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अमित शाह का जम्मू कश्मीर दौरा: आतंकवाद खत्म होने तक पाकिस्तान से बात नहीं, आरक्षण को लेकर भी दिया बड़ा बयान

उमाकांत त्रिपाठी।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज लगातार दूसरे दिन जम्मू-कश्मीर के दौरे पर हैं। नौशेरा में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि-फारूक अब्दुल्ला चाहते हैं कि हम आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान से बातचीत करें। आतंकवाद खत्म होने तक हम पाकिस्तान से बातचीत के पक्ष में नहीं है।
फारूक अब्दुल्ला कहते हैं कि वे धारा 370 को वापस लाएंगे। फारूक साहब, अब धारा 370 कोई वापस नहीं ला सकते। अब बंकरों की जरूरत नहीं है, क्योंकि गोली चलाने की कोई हिम्मत नहीं कर सकता। अगर वहां गोली आई तो गोली का जवाब गोले से दिया जाएगा।शाह के हमले पर फारूक अब्दुल्ला ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि-केंद्र सरकार चीन से बात कर सकती है, जिन्होंने हमारी 2 हजार किलोमीटर की जमीन पर कब्जा किया। पाकिस्तान से क्यों नहीं बात कर सकती। आतंकवाद का हल निकालना होगा। कब तक हमारे लोग मरते रहेंगे।

 

शाह की स्पीच की 5 बड़ी अहम बातें…

1.आतंकवाद को हम पाताल में दफ्न करेंगे। आज जम्मू-कश्मीर में शान से तिरंगा लहराया जा रहा है। वो लोग शेख अब्दुल्ला का झंडा वापस लाना चाहते हैं। जम्मू-कश्मीर में केवल हमारा तिरंगा लहराएगा। वे चाहते हैं कि हम पाकिस्तान से बातचीत करें। हम आतंकवाद खत्म होने तक पाकिस्तान से बातचीत के पक्ष में नहीं हैं।

2.वे आतंकवादियों को जेलों से रिहा करना चाहते हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने आतंकवाद को बहुत गहराई में दफ्ना दिया है। कोई भी आतंकवादी या पत्थरबाज जेल से रिहा नहीं होगा।

3.कांग्रेस, NC ने कहा है कि पहाड़ियों, गुर्जर बकरवाल, दलित, वाल्मीकि, ओबीसी समुदाय को जो आरक्षण दिया गया, उस पर फिर से विचार किया जाएगा। राहुल गांधी अमेरिका में जाकर कहते हैं कि अब इनका विकास हो चुका है, अब इन्हें आरक्षण की जरूरत नहीं है। राहुल बाबा, हम आपको आरक्षण हटाने नहीं देंगे।

4.पहाड़ी भाई बहनों के आरक्षण का अधिकार कांग्रेस, NC और PDP ने 70 वर्षों तक छीन रखा था। पहाड़ियों को आरक्षण न देने का इनका फैसला था। PM मोदी ने कहा था- कांग्रेस, NC और PDP को जो करना है, वो करे। हम पहाड़ियों को आरक्षण देंगे।

5.जब पहाड़ियों को आरक्षण दिया गया, तो फारूक साहब ने यहां के गुर्जर भाइयों को उकसाना शुरू किया कि आपका आरक्षण चला जाएगा। मैंने राजौरी में वादा किया था कि गुर्जर बकरवाल का आरक्षण एक प्रतिशत भी कम नहीं होगा और पहाड़ी भाई-बहनों को आरक्षण मिलेगा और हमने अपना वो वादा निभाया।

जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद हो रहे विधानसभा चुनाव जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। 2019 में आर्टिकल-370 हटाने के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव है। जम्मू-कश्मीर में 90 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें 7 अनुसूचित जातियों के लिए और 9 अनुसूचित जनजातियों के लिए रिजर्व हैं।
18 सितंबर को पहले फेज की वोटिंग हो चुकी है। 25 सितंबर को दूसरे फेज और 1 अक्टूबर को तीसरे फेज की वोटिंग होगी। 8 अक्टूबर को नतीजे आएंगे। चुनाव आयोग के मुताबिक यहां 88.06 लाख वोटर हैं।2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 25 सीटों पर जीत दर्ज की थी। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) ने 28 सीटें, जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने 15 और कांग्रेस ने 12 सीटें जीती थीं।

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