उमाकांत त्रिपाठी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने UPSC से जुड़े 100 ऐतिहासिक फैसलों पर आधारित पुस्तक का लोकार्पण किया। इसके साथ ही शताब्दी स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट भी जारी किया।
PM Modi UPSC कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए जिस तरह की गवर्नेंस की जरूरत है, उसमें UPSC की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवाओं में भर्ती होने वाले युवाओं के लिए दो प्रमुख कसौटियां होनी चाहिए- ‘Nation First’ और ‘Citizens First’।
पीएम मोदी ने कहा कि इन भावनाओं के आधार पर युवाओं का चयन होने से राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी।
UPSC के 100 साल पूरे, PM मोदी ने जारी किया सिक्का और डाक टिकट
UPSC की स्थापना से जुड़ी ऐतिहासिक यात्रा के 100 साल पूरे होने पर 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देशभर के राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद और UPSC से जुड़े अधिकारी शामिल हुए।
पीएम मोदी ने कार्यक्रम के दौरान UPSC के 100 साल से जुड़े ऐतिहासिक फैसलों पर आधारित किताब का लोकार्पण किया। इसके अलावा 100 रुपये का स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट भी जारी किया गया।
प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में लगाई गई प्रदर्शनी का भी दौरा किया और आयोग के इतिहास से जुड़ी जानकारी देखी।
बोले- विकसित भारत की गवर्नेंस का माध्यम UPSC
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए जिस तरह की प्रशासनिक व्यवस्था चाहिए, उसमें UPSC की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि आज जिन युवाओं की सरकारी सेवाओं में भर्ती हो रही है, वे आने वाले समय में विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगे। इसलिए चयन प्रक्रिया में सिर्फ परीक्षा पास करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उम्मीदवारों में देश और नागरिकों के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी होनी चाहिए।
पीएम मोदी ने इसके लिए दो कसौटियां बताईं- Nation First और Citizens First।
उन्होंने कहा कि इन दोनों भावनाओं के आधार पर उम्मीदवारों को परखा जाना चाहिए।
‘सरकार माई-बाप नहीं, नागरिक देवोभव हमारा मंत्र’
पीएम मोदी ने अपने भाषण में गवर्नेंस के बदलते तरीके का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले सरकार को ‘माई-बाप’ समझने की धारणा थी, लेकिन आज सरकार का मंत्र ‘नागरिक देवोभव’ है।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का भारत नई कार्य संस्कृति के साथ आगे बढ़ रहा है। इसके लिए उन्होंने Pro People, Pro Active और Good Governance पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, Pro People का मतलब नागरिकों के हितों को प्राथमिकता देकर काम करना है। Pro Active का अर्थ समस्या सामने आने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से संभावित समस्याओं को समझकर समाधान तैयार करना है।
वहीं Good Governance के तहत सरकार की ओर से अनावश्यक दबाव या प्रभाव के बजाय प्रभावी और जवाबदेह प्रशासन पर जोर दिया गया।
सुभाष चंद्र बोस का भी किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने UPSC के इतिहास का जिक्र करते हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि 1920 में सुभाष चंद्र बोस जब इंडियन सिविल सर्विस यानी ICS की परीक्षा प्रक्रिया से गुजरे थे, तब संस्कृत का पेपर भी होता था और उन्होंने संस्कृत में परीक्षा दी थी।
पीएम मोदी ने कहा कि 100 वर्षों की यात्रा में पीढ़ियां बदलीं, सरकारें बदलीं, तकनीक और सिलेबस में बदलाव हुआ, लेकिन UPSC पर लोगों का भरोसा बना रहा।
परीक्षा में देरी पर बोले PM- युवाओं के भविष्य से जुड़ा है मामला
प्रधानमंत्री ने परीक्षा कराने वाली संस्थाओं के लिए समयबद्धता को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि परीक्षा को सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं समझना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा संबंध युवाओं के भविष्य से होता है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा में कुछ महीनों की देरी से उम्मीदवारों को परेशानी हो सकती है। इसलिए परीक्षा व्यवस्था को समय पर काम करने के सिद्धांत का पालन करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने UPSC और राज्य लोक सेवा आयोगों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आयोगों की आंतरिक व्यवस्था और वहां काम करने वाली टीम की ट्रेनिंग के लिए मिशन कर्मयोगी के तहत बनाए गए iGOT प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा सकता है।
‘आयोगों का काम युवाओं के भविष्य से जुड़ा’
पीएम मोदी ने कहा कि लोक सेवा आयोगों को हमेशा याद रखना चाहिए कि उनका काम देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है। युवाओं की क्षमता को देश की ताकत में बदलने में इन आयोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि सरकारी सेवाओं में आने वाले अधिकारियों में गरीब और कमजोर वर्गों की समस्याओं को समझने की संवेदना होनी चाहिए। साथ ही उनमें नई परिस्थितियों के हिसाब से समाधान खोजने और कानून का पालन कराने की क्षमता भी होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अधिकारियों के काम का आकलन इस आधार पर होना चाहिए कि उनके प्रयासों से लोगों का जीवन कितना आसान हुआ।
UPSC का इतिहास 100 साल पुराना
UPSC का इतिहास 1926 से जुड़ा है। शुरुआत में इसका नाम Public Service Commission था। बाद में 1937 में इसे Federal Public Service Commission कहा गया।
भारत का संविधान लागू होने के बाद 1950 में इसका नाम Union Public Service Commission (UPSC) किया गया। आयोग के पहले अध्यक्ष सर रॉस बार्कर थे, जिन्होंने 1926 से 1932 तक यह जिम्मेदारी संभाली।
UPSC संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत गठित संवैधानिक संस्था है। आयोग केंद्र सरकार की विभिन्न सेवाओं और पदों के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित करता है।
स्मित मच्छार का भी किया जिक्र
कार्यक्रम में पीएम मोदी ने फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट स्मित मच्छार का भी जिक्र किया। हाल ही में फ्लाईदुबई की एक उड़ान में हुई गंभीर घटना के दौरान कैप्टन मच्छार के घायल होने के बावजूद विमान को सुरक्षित उतारने में भूमिका की चर्चा हुई थी।
पीएम मोदी ने बताया कि उन्होंने कैप्टन मच्छार के माता-पिता से भी बातचीत की है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया भारतीय पायलट की बहादुरी पर गर्व कर रही है।
UPSC परीक्षा प्रक्रिया में क्या होता है?
UPSC की परीक्षाओं में प्रश्न तैयार करने और मूल्यांकन की प्रक्रिया में विशेषज्ञों की भूमिका होती है। उत्तर पुस्तिकाओं में कोडिंग की व्यवस्था की जाती है, ताकि मूल्यांकन के दौरान परीक्षक को उम्मीदवार की पहचान से जुड़ी जानकारी सीमित रहे।
सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे चर्चित प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल है। हर साल बड़ी संख्या में युवा इसमें आवेदन करते हैं। प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के अलग-अलग चरणों के बाद अंतिम चयन किया जाता है।
UPSC के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में आयोग के इतिहास के साथ-साथ भविष्य की परीक्षा और भर्ती व्यवस्था में सुधार पर भी जोर दिया गया।














