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‘चुनाव आयोग ने कानून तोड़ा तो सभी फैसले रोक देंगे’… सुप्रीम कोर्ट ने SIR के 14 फैसलों पर दिया नोटिस, CEC ज्ञानेश को सस्पेंड करने पर ये कहा

 

खबर इंडिया की।सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने या उन्हें पद पर काम करने से रोकने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े करीब 14 फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए। हालांकि, कोर्ट ने इन आरोपों पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अगर रिकॉर्ड से यह सामने आता है कि संबंधित फैसले निर्धारित प्रक्रिया और जरूरी सहमति के बिना लिए गए थे, तो कोर्ट उन फैसलों पर रोक लगाने या उन्हें कानून के अधिकार से बाहर घोषित करने पर विचार कर सकता है। कोर्ट ने फिलहाल बिना रिकॉर्ड देखे यह मानने से इनकार किया कि सभी फैसले अकेले CEC ने लिए थे।

केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस

CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने याचिका पर केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी, डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग और DG (IT) सीमा खन्ना को नोटिस जारी किया।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह और मेनका गुरुस्वामी ने दलीलें रखीं। विकास सिंह ने कहा कि 2023 में बनाए गए नए कानून से चुनाव आयोग की शक्तियों और उसके काम करने के तरीके में बदलाव हुआ है। उन्होंने कहा कि अनूप बरनवाल मामले के बाद स्थिति बदल गई है और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

CEC को कानूनी सुरक्षा देने वाले कानून पर सवाल

विकास सिंह ने अदालत में कहा कि 2023 के कानून के तहत CEC और चुनाव आयुक्तों को कानूनी सुरक्षा दी गई है। उनका दावा था कि इस वजह से चुनाव आयोग को अन्य संवैधानिक संस्थाओं की तुलना में ज्यादा शक्तियां मिल गई हैं।

मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी सभी मांगों पर कायम हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी काम को गलत तरीके से किया गया है तो क्या नए कानून के तहत उसे सरकारी ड्यूटी का हिस्सा मानकर कानूनी सुरक्षा दी जा सकती है।

गुरुस्वामी ने दिल्ली में SIR की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि फॉर्म-6 में दो नई शर्तें जोड़ी गई हैं और उन्हें भी इसका नोटिस मिला है। उन्होंने आगामी चुनाव का हवाला देते हुए CEC की निष्पक्षता पर सवाल उठाया।

‘सहमति नहीं बने तो बहुमत से फैसला हो सकता है’

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि याचिका में की गई सभी मांगें फिलहाल आपस में जुड़ी हुई दिखाई देती हैं। विकास सिंह ने सुझाव दिया कि अगली सुनवाई तक चुनाव आयोग को निर्देश दिया जा सकता है कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए जाएं।

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि आयोग से उम्मीद की जाती है कि वह सर्वसम्मति से निर्णय ले, लेकिन अगर सदस्यों के बीच सहमति नहीं बनती है तो बहुमत के आधार पर भी फैसला लिया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल याचिकाकर्ता अपनी दलीलें एक खबर के आधार पर रख रहे हैं।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून में जो प्रक्रिया तय है, उसका पालन करना जरूरी है। अगर यह पाया जाता है कि कानून का पालन नहीं हुआ, तो अदालत कार्रवाई कर सकती है।

रिकॉर्ड देखने के बाद ही फैसला: सुप्रीम कोर्ट

याचिकाकर्ता की ओर से जब यह सवाल उठाया गया कि ऐसी स्थिति में कोर्ट किन फैसलों को रद्द कर सकता है, तो बेंच ने कहा कि अगर रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि कोई फैसला आवश्यक सर्वसम्मति के बिना लिया गया था, तो उस पर रोक लगाई जा सकती है और उसे कानून के अधिकार से बाहर घोषित किया जा सकता है।

हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड देखे बिना यह मान लेना उचित नहीं होगा कि सभी फैसले अकेले लिए गए। अदालत ने चुनाव आयोग से इस पूरे मामले पर स्पष्ट और पारदर्शी जवाब मांगा है।

CEC को निलंबित करने की मांग पर कोर्ट ने पूछा- फिर चुनाव कौन कराएगा?

सुनवाई के दौरान विकास सिंह ने कहा कि 2023 के कानून की धारा 16 में CEC को ऐसी सुरक्षा दी गई है, जो पहले नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि इससे CEC की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

इस पर जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि ऐसी सुरक्षा शायद केवल राष्ट्रपति को मिली हुई है और जजों को भी इस तरह की सुरक्षा नहीं मिली है।

विकास सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री को भी ऐसी सुरक्षा नहीं मिली है। उन्होंने अदालत से मांग की कि CEC ज्ञानेश कुमार को अंतरिम तौर पर निलंबित किया जाए या उन्हें CEC के तौर पर काम करने से रोका जाए। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।

इस पर जस्टिस बागची ने सवाल किया कि अगर CEC को काम करने से रोक दिया गया तो चुनाव कौन कराएगा?

विकास सिंह ने जवाब दिया कि बाकी दो चुनाव आयुक्त चुनाव करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश में 76 साल से चुनाव होते आ रहे हैं और चुनाव आयोग की एक बड़ी प्रतिष्ठा रही है। उनके मुताबिक, CEC पर उसी कानून के खिलाफ काम करने के आरोप हैं जिसके तहत उनकी नियुक्ति हुई है और यह लोकतंत्र के लिए गंभीर विषय है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने या उन्हें पद से हटाकर काम करने से रोकने का अंतरिम आदेश नहीं दिया है। अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई में चुनाव आयोग के जवाब और रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।

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