियम तय किया गया है। इसके अलावा भगवान रामलला की आरती के दौरान पुजारियों के सिर ढकने को लेकर भी निर्णय लिया गया है।
नए नियम के मुताबिक, रामलला के पुजारी अब अर्द्ध क्षौरकर्म यानी आधे-अधूरे तरीके से मुंडन नहीं करा सकेंगे। पुजारियों को या तो बाल बढ़ाकर रखने होंगे या फिर पूरी तरह से मुंडन कराना होगा। वहीं, आरती के समय सिर ढकना भी आवश्यक होगा।
क्यों लिया गया पुजारियों के लिए यह फैसला?
Ayodhya Ram Mandir Priest Rules को लेकर श्रीराम वल्लभकुंज के अधिकारी राजकुमार दास ने बताया कि रामलला के पुजारी आम लोगों के लिए एक तरह से आदर्श होते हैं। इसलिए उनकी दिनचर्या और कार्यप्रणाली में अनुशासन बनाए रखना जरूरी है।
वहीं, डॉ. रामानंद दास ने धार्मिक परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि बालों को लेकर धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। उनके मुताबिक परंपरा के अनुसार आरती के दौरान पुजारी का सिर ढका होना चाहिए।
आचार्य मिथिलेश नंदिनी ने भी अर्द्ध क्षौरकर्म को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि दूसरे देवस्थानों से भी इस तरह की शिकायतें सामने आई हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पुजारियों के लिए स्पष्ट नियम तय किए जाने की बात कही गई।
बैठक में कई संत हुए शामिल
राम मंदिर से जुड़े इन नियमों पर हुई वर्चुअल बैठक में कई संत और धार्मिक पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में स्वामी परमानंद महाराज, निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास, मणिराम छावनी के महंत कमलनयन दास, स्वामी विश्व प्रसन्न तीर्थ और आचार्य इंद्रदेव मिश्र भी जुड़े।
बैठक में पूजा-पाठ की परंपराओं के साथ रामलला को लगाए जाने वाले विशेष भोग को लेकर भी चर्चा की गई।
सावन उत्सव में रामलला को लगेगा विशेष भोग
रामलला के भोग को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। रामकुंज कथा मंडप के पीठाधीश्वर डॉ. रामानंद दास के मुताबिक सावन उत्सव के दौरान पूर्णिमा तक रोजाना देसी घी का मालपुआ और खीर का भोग लगाया जाएगा। इस प्रस्ताव पर बैठक में शामिल संतों ने सहमति जताई।
इसके अलावा श्रीराम वल्लभा कुंज के अधिकारी स्वामी राजकुमार दास ने बताया कि अगले 15 दिनों तक रामलला को पूड़ी-साग का भोग भी लगाया जाएगा। इस प्रस्ताव को भी सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई।
इस तरह बैठक में रामलला की पूजा-पद्धति, पुजारियों की धार्मिक मर्यादा और विशेष भोग से जुड़े कई विषयों पर निर्णय लिए गए हैं।














