Chhattisgarh Tourism: उमाकांत त्रिपाठी।छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का प्रभाव कम होने के बाद अब राज्य के पर्यटन क्षेत्र को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि नक्सलवाद का अवरोध दूर होने से प्रदेश में पर्यटन विकास की अपार संभावनाओं के नए रास्ते खुल रहे हैं। प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगल, जलप्रपात, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में शामिल हो सकता है।
Chhattisgarh Tourism को लेकर अमित शाह ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण बस्तर सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों की पर्यटन क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो सका। हिंसा और असुरक्षा के माहौल के कारण पर्यटक इन इलाकों तक पहुंचने से बचते थे। अब शांति और सुरक्षा का वातावरण मजबूत होने से पर्यटन के साथ उद्योग, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
अमित शाह नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 के समापन एवं राज्य अलंकरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहे। इस दौरान शाह ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली हस्तियों और संस्थाओं को राज्य अलंकरण सम्मान प्रदान किए। उन्होंने महतारी वंदन योजना की 33वीं किस्त भी जारी की।
नक्सलवाद का प्रभाव कम होने से बस्तर में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ लंबे समय तक नक्सलवाद की समस्या से प्रभावित रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर बस्तर जैसे प्राकृतिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्रों पर पड़ा। इन इलाकों में पर्यटन की काफी संभावनाएं होने के बावजूद सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण अपेक्षित विकास नहीं हो पाया।
उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में शांति और सुरक्षा की स्थिति मजबूत होने से तस्वीर बदल रही है। पर्यटन के क्षेत्र में निवेश बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी विकसित होंगे।
बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता को देखते हुए यहां इको टूरिज्म, सांस्कृतिक पर्यटन और एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे न केवल देश के दूसरे राज्यों से बल्कि विदेशों से भी पर्यटकों को आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।
पर्यटन बढ़ने से होटल, परिवहन, स्थानीय गाइड, खानपान और अन्य छोटे कारोबारों को भी फायदा मिलने की संभावना है। इससे स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने के नए रास्ते खुल सकते हैं।
चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात बन सकते हैं पर्यटन की बड़ी पहचान
छत्तीसगढ़ में ऐसे कई प्राकृतिक और धार्मिक स्थल हैं, जिनमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता है। अमित शाह ने प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनकी पहचान को और मजबूत किया जाना चाहिए।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
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चित्रकोट जलप्रपात: बस्तर का प्रसिद्ध जलप्रपात, जिसे अपनी विशाल जलधारा और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है।
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तीरथगढ़ जलप्रपात: कांगेर घाटी क्षेत्र का खूबसूरत प्राकृतिक पर्यटन स्थल।
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कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान: घने जंगलों, जैव विविधता और प्राकृतिक गुफाओं के लिए प्रसिद्ध।
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मां दंतेश्वरी मंदिर: बस्तर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा प्रमुख शक्तिपीठ।
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मां बम्लेश्वरी मंदिर: प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल।
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बस्तर दशहरा: अपनी अनूठी परंपराओं और लंबे आयोजन के कारण देश-विदेश में प्रसिद्ध सांस्कृतिक उत्सव।
इन पर्यटन स्थलों को बेहतर सुविधाओं, परिवहन और प्रचार के माध्यम से विकसित किया जा सकता है। इससे छत्तीसगढ़ को पर्यटन के राष्ट्रीय नक्शे पर मजबूत स्थान दिलाने में मदद मिलेगी।
हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को मिलेंगे नए बाजार
अमित शाह ने कहा कि पर्यटन का विकास केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसका सीधा फायदा स्थानीय अर्थव्यवस्था और जनजातीय समाज को भी मिल सकता है।
बस्तर अपनी पारंपरिक कलाओं और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। यहां की धातु कला, लकड़ी की कलाकृतियां, पारंपरिक आभूषण और स्थानीय उत्पाद देशभर में पहचान बना सकते हैं।
पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से इन उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना है। इससे स्थानीय कारीगरों, महिलाओं और छोटे कारोबारियों को नए बाजार मिल सकते हैं।
इसके अलावा होमस्टे, स्थानीय खानपान, गाइड सेवाओं और परिवहन जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में पर्यटन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बस्तर की जनजातीय संस्कृति बनेगी पर्यटन की नई पहचान
अमित शाह ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और जनजातीय परंपराओं को प्रदेश की सबसे बड़ी विशेषताओं में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि बस्तर की पारंपरिक वेशभूषा, खानपान, लोकनृत्य, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत में वैश्विक पहचान हासिल करने की क्षमता है।
उन्होंने बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से जनजातीय समाज की संस्कृति, खेल प्रतिभाओं और पारंपरिक जीवनशैली को नई पहचान मिल रही है।
छत्तीसगढ़ की प्रमुख लोककलाओं में पंथी, पंडवानी, राउत नाचा, करमा और सैला नृत्य शामिल हैं। ये लोककलाएं प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती हैं।
यदि इन परंपराओं को पर्यटन से जोड़ा जाता है तो पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। साथ ही कलाकारों और पारंपरिक कला से जुड़े लोगों को आर्थिक लाभ भी मिल सकता है।
महतारी वंदन योजना की 33वीं किस्त भी जारी
राज्योत्सव 2026 के समापन समारोह में अमित शाह ने महतारी वंदन योजना की 33वीं किस्त जारी की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद के भय और हिंसा के वातावरण से निकलकर शांति, विकास और समृद्धि की नई यात्रा पर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से प्रदेश में विकास की नई संभावनाएं खुल रही हैं।
उन्होंने कहा कि एक समय छत्तीसगढ़ को लेकर यह कहा जाता था कि यहां की धरती अमीर है, लेकिन लोग गरीब हैं। अमित शाह ने उम्मीद जताई कि आने वाले दस वर्षों में प्रदेश की धरती के साथ यहां के लोग भी समृद्ध और खुशहाल होंगे।
अटल बिहारी वाजपेयी ने बनाया छत्तीसगढ़, मोदी ने विकास को दी नई दिशा
अपने संबोधन में अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को नमन किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य का गठन अटल बिहारी वाजपेयी की दूरदर्शिता का परिणाम था।
शाह के मुताबिक, अटल जी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे संवारने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि राज्य के विकास के लिए शांति, सुरक्षा और आर्थिक अवसरों का विस्तार जरूरी है। नक्सलवाद की समस्या से प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन मजबूत होने के साथ विकास कार्यों को भी गति मिलेगी।
छत्तीसगढ़ के लिए पर्यटन से खुल सकती हैं विकास की नई संभावनाएं
छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की संभावनाएं काफी व्यापक हैं। खासकर बस्तर जैसे क्षेत्रों में प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत को रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की बड़ी गुंजाइश है।
हालांकि पर्यटन को नई ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए बेहतर सड़कें, परिवहन, होटल, सुरक्षा, इंटरनेट और पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाओं का विस्तार भी महत्वपूर्ण होगा।
अमित शाह के बयान से साफ है कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के पर्यटन और आर्थिक विकास को नक्सलवाद के बाद की नई संभावनाओं के रूप में देख रही है। आने वाले समय में इन संभावनाओं को जमीन पर उतारना राज्य के विकास के लिए अहम साबित हो सकता है।














