Amit Shah on SIR:उमाकांत त्रिपाठी। देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है। शाह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी SIR की आड़ में घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश की जनता कांग्रेस के एजेंडे को समझती है और 2029 के लोकसभा चुनाव में भी NDA भारी बहुमत से जीत हासिल करेगा।
अमित शाह ने कांग्रेस की चुनावी हार का जिक्र करते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया 2024 के बाद शुरू हुई, जबकि कांग्रेस राहुल गांधी के राजनीति में आने के बाद से लगातार चुनाव हार रही है। उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें 2029 में एक और हार के लिए तैयार रहना चाहिए।
अमित शाह बोले- 2029 में NDA की भारी जीत होगी
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा और NDA के साथ है। उनके मुताबिक, 2029 के लोकसभा चुनाव में NDA भारी बहुमत से जीत दर्ज करेगा और कांग्रेस को लगातार चौथी हार का सामना करना पड़ेगा।
शाह ने SIR को लेकर विपक्ष के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस को अपनी चुनावी हार का कारण इस प्रक्रिया में नहीं तलाशना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस कई राज्यों में लंबे समय से चुनाव नहीं जीत पा रही है, जबकि SIR प्रक्रिया हाल के वर्षों में शुरू हुई है।
हालांकि, राहुल गांधी और विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया और चुनावी निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में अनियमितताओं की आशंका है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
गुजरात निकाय चुनावों का हवाला देकर कांग्रेस पर निशाना
अमित शाह ने गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा की जीत का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने कुल 104 सीटों में से 90 सीटें जीती हैं।
शाह ने सवाल किया कि क्या गुजरात निकाय चुनावों में कांग्रेस की हार के लिए भी SIR को जिम्मेदार ठहराया जाएगा? उन्होंने आम आदमी पार्टी के प्रदर्शन का भी जिक्र किया और कहा कि पार्टी ने 32 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन सभी सीटों पर उसकी जमानत जब्त हो गई।
गृह मंत्री ने कहा कि कांग्रेस गुजरात में लंबे समय से चुनावी सफलता हासिल नहीं कर पाई है। उन्होंने पार्टी की पिछली चुनावी जीत का जिक्र करते हुए दावा किया कि कांग्रेस ने 1985 के बाद गुजरात में कोई चुनाव नहीं जीता।
बैलेट पेपर से हुए चुनावों का भी किया जिक्र
अमित शाह ने त्रिपुरा के ग्राम समिति चुनावों का उदाहरण देते हुए विपक्ष के चुनावी आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि NDA को करीब 77.5 प्रतिशत वोट मिले, जबकि कांग्रेस 4,600 सीटों में से केवल 14 सीटें जीत सकी।
शाह ने कहा कि जिन चुनावों के नतीजों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वे बैलेट पेपर से कराए गए थे। ऐसे में चुनावी हार के लिए मशीनों को जिम्मेदार ठहराने का तर्क सही नहीं है।
उन्होंने त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और गुजरात में कांग्रेस के लंबे समय से कमजोर प्रदर्शन का जिक्र किया। शाह ने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या इन राज्यों के चुनावी नतीजों को भी SIR से जोड़कर देखा जाएगा?
बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के उपचुनावों पर भी बोले शाह
गृह मंत्री ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के उपचुनावों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस इन चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत सकी।
उन्होंने पश्चिम बंगाल में भाजपा उम्मीदवारों की जीत का उल्लेख किया। शाह के मुताबिक, नाओगांव में भाजपा उम्मीदवार ने 1.42 लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल की, जबकि नंदीग्राम में भाजपा उम्मीदवार 1.22 लाख वोटों से जीते।
राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए शाह ने दावा किया कि भाजपा ने 90 प्रतिशत नगर निगमों, 66 प्रतिशत नगर परिषदों और 65 प्रतिशत नगरपालिकाओं में जीत हासिल की।
शाह का कहना था कि कांग्रेस को अपनी चुनावी स्थिति पर विचार करना चाहिए, न कि हर हार के लिए SIR या चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराना चाहिए।
SIR विवाद क्या है? विपक्ष क्यों कर रहा प्रदर्शन?
SIR यानी Special Intensive Revision का हिंदी अर्थ विशेष गहन पुनरीक्षण है। इसके तहत मतदाता सूची की विस्तृत जांच और संशोधन किया जाता है, ताकि पात्र मतदाताओं के नाम शामिल किए जा सकें और अपात्र या गलत प्रविष्टियों को हटाया जा सके।
विपक्षी दल इस प्रक्रिया की निष्पक्षता और संभावित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। राहुल गांधी समेत INDIA ब्लॉक के नेताओं ने चुनाव आयोग से जवाबदेही तय करने और कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है।
वहीं, भाजपा और केंद्र सरकार के नेताओं का तर्क है कि चुनावी हार के लिए SIR को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। इस विवाद के बीच चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दे बन गए हैं।
SIR विवाद की टाइमलाइन: कब क्या हुआ?
23 सितंबर: चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को लेकर रिपोर्ट
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई। रिपोर्ट के सामने आने के बाद विवाद बढ़ा। चुनाव आयोग ने कहा कि फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
6 अक्टूबर: राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA ब्लॉक का प्रदर्शन
वोट चोरी और चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकाला। पुलिस ने मार्च रोक दिया और राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
8 अक्टूबर: राजघाट पर मौन प्रदर्शन
राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA ब्लॉक के सांसदों ने राजघाट पर मौन प्रदर्शन किया। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। अन्य शहरों में भी चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन हुए।
10 अक्टूबर: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और हिरासत का विवाद
CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया गया। दिए गए विवरण के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शन रोक दिया और करीब 7,000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई को लेकर विवाद बढ़ा।
12 अक्टूबर: सुप्रीम कोर्ट तक मार्च
INDIA ब्लॉक के नेताओं ने राहुल गांधी के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। विपक्ष ने SIR में कथित अनियमितताओं की जांच और प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की। इस मामले में विपक्षी नेताओं की ओर से याचिका भी दायर किए जाने की बात कही गई।
SIR पर सियासी टकराव तेज
SIR को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। अमित शाह ने कांग्रेस की चुनावी हार का हवाला देकर राहुल गांधी के आरोपों पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, विपक्ष चुनाव आयोग की जवाबदेही और मतदाता सूची की निष्पक्षता को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहा है।
अब इस विवाद में चुनाव आयोग की प्रक्रिया, विपक्ष की मांगों और अदालत में चल रही कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी। 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले SIR का मुद्दा देश की राजनीति में कितना बड़ा रूप लेता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
प्रकाशन से पहले जरूरी जांच: दिए गए विवरण में गुजरात की 104 सीटों, त्रिपुरा के 4,600 सीटों, करीब 7,000 हिरासतों और उपचुनावों के वोटों के अंतर जैसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि कर लें। इन्हें प्रकाशित करते समय संबंधित आधिकारिक स्रोत या विश्वसनीय रिपोर्ट का हवाला देना बेहतर होगा।















