उमाकांत त्रिपाठी।Amit Shah Data Intelligence- को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को बड़ा बयान दिया। नई दिल्ली में आयोजित 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन-2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में केवल डेटा इकट्ठा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे इंटेलिजेंस में परिवर्तित करना सबसे महत्वपूर्ण है। गृह मंत्री ने महाभारत का उदाहरण देते हुए बताया कि सूचना को सही तरीके से उपयोग करने की क्षमता ही जीत और हार का फैसला करती है।
इस कार्यक्रम में एनसीआरबी के निदेशक आलोक रंजन, सीएफएसएल के निदेशक एस.के. जैन, एनसीआरबी के संयुक्त निदेशक संजय माथुर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। देशभर के पुलिस अधिकारियों ने भी वर्चुअल माध्यम से सम्मेलन में हिस्सा लिया।
महाभारत के उदाहरण से समझाई डेटा की शक्ति
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि महाभारत के युद्ध में कौरव सेना संख्या और संसाधनों के लिहाज से पांडवों से कहीं अधिक शक्तिशाली थी। इसके बावजूद पांडवों ने युद्ध जीता क्योंकि उनके पास भगवान श्रीकृष्ण थे, जो सूचना को इंटेलिजेंस में बदलने की क्षमता रखते थे।
गृह मंत्री ने कहा कि केवल जानकारी होना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उस जानकारी का विश्लेषण कर सही निर्णय लेना महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में भी यही सिद्धांत लागू होता है। डेटा तभी उपयोगी बनता है जब उसे इंटेलिजेंस में बदला जाए और फिर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से उसका विश्लेषण किया जाए।
अमित शाह ने कहा कि भविष्य में अपराध नियंत्रण और जांच एजेंसियों की सफलता काफी हद तक डेटा आधारित इंटेलिजेंस पर निर्भर करेगी। इससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय अपराधियों तक पहुंचना और उन्हें पकड़ना आसान होगा।
नए आपराधिक कानूनों से बदलेगी जांच प्रक्रिया
गृह मंत्री ने कहा कि देश में लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानून आपराधिक न्याय प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव लेकर आए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब जांच एजेंसियों को वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने और उन्हें अदालत में प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने के लिए प्रशिक्षित करना होगा।
उन्होंने कहा कि केवल साक्ष्य इकट्ठा कर लेना पर्याप्त नहीं है। जांच अधिकारियों को यह भी समझना होगा कि अदालत में उन साक्ष्यों को कैसे प्रमाणित किया जाए। नए कानूनों का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और तकनीक आधारित बनाना है।
अमित शाह ने अधिकारियों से कहा कि आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों, फिंगरप्रिंट विश्लेषण और डिजिटल डेटा के उपयोग को जांच का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। इससे अपराधियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार होंगे और दोष सिद्धि की दर बढ़ेगी।
आपराधिक न्याय प्रणाली परिवर्तन के दौर में
अपने भाषण में गृह मंत्री ने कहा कि भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली वर्तमान समय में परिवर्तन के महत्वपूर्ण दौर से गुजर रही है। उन्होंने बताया कि पहले थानों को मुख्य रूप से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उपकरण के रूप में देखा जाता था।
उन्होंने कहा कि पुराने समय में स्थानीय विवादों को थानेदार के स्तर पर सुलझाने की कोशिश होती थी और यदि मामला अदालत पहुंच जाता था तो वर्षों तक लंबित रहता था। लेकिन समय के साथ पुलिस व्यवस्था का स्वरूप बदला और अपराध नियंत्रण तथा जांच इसकी प्रमुख जिम्मेदारी बन गई।अमित शाह ने कहा कि आज पुलिस की भूमिका केवल अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि जांच, साक्ष्य संग्रह, अदालत में पेशी और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने तक विस्तारित हो चुकी है।
तकनीक और AI बनेंगे भविष्य की जांच का आधार
गृह मंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डेटा और डिजिटल फॉरेंसिक तकनीकें अपराध जांच की दिशा तय करेंगी। उन्होंने कहा कि डेटा का विश्लेषण करके अपराध के पैटर्न को समझा जा सकता है और अपराध होने से पहले भी कई मामलों में संभावित खतरे का आकलन किया जा सकता है।
उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि तकनीक को केवल सहायक उपकरण के रूप में न देखें, बल्कि इसे जांच प्रणाली के केंद्रीय तत्व के रूप में अपनाएं। इससे अपराध नियंत्रण अधिक प्रभावी होगा और न्याय वितरण की प्रक्रिया भी तेज होगी।
नागरिकों के अधिकारों की रक्षा पर जोर
अमित शाह ने कहा कि अब समय आ गया है कि आपराधिक न्याय प्रणाली को देश के हर नागरिक को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार दिलाने का प्रभावी माध्यम बनाया जाए। उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली का अंतिम उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि आम नागरिक को समयबद्ध और निष्पक्ष न्याय दिलाना है।
उन्होंने विश्वास जताया कि नए कानूनों, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक जांच पद्धतियों के संयोजन से भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली अधिक मजबूत, पारदर्शी और नागरिक केंद्रित बनेगी।गृह मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को सरकारी संस्थाओं में तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा आधारित जांच और फॉरेंसिक विज्ञान का बढ़ता उपयोग अपराध नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।














