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PM Modi Slovakia Visit: पीएम मोदी ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति को दिया बिहार का ठेकुआ, विदेश में छाया छठ प्रसाद का स्वाद

 

उमाकांत त्रिपाठी।PM Modi Slovakia Visit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा उपहार दिया, जिसने बिहार और झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का विषय बना दिया। स्लोवाकिया दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने वहां के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और संसद के स्पीकर रिचर्ड राशि को बिहार का प्रसिद्ध पारंपरिक व्यंजन और छठ महापर्व का प्रसाद ‘ठेकुआ’ भेंट किया। प्रधानमंत्री के इस कदम को भारतीय संस्कृति और क्षेत्रीय परंपराओं को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अपने विदेशी दौरों में भारतीय कला, संस्कृति, साहित्य और पारंपरिक उत्पादों को उपहार के रूप में चुनते रहे हैं। इस बार उन्होंने बिहार के ठेकुआ को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का हिस्सा बनाकर एक बार फिर स्थानीय विरासत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का संदेश दिया है।

ठेकुआ के जरिए दुनिया तक पहुंची बिहार की सांस्कृतिक पहचान

बिहार और झारखंड में ठेकुआ केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से छठ महापर्व के दौरान इसे प्रसाद के रूप में तैयार किया जाता है। गेहूं के आटे, गुड़ या चीनी, घी और सौंफ से बनने वाला यह व्यंजन अपनी सादगी और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है।

स्लोवाकिया के राष्ट्रपति को ठेकुआ भेंट करने के बाद यह पारंपरिक व्यंजन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। बिहार के लोगों का मानना है कि यह केवल एक उपहार नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की संस्कृति और परंपरा का सम्मान है।प्रधानमंत्री मोदी के इस कदम से बिहार की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर नई मजबूती मिली है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस पहल की सराहना कर रहे हैं और इसे बिहार के लिए गौरव का क्षण बता रहे हैं।

स्लोवाकिया दौरे पर पीएम मोदी ने दिए कई खास उपहार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने स्लोवाकिया दौरे के दौरान केवल ठेकुआ ही नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध विरासत से जुड़े कई विशेष उपहार भी साथ लेकर गए थे। इनमें ब्रास डोकरा एंटेलोप सेट, जीआई-टैग प्राप्त हिमरू सिल्क टाई और पॉकेट स्क्वायर, राजस्थान की पारंपरिक कोथेवा कला से बने कफलिंक्स तथा आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ चरक संहिता और सुश्रुत संहिता शामिल थे।

इन उपहारों का उद्देश्य भारत की विविध सांस्कृतिक धरोहर और शिल्पकला को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना था। हालांकि इन सभी उपहारों में सबसे अधिक चर्चा बिहार के ठेकुआ की हो रही है, क्योंकि यह आम लोगों की संस्कृति और परंपरा से सीधे जुड़ा हुआ है।विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उपहार भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब किसी देश का नेता अपनी सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करता है, तो उससे उस देश की सकारात्मक छवि बनती है।

छठ महापर्व का सबसे महत्वपूर्ण प्रसाद है ठेकुआ

छठ पूजा भारत के सबसे कठिन और पवित्र पर्वों में से एक मानी जाती है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और देश-विदेश में बसे लाखों श्रद्धालु इस पर्व को बड़ी श्रद्धा के साथ मनाते हैं। इस पूजा में ठेकुआ का विशेष महत्व होता है।मान्यता है कि सूर्य देव और छठी मैया को अर्पित किए जाने वाले प्रसाद में ठेकुआ प्रमुख स्थान रखता है। यही कारण है कि इसे केवल भोजन नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और पारिवारिक परंपरा का प्रतीक माना जाता है।

ठेकुआ की एक खासियत यह भी है कि यह लंबे समय तक खराब नहीं होता। इसी वजह से इसे यात्रा के दौरान भी आसानी से ले जाया जा सकता है। संभवतः यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इसे विदेश यात्रा के लिए एक उपयुक्त और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण उपहार के रूप में चुना।

पहले भी भारतीय उत्पादों को वैश्विक मंच पर पहुंचा चुके हैं पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले भी कई विदेशी नेताओं को भारतीय संस्कृति से जुड़े विशेष उपहार भेंट कर चुके हैं। हाल ही में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को भारत की लोकप्रिय मेलोडी टॉफी भेंट करने की खबर काफी चर्चा में रही थी।इसके अलावा विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों को भारतीय हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र, धार्मिक ग्रंथ और स्थानीय उत्पाद भेंट किए जाते रहे हैं। इन उपहारों के माध्यम से भारत अपनी सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं को दुनिया के सामने प्रदर्शित करता है।अब स्लोवाकिया के राष्ट्रपति को ठेकुआ भेंट करने के बाद बिहार का यह पारंपरिक व्यंजन भी अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम आगे बढ़ा चुका है।

भारत की सॉफ्ट पावर को मिल रही नई मजबूती

अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सांस्कृतिक कूटनीति का महत्व लगातार बढ़ रहा है। भारत योग, आयुर्वेद, भारतीय खानपान, हस्तशिल्प और पारंपरिक ज्ञान के जरिए दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुका है। अब क्षेत्रीय व्यंजनों को भी वैश्विक मंच पर स्थान मिलने लगा है।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्लोवाकिया के राष्ट्रपति को ठेकुआ भेंट करना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे न केवल बिहार और झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को पहचान मिलेगी, बल्कि भारतीय परंपराओं और स्थानीय उत्पादों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहन मिलेगा।

कुल मिलाकर, स्लोवाकिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का यह अनोखा उपहार भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और विविधता का प्रतीक बनकर सामने आया है। बिहार का ठेकुआ अब केवल छठ पूजा का प्रसाद नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक पहचान का वैश्विक दूत भी बन गया है।

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