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Cabinet Decisions 2026:देश में 850 फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनेंगी:बिजली स्टोर करने की क्षमता बढ़ाने के लिए 14,500 करोड़ रुपए मंजूर, मोदी कैबिनेट की मीटिंग में अहम फैसले

Cabinet Decisions 2026: उमाकांत त्रिपाठी।केंद्र सरकार ने बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसलों को मंजूरी दी है। इन फैसलों का असर न्याय व्यवस्था, बिजली उत्पादन, महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग और सरकारी आंकड़े जुटाने की व्यवस्था पर पड़ेगा। Cabinet Decisions 2026 के तहत यौन शोषण और रेप के मामलों का जल्द निपटारा करने के लिए 850 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की मंजूरी दी गई है। इसके अलावा बिजली स्टोर करने के लिए 92 गीगावाट-घंटे (GWh) क्षमता वाली एनर्जी स्टोरेज योजना पर 14,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने देश की ऊर्जा जरूरतों और डेटा कलेक्शन सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण योजनाओं को मंजूरी दी है। वहीं, क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए भी नई योजना स्वीकृत की गई है।

इन फैसलों के बीच अग्निवीरों के सेवा कार्यकाल को चार साल से बढ़ाकर छह साल करने का ऐलान भी किया गया है। इससे सेना में अग्निवीरों की सेवा अवधि को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है।

1. रेप और यौन शोषण के मामलों के लिए बनेंगे 850 फास्ट ट्रैक कोर्ट

कैबिनेट बैठक का एक बड़ा फैसला यौन अपराधों से जुड़े मामलों के जल्द निपटारे को लेकर है। केंद्र सरकार ने रेप और यौन शोषण के मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए 850 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने को मंजूरी दी है।

इन अदालतों का उद्देश्य ऐसे मामलों में लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया को कम करना और पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाना है। अक्सर यौन अपराधों से जुड़े मामलों में सुनवाई में देरी होने के कारण पीड़ितों और उनके परिवारों को लंबे समय तक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए मामलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर की जा सकेगी। इससे न्यायिक प्रक्रिया को गति देने और लंबित मामलों का बोझ कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, इन अदालतों की स्थापना, संचालन और मामलों के निपटारे की समयसीमा से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद योजना के वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।

2. एनर्जी स्टोरेज योजना के लिए ₹14,500 करोड़ मंजूर

कैबिनेट ने बिजली को बड़े पैमाने पर स्टोर करने के लिए 14,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत 92 GWh क्षमता वाली ग्रिड स्केल एनर्जी स्टोरेज व्यवस्था विकसित की जाएगी।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य जरूरत के समय बिजली उपलब्ध कराना और सौर ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल करना है। फिलहाल सौर ऊर्जा का उत्पादन मुख्य रूप से दिन के समय होता है, जबकि बिजली की मांग कई बार शाम और रात में भी अधिक रहती है।

ऐसे में दिन के समय पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली को स्टोर करके बाद में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे बिजली आपूर्ति को अधिक बेहतर और भरोसेमंद बनाने में मदद मिल सकती है।

92 GWh की क्षमता को तीन हिस्सों में बांटा गया है:

  • 30 GWh: बैटरी आधारित एनर्जी स्टोरेज सिस्टम।

  • 60 GWh: पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स।

  • 2 GWh: नई सोलर टेक्नोलॉजी से जुड़ी क्षमता।

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि एनर्जी स्टोरेज से बिजली ट्रांसमिशन लाइनों का भी बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।

उदाहरण के तौर पर, किसी सौर ऊर्जा संयंत्र के लिए 10 मेगावाट की ट्रांसमिशन क्षमता तैयार की गई है। दिन में बिजली उत्पादन होने पर इसका इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन रात में सौर बिजली नहीं बनने के कारण यह क्षमता खाली रह जाती है।

अगर बिजली स्टोर करने की व्यवस्था उपलब्ध हो तो दिन में पैदा हुई बिजली को जमा करके रात में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पहले से तैयार ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर का अधिक प्रभावी उपयोग संभव होगा।

3. क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग के लिए नई योजना

केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण खनिजों यानी क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए भी योजना को मंजूरी दी है।

अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, इस योजना का मकसद खदानों से निकाले गए कच्चे खनिजों को प्रोसेस करके इस लायक बनाना है कि उनका इस्तेमाल सीधे औद्योगिक उत्पादन में किया जा सके।

