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बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना की गांधी परिवार से की मुलाकात, दिल्ली आवास पर सोनिया, प्रियंका-राहुल से हुई ये बात

उमाकांत त्रिपाठी।बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना भारत में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए दिल्ली आई हुई हैं। दिल्ली में शेख हसीना ने सोमवार को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की। बांग्लादेशी पीएम की इस मुलाकात का राजनीति से कुछ भी लेना देना नहीं है। यदि आप इस मुलाकात की तस्वीरें देखेंगे तो आपको यह बात आसानी से समझ आ जाएगी। शेख हसीना और सोनिया गांधी से मिलने के दौरान जिस तरह से एक दूसरे को गले लगाया और दोनों महिलाओं के चेहरों पर जो चमक थी उससे साफ जाहिर हो रहा था कि यह रिश्ता कितना खास है। शेख हसीना ने जब राहुल और प्रियंका को गले लगाया तो मानों ऐसा लगा कि वो अपने परिवार को बच्चों से अरसे बाद मिल रही हों। दरअसल, गांधी परिवार और शेख हसीना के परिवार का रिश्ता करीब 5 दशक से अधिक पुराना है।

इंदिरा गांधी ने दी थी सुरक्षा
यह बात तो सभी जानते हैं कि बांग्लादेश की आजादी में इंदिरा गांधी की भूमिका कितनी अहम थी। बांग्लादेश के राष्ट्रपति शेखमुजीबुर रहमान की जब सैन्य विद्रोह में हत्या हुई तो उस समय भारत ने शेख हसीना के परिवार को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई थी। इस बात का जिक्र शेख हसीना में समय-समय पर अपने इंटरव्यू में करती रही हैं। जिस समय शेख हसीना के पिता की हत्या हुई उस समय वह अपनी बहन के साथ जर्मनी अपने पति के पास गई हुई थीं। उनके पति न्यूक्लियर साइंटिस्ट थे। वे उस समय जर्मनी में पीएचडी कर रहे थे। शेख हसीना के अनुसार, ‘उस समय इंदिरा गांधी ने तुरंत सूचना भेजी कि वह हमें सुरक्षा और आश्रय देना चाहती हैं। इसके बाद वह अपने पति एम वाजेद और दो बच्चों साजिब और साइमा पुतुल के साथ दिल्ली आईं। शेख हसीना 5 साल से अधिक समय तक दिल्ली में रहीं। इस वजह से उनका गांधी परिवार के साथ रिश्ता बेहद खास है।

पंडारा रोड में पहचान बदल कर रहीं हसीना 
हसीना पहले 56 रिंग रोड, लाजपत नगर-3 और बाद में 1981 तक पंडारा पार्क में अपनी पहचान छुपा कर रही थीं। शेख हसीना के अनुसार भारत में उनके निर्वासन के पहले दो-तीन साल “कठिन” थे। खासकर उनके दो बच्चों – एक बेटा और एक बेटी के लिए, जो तब छोटे थे। हसीना के अनुसार बच्चे रोते थे और अपने दादा-दादी, खासकर मामा के पास ले जाने का अनुरोध करते थे। इंदिरा गांधी ने उनके पति के लिए यहां एक नौकरी की भी व्यवस्था की। उनके घर के आसपास बेहद कड़ी सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी। शेख हसीना ने कहा था कि हमने यहां (दिल्ली) वापस आने का फैसला किया क्योंकि हमारे मन में यह था कि अगर हम दिल्ली गए तो हम दिल्ली से अपने देश वापस जा सकेंगे। और फिर हम जान पाएंगे कि परिवार के कितने सदस्य अभी भी जीवित हैं।

1981 में हुई थी बांग्लादेश वापसी
दरअसल, बांग्लादेश में जब सैन्य विद्रोह हुआ तो उस नरसंहार में उनके पिता महान राजनेता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की हत्या कर दी गई थी। 15 अगस्त, 1975 को उनके चाचा और 10 वर्षीय छोटे भाई सहित उनके परिवार के 18 सदस्यों की वरिष्ठ सेना अधिकारियों ने हत्या कर दी गई थी। इसके बाद बांग्लादेश में भारी राजनीतिक उथल-पुथल मच गई और कई वर्षों तक देश पर सैन्य शासन रहा। हसीना के बांग्लादेश आने पर रोक लगा दी गई थी। बाद में उनकी पार्टी आवामी लीग फरवरी 1981 में वो आवामी लीग पार्टी की नेता चुनी गईं। इसके बाद मई 1981 में उनकी बांग्लादेश वापसी हुई।

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