उमाकांत त्रिपाठी।चॉकलेट डे मनाने के लिए देवर को बुलाया था। हम दोनों एक साथ थे। पति घर लौटा, तो हम दोनों को देखकर आगबबूला हो गया। इसलिए उसकी हत्या करनी पड़ी।
ये कहना है आगरा की महिला का, जिसने देवर के साथ मिलकर पति को मार दिया। वारदात को सुसाइड दिखाने के लिए शव को फंदे पर लटका दिया। परिजनों ने भी मामले को सुसाइड मानकर अंतिम संस्कार कर दिया।
अगले दिन घर में शांति हवन था। घर की महिलाओं को पत्नी के हाव-भाव पर शक हुआ। वह दुखी नहीं लग रही थी। उसका ध्यान देवर सुंदर की तरफ ज्यादा था। घर की महिलाओं ने पुलिस का डर दिखाकर उस पर दबाव डाला, तो वह टूट गई।आरोपी सुंदर की मां का कहना है कि पता नहीं था कि बेटा ऐसा काम करेगा। वह रात को फोन पर बात करता था, मुझे नहीं पता था कि अपनी भाभी से बात करता है। उसने गलत किया। मारना नहीं चाहिए था, उसे इसकी सजा मिलेगी।
पुलिस के मुताबिक, पति लवकेश बिजली मिस्त्री था। दिनभर काम करके घर लौटा था। दरवाजे पर कुंडी नहीं थी, इसलिए उसने दरवाजा खोल दिया। देखा तो पत्नी गौरी और चचेरा भाई सुंदर अंदर थे। यह देखकर वह आगबबूला हो गया।गुस्से में पति ने पूछा, “मेरी पीठ के पीछे यह क्या हो रहा है?” इसके बाद पत्नी-देवर डर गए। उन्हें लगा कि अब हमारे अफेयर के बारे में लोगों को पता चल जाएगा। हम कहीं मुंह नहीं दिखा पाएंगे। तभी अचानक सुंदर ने पीछे से लवकेश को पकड़कर बेड पर गिरा दिया।
लवकेश चिल्ला न पाए, इसलिए गौरी ने मुंह पर तकिया रख दिया। सुंदर पूरी ताकत से लवकेश को दबोचे था। 2 मिनट तड़पने के बाद उसकी बॉडी शांत हो गई। हत्या करने के बाद दोनों जमीन पर बैठ गए। घर के दूसरे कमरे में लवकेश के पिता सुरेश चंद्र तोमर सो रहे थे।
सुंदर ने कमरे से बाहर निकलकर देखा कि कहीं वे जाग तो नहीं गए। सुरेश को उनके कमरे में सोता देखकर दोनों ने तय किया कि इस हत्या को आत्महत्या दिखा दिया जाए।इसके बाद लवकेश के गले में साड़ी का फंदा बनाया। पंखे के कुंडे में उसका दूसरा सिरा बांधकर बॉडी को लटका दिया, जैसे लवकेश ने सुसाइड किया हो। उसके कपड़े भी ठीक कर दिए। कमरे में संघर्ष के सारे निशान मिटा दिए गए। तब तक रात के 2 बज चुके थे।
सुबह से रिश्तेदारों को कॉल- लवकेश ने सुसाइड किया
इसके बाद सुंदर चुपचाप घर से निकलकर 200 कदम दूर अपने घर चला गया। गौरी दूसरे कमरे में जाकर सोने का नाटक करने लगी। सुबह 6.30 बजे गौरी ने सबको फोन करना शुरू किया कि लवकेश ने रात में सुसाइड कर लिया।पिता सुरेश चंद्र भी जब कमरे में आए, तो हालात देखकर उन्हें यकीन हो गया कि बेटे ने फंदे पर लटककर जान दे दी। धीरे-धीरे घर में दोस्त, परिचित और रिश्तेदार आने लगे। आस-पास की महिलाएं घर में आ गई और रोने लगीं, गौरी भी उनके बीच में बैठी थी।
सुंदर भी रिश्तेदारों के साथ इस तरह से बैठा रहा जैसे उसे कुछ पता ही न हो। अंतिम संस्कार होने के बाद भी किसी को शक नहीं हुआ कि ये सामान्य मौत नहीं है।
गौरी और सुंदर को लगने लगा कि उन्होंने पूरे परिवार को गुमराह कर लिया है। क्योंकि किसी ने भी पुलिस से संपर्क नहीं किया, न ही इसकी चर्चा हुई।