यह योजना पहचान किए गए सभी 24 महत्वपूर्ण खनिजों पर लागू होगी। इसमें खदानों से प्राप्त खनिजों के अलावा रीसाइक्लिंग के जरिए मिलने वाले खनिज भी शामिल होंगे।

क्रिटिकल मिनरल्स का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और आधुनिक तकनीक से जुड़े कई क्षेत्रों में किया जाता है।

दुनियाभर में इन खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में भारत के लिए इनकी प्रोसेसिंग क्षमता विकसित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस योजना से देश में खनिजों की वैल्यू एडिशन क्षमता बढ़ाने और विदेशी सप्लाई पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही रीसाइक्लिंग के जरिए उपलब्ध खनिजों का दोबारा इस्तेमाल करने को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

4. डेटा कलेक्शन सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए ₹4,371 करोड़

कैबिनेट ने देश के डेटा कलेक्शन सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए 4,371 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है।

इस योजना का उद्देश्य सरकारी आंकड़े जुटाने, उनका विश्लेषण करने और उनकी विश्वसनीयता बढ़ाने की प्रक्रिया को आधुनिक बनाना है।

सरकार की नीतियां और योजनाएं तैयार करने में आंकड़ों की अहम भूमिका होती है। रोजगार, उद्योग, कृषि, जनसंख्या और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े आंकड़ों के आधार पर ही कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाते हैं।

ऐसे में डेटा कलेक्शन की प्रक्रिया में सुधार करना जरूरी है।

योजना के तहत इन कामों पर जोर दिया जाएगा:

  • सरकारी सर्वेक्षणों के तरीकों में सुधार किया जाएगा।

  • आंकड़े जुटाने के दौरान होने वाली गलतियों को कम किया जाएगा।

  • यूनिवर्सिटीज में डेटा कलेक्शन से जुड़े कोर्स शुरू किए जाएंगे।

  • आंकड़ों को नियमित रूप से जुटाने की व्यवस्था बेहतर होगी।

  • डेटा की समय-समय पर समीक्षा और जांच की जाएगी।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस योजना का मकसद देश के डेटा कलेक्शन सिस्टम को मजबूत बनाना है, ताकि सरकार को नीतियां बनाने के लिए अधिक भरोसेमंद आंकड़े मिल सकें।

5. अग्निवीरों का सेवा कार्यकाल 4 से बढ़ाकर 6 साल

कैबिनेट के अन्य फैसलों के साथ अग्निवीरों के सेवा कार्यकाल को लेकर भी बड़ा ऐलान किया गया है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने बुधवार को अग्निवीरों को दो साल का सेवा विस्तार देने की जानकारी दी।

इसके तहत अग्निवीर अब चार साल के बजाय छह साल तक सेना में सेवा दे सकेंगे।

अग्निपथ योजना के तहत सेना में भर्ती होने वाले अग्निवीरों का शुरुआती सेवा कार्यकाल चार साल निर्धारित किया गया था। अब इसे दो साल बढ़ाने के फैसले से उनकी सेवा अवधि में बदलाव होगा।

इस फैसले को सेना में मानव संसाधन और सेवा अवधि से जुड़े महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, सेवा विस्तार किन अग्निवीरों पर लागू होगा और इसके लिए क्या पात्रता या शर्तें होंगी, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

कैबिनेट के फैसलों का देश पर क्या होगा असर?

केंद्र सरकार के इन फैसलों में न्याय व्यवस्था से लेकर ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास तक कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

850 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनने से यौन अपराधों के मामलों की सुनवाई में तेजी लाने की कोशिश होगी। वहीं, 14,500 करोड़ रुपये की एनर्जी स्टोरेज योजना से नवीकरणीय ऊर्जा को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने का रास्ता तैयार हो सकता है।

क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग योजना से घरेलू उद्योगों को जरूरी कच्चा माल उपलब्ध कराने और खनिजों की सप्लाई चेन मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। दूसरी तरफ, डेटा कलेक्शन सिस्टम के आधुनिकीकरण से सरकारी योजनाओं और नीतियों के लिए अधिक सटीक आंकड़े जुटाए जा सकेंगे।

कुल मिलाकर, कैबिनेट के ये फैसले न्याय, ऊर्जा, तकनीक और रक्षा क्षेत्र में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इन योजनाओं का वास्तविक असर इनके क्रियान्वयन और निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने पर निर्भर करेगा।

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