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PM Modi Seva Yatra: ‘कितनी भी सत्ता न मिल जाए, हम…’, पीएम मोदी ने की सेवा संकल्प अभियान के सेवा यात्रियों से बातचीत

उमाकांत त्रिपाठी। PM Modi Seva Yatra: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार, 24 सितंबर को PM Modi Seva Yatra के तहत यात्रा कर रहे सेवा यात्रियों से बातचीत की। वडनगर से वाराणसी तक निकली सेवा यात्रा के प्रतिभागियों से संवाद के दौरान पीएम मोदी ने सेवा को जीवन और सार्वजनिक कार्यों का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने कहा कि सेवा का संदेश केवल भाषण या उपदेश देकर नहीं, बल्कि खुद सेवा करके दिया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने सेवा यात्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि सेवा ही उनका मुख्य मकसद होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि व्यक्ति चाहे कितनी भी ऊंचाई पर पहुंच जाए, उसे सेवा भाव से पीछे नहीं हटना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि व्यवहार और काम के जरिए लोगों को यह दिखाई देना चाहिए कि बड़ी जिम्मेदारी या राजनीतिक शक्ति मिलने के बाद भी सेवा का रास्ता जारी रहता है।

यह सेवा यात्रा वडनगर से वाराणसी के बीच आयोजित की जा रही है। वडनगर प्रधानमंत्री मोदी का जन्मस्थान है, जबकि वाराणसी उनका लोकसभा क्षेत्र रहा है। इस यात्रा को प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से जुड़े सेवा संकल्प अभियान के कार्यक्रमों से जोड़ा गया है।

‘सेवा ही हमारा मुख्य मकसद होना चाहिए’

पीएम मोदी ने सेवा यात्रियों से कहा कि सेवा को केवल बोलने या समझाने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उनके मुताबिक, लोगों तक सेवा का संदेश तब ज्यादा प्रभावी तरीके से पहुंचता है, जब उसे व्यवहार और काम के जरिए दिखाया जाए।

उन्होंने कहा कि सेवा ही मुख्य कार्य होना चाहिए और सेवा करते हुए ही सेवा का संदेश देना चाहिए। इसके लिए अलग से उपदेश देने की जरूरत नहीं है। व्यक्ति के काम और व्यवहार से ही यह दिखाई देना चाहिए कि वह समाज और देश के लिए क्या कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में कितनी भी ऊंचाई क्यों न हासिल हो जाए, सेवा के रास्ते से भटकना नहीं चाहिए। उन्होंने ‘सेवा परमो धर्म:’ का उल्लेख करते हुए सेवा को आगे बढ़ने का आधार बताया।

पीएम मोदी ने कहा कि राजनीतिक शक्ति या किसी भी तरह की बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद भी सेवा का भाव कायम रहना चाहिए। उनके अनुसार, लोगों को अपने काम से यह महसूस होना चाहिए कि सेवा केवल भाषण का विषय नहीं है, बल्कि व्यवहार में भी दिखाई देती है।

पीएम मोदी ने सेवा यात्रियों को प्रणाम कर कही ये बात

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने सेवा यात्रियों का अभिवादन करते हुए एक धार्मिक मान्यता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति यात्रा से लौटता है और लोग उसे प्रणाम करते हैं, तो मान्यता के अनुसार यात्रा का आधा पुण्य प्रणाम करने वाले को भी मिलता है।

पीएम मोदी ने इसी संदर्भ में कहा कि वह भी सभी सेवा यात्रियों को प्रणाम करके उनका आधा पुण्य ले रहे हैं। उन्होंने सेवा यात्रियों की यात्रा और उनके सेवा भाव की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने सेवा यात्रियों से बातचीत के दौरान अलग-अलग विषयों पर भी चर्चा की। इस संवाद में सेवा, समाज के प्रति जिम्मेदारी और लोगों के बीच जाकर काम करने जैसे मुद्दों पर जोर रहा।

वडनगर से वाराणसी तक निकली सेवा यात्रा

सेवा संकल्प अभियान के तहत वडनगर से वाराणसी तक सेवा यात्रा निकाली गई है। अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर हुई थी और इससे जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। अभियान को प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से भी जोड़ा गया है।

वडनगर और वाराणसी इस यात्रा के लिए महत्वपूर्ण स्थान हैं। वडनगर प्रधानमंत्री मोदी का जन्मस्थान है और वाराणसी उनके राजनीतिक जीवन से जुड़ा प्रमुख क्षेत्र है। इसी वजह से दोनों शहरों को जोड़ने वाली यात्रा के जरिए सेवा और जनभागीदारी का संदेश देने की बात सामने आई है।

गुरुवार को प्रधानमंत्री ने यात्रा कर रहे लोगों से बातचीत कर उनके अनुभव भी जाने। सेवा यात्रियों की यात्रा का उद्देश्य केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचना नहीं, बल्कि सेवा के विचार को लोगों तक पहुंचाना बताया गया है।

पौधारोपण को लेकर भी पीएम मोदी ने दिया सुझाव

प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान पौधारोपण और पेड़ों की देखभाल का भी जिक्र किया। उन्होंने पौधा लगाने के बाद उसकी नियमित देखभाल के लिए एक आसान तरीका बताया।

पीएम मोदी ने कहा कि पौधा लगाते समय उसके पास पानी से भरा मिट्टी का घड़ा रखा जा सकता है। घड़े का मुंह ऊपर की ओर रखने और महीने में एक बार उसमें पानी भरने से पेड़ को पानी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। उन्होंने इसे पानी की बचत और अधिक से अधिक पेड़ उगाने से जोड़कर बताया।

प्रधानमंत्री का यह सुझाव सेवा के दायरे को केवल सामाजिक गतिविधियों तक सीमित न रखते हुए पर्यावरण से जोड़ने की दिशा में भी था। पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल करना भी जरूरी है, इसी बात पर उन्होंने ध्यान दिलाया।

‘कितनी भी ऊंचाई पर पहुंचें, सेवा से पीछे नहीं हटेंगे’

प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा यात्रियों से कहा कि जीवन में व्यक्ति कितनी भी ऊंचाई पर पहुंच जाए, सेवा भाव को नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने सेवा को सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि सेवा का रास्ता लगातार जारी रहना चाहिए।

उनके संबोधन का प्रमुख संदेश यही रहा कि सेवा को केवल शब्दों में नहीं, बल्कि जमीन पर किए जाने वाले कामों में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने सेवा यात्रियों से भी इसी भावना के साथ आगे बढ़ने की अपील की।

वडनगर से वाराणसी तक जारी यह यात्रा सेवा संकल्प अभियान का हिस्सा है। प्रधानमंत्री के साथ बातचीत के दौरान सेवा यात्रियों के उत्साह और उनके काम की सराहना भी की गई। इस संवाद के जरिए सेवा, जनभागीदारी और सामाजिक जिम्मेदारी को प्रमुखता दी गई।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सेवा को जीवन का मूल भाव बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चाहे व्यक्ति किसी भी मुकाम पर पहुंच जाए, समाज के प्रति जिम्मेदारी और सेवा की भावना बनी रहनी चाहिए। यही संदेश सेवा यात्रियों के संवाद का मुख्य केंद्र रहा।

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