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जिस मकान में बचपन से खेलकर बड़े हुए, उसी पर चलाया हथौड़ा, सीएम मोहन ने क्यों तोड़ा अपना पुश्तैनी घर

उमाकांत त्रिपाठी।मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियों के तहत चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य में अपने पुश्तैनी मकान का हिस्सा खुद हटाया। मुख्यमंत्री ने हाथ में गैंती और हथौड़ा लेकर उस हिस्से को तोड़ने की शुरुआत की, जो सड़क चौड़ीकरण परियोजना की जद में आ रहा है।

उज्जैन के अब्दालपुरा इलाके में खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक सड़क का चौड़ीकरण किया जाना है। करीब 9.8 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के तहत सड़क को चौड़ा किया जा रहा है। बताया गया है कि इस क्षेत्र के करीब 270 मकान सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित हो रहे हैं। इनमें मुख्यमंत्री मोहन यादव का पुश्तैनी मकान और उनकी बहन कलावती यादव का मकान भी शामिल है।

करीब 2.90 मीटर हिस्सा सड़क चौड़ीकरण की जद में

सड़क को चौड़ा करने के लिए मुख्यमंत्री के पुश्तैनी मकान का करीब 2.90 मीटर हिस्सा हटाया जाना है। रविवार को मुख्यमंत्री ने खुद इस हिस्से को हटाने की शुरुआत की।

सिंहस्थ 2028 को देखते हुए उज्जैन में सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई विकास कार्य किए जा रहे हैं। प्रशासन के अनुसार, सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और वाहनों के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। ऐसे में प्रमुख मार्गों का चौड़ीकरण यातायात के दबाव को कम करने में मदद कर सकता है।

1974 में बना था मोहन यादव का पुश्तैनी मकान

मुख्यमंत्री मोहन यादव का इस मकान से पुराना पारिवारिक जुड़ाव है। उनके दादा रामचंद्र यादव ने वर्ष 1974 में यह मकान बनवाया था। मोहन यादव और उनके भाई-बहनों का बचपन इसी घर और आसपास के इलाके में बीता।

उनके पड़ोसी लक्ष्मीनारायण सोलंकी ने बातचीत में मुख्यमंत्री के बचपन से जुड़ी यादें साझा कीं। उनके मुताबिक, मोहन यादव और उनके भाई-बहनों का बचपन इसी मोहल्ले में सामान्य परिस्थितियों में गुजरा।

यह मकान मुख्यमंत्री के परिवार के लिए सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि कई पुरानी यादों से जुड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री ने भी कहा कि जिस घर में उन्होंने अपना बचपन बिताया, उसके एक हिस्से को हटाने का भावनात्मक असर होना स्वाभाविक है।

‘उज्जैन के विकास के लिए सहयोग करना जरूरी’

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि विकास कार्यों के लिए अगर किसी संपत्ति के हिस्से को हटाने की जरूरत पड़ती है तो लोगों को आगे बढ़कर सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय नागरिक भी सिंहस्थ से जुड़े विकास कार्यों में सहयोग कर रहे हैं और कई लोग अपने मकानों के प्रभावित हिस्से स्वेच्छा से हटा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने पुश्तैनी घर का जिक्र करते हुए कहा कि यह मकान उनके परिवार के कई चुनावों और जीत का गवाह रहा है। हालांकि, जनप्रतिनिधि होने के नाते जनहित से जुड़े विकास कार्यों में उदाहरण पेश करने की जिम्मेदारी भी उनकी है।

उन्होंने कहा कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए और शासन तथा जनहित के लिए जो जरूरी हो, उसे स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

सिंहस्थ 2028 से पहले यातायात व्यवस्था पर जोर

उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ का आयोजन होना है। इसे देखते हुए शहर में सड़क, यातायात और अन्य बुनियादी सुविधाओं को विकसित करने के काम चल रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार, अब्दालपुरा क्षेत्र की यह सड़क शहर के महत्वपूर्ण और व्यस्त मार्गों में शामिल है। सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर इस मार्ग पर यातायात का दबाव भी बढ़ सकता है। सड़क चौड़ी होने से वाहनों की आवाजाही के लिए अतिरिक्त जगह उपलब्ध होगी और यातायात प्रबंधन में मदद मिलने की उम्मीद है।

सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले करीब 270 मकानों के प्रभावित हिस्सों को हटाने की प्रक्रिया इसी विकास योजना का हिस्सा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा अपने पुश्तैनी मकान के हिस्से को खुद हटाने की शुरुआत किए जाने को इसी परियोजना के तहत उठाया गया कदम बताया गया है।

सिंहस्थ की तैयारियों के बीच उज्जैन में कई स्तरों पर विकास कार्य किए जा रहे हैं। सड़क चौड़ीकरण के साथ शहर में श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने और यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

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