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ब्राजील ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे पीएम मोदी.? एंटी-टेरर प्लान के मुद्दे पर रखेंगे भारत का स्टैंड.!

उमाकांत त्रिपाठी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जुलाई में ब्राजील में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग ले सकते हैं। इस दौरान वे आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग मजबूत करने और ग्लोबल साउथ के लिए भारत के दृष्टिकोण को भी आगे बढ़ाएंगे। ब्राजील ने पीएम मोदी को शिखर सम्मेलन के साथ ही राजकीय यात्रा के लिए भी आमंत्रित किया है। अगर पीएम इस सम्मेलन में भाग लेते हैं, तो उन्हें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ ही इंडोनेशिया, ईरान, यूएई, सऊदी अरब और मिस्र जैसे BRICS सदस्य देशों के नेताओं से मिलने का मौका भी मिल सकता है। इसके अलावा, पीएम मोदी को मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भी जुलाई में मालदीव आने का न्योता दे रखा है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में एंटी-टेरर प्लान पर होगी बात
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्राजील में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। यहां संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) जैसे महत्वपूर्ण संस्था में सुधार पर चर्चा होने की संभावना भी बताई जा रही है। भारत ने इस वक्त आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मुहिम शुरू कर रखी है। ऐसे में अगर प्रधानमंत्री मोदी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेते हैं तो भारत आंतकवाद-विरोधी अपनी मुहिम को और धार दे सकता है। वर्तमान में ब्राजील के पास BRICS की अध्यक्षता है। इसके साथ ही भारत, ग्लोबल साउथ के सहयोग को मजबूत करने और अधिक समावेशी और टिकाऊ प्रणाली को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेगा। शिखर सम्मेलन में वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग, व्यापार और निवेश, जलवायु परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) गवर्नेंस और बहुपक्षीय शांति और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बात होगी।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार है बहुत ही आवश्यक
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला 3 से 5 जून तक ब्रासीलिया में BRICS संसदीय मंच में एक भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में दशकों से भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी है। यह अंतरराष्ट्रीय संस्था मौजूदा वैश्विक समीकरण में पूरी तरह से अप्रासंगिक बन गया है। खासकर आतंकवाद के मुद्दे पर सुरक्षा परिषद पूरी तरह से फेल साबित हो रहा है। क्योंकि, पाकिस्तान समर्थित कई आतंकवादी संगठन और संस्था इसलिए मानवता के लिए कलंक बने हुए हैं, क्योंकि सुरक्षा परिषद के पांच में से एक स्थायी सदस्य चीन अपने वीटो के अधिकार का इस्तेमाल करके उन्हें बच निकलने का रास्ता देता आ रहा है।

पीएम मोदी को मालदीव ने भी भेजा है आने का बुलावा
उधर मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भी पीएम मोदी को मालदीव आने का न्योता दिया है। मालदीव, भारत के साथ अपने संबंधों को सुधारना चाहता है क्योंकि उसकी आर्थिक स्थिति नाजुक है। पिछले महीने मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की थी। उन्होंने भारत सरकार और लोगों के साथ एकजुटता दिखाते हुए आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में नई दिल्ली को अपना पूरा समर्थन देने की बात कही थी। खलील ने इस साल भारत की यह तीसरी यात्रा की थी। विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बैठक में खलील ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने भारत-मालदीव उच्च स्तरीय कोर ग्रुप (HLCG) की दूसरी बैठक में मालदीव का नेतृत्व भी किया। इस बैठक में भारत-मालदीव विजन डॉक्यूमेंट ऑन कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड मैरीटाइम सिक्योरिटी पार्टनरशिप के कार्यान्वयन में हुई प्रगति की समीक्षा की गई।

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