उमाकांत त्रिपाठी। पटना: बिहार और झारखंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे सोन नदी जल बंटवारे के मुद्दे पर अहम सहमति बन गई है। **Bihar Jharkhand Water Agreement** को अंतरराज्यीय जल विवादों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘Team India’ की परिकल्पना और सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि देश के सभी राज्यों की अपनी अलग पहचान और अस्तित्व है, लेकिन जब सभी राज्य ‘Team India’ की भावना के साथ आगे बढ़ते हैं तो कोई भी समस्या ऐसी नहीं रहती, जिसका समाधान न निकाला जा सके।
अमित शाह ने कहा कि बिहार-झारखंड के बीच हुआ यह समझौता दोनों राज्यों के किसानों, ग्रामीण क्षेत्रों और बड़ी आबादी के लिए महत्वपूर्ण है। इससे सिंचाई के साथ-साथ पेयजल की उपलब्धता बढ़ेगी और सोन नदी के जल का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
## बिहार-झारखंड जल समझौते से किन इलाकों को फायदा?
**Bihar Jharkhand Water Agreement** का सबसे बड़ा असर बिहार और झारखंड के उन इलाकों में देखने को मिल सकता है, जहां सिंचाई और पीने के पानी की जरूरत लंबे समय से बनी हुई है।
समझौते के बाद बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना जैसे जिलों की बड़ी आबादी को सिंचाई और पेयजल के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
इन इलाकों में कृषि गतिविधियां काफी हद तक पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती हैं। ऐसे में जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिलने से खेती की उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
वहीं झारखंड के पलामू, गढ़वा और आसपास के क्षेत्रों में भी सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने का रास्ता साफ होगा। खासकर कम बारिश या जल संकट वाले इलाकों में इस तरह के अंतरराज्यीय समझौते का सीधा लाभ आम लोगों तक पहुंच सकता है।
## अमित शाह बोले- Team India की भावना से सुलझेंगे विवाद
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने **Bihar Jharkhand Water Agreement** को सहकारी संघवाद का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि राज्यों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन जब देश के हित में सभी राज्य एक साथ मिलकर काम करते हैं तो लंबे समय से लंबित विवादों का समाधान निकाला जा सकता है।
शाह के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘Team India’ की परिकल्पना का उद्देश्य राज्यों और केंद्र के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। इसी भावना के तहत अंतरराज्यीय परिषद के माध्यम से वर्षों से लंबित जल विवादों को सुलझाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर बनी सहमति केवल दो राज्यों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह सहकारी संघवाद की कार्यप्रणाली का भी उदाहरण है।
जल विवादों का असर सिर्फ प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा संबंध किसानों, पेयजल, सिंचाई, ग्रामीण विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था से होता है। इसलिए किसी लंबे विवाद का समाधान होने पर इसका फायदा व्यापक स्तर पर लोगों को मिल सकता है।
## 2026 में अब तक चार बड़े जल समझौते
केंद्र सरकार के अनुसार, इस वर्ष अब तक विभिन्न राज्यों के बीच जल और जल संसाधनों से जुड़े चार महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। **Bihar Jharkhand Water Agreement** इसी क्रम की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
7 जुलाई 2026 को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में नर्मदा अवार्ड से जुड़े लाभार्थी राज्यों मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के बीच लंबित भुगतान के निपटारे पर समझौता हुआ था।
यह समझौता सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण की लागत के बंटवारे से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद को खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया। चारों राज्यों के बीच लागत साझाकरण और लंबित भुगतान से जुड़े मुद्दों का समाधान परियोजना से संबंधित वित्तीय विवादों को कम करने में मदद कर सकता है।
इससे पहले 29 जून 2026 को राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यान्वयन को लेकर महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे।
## राजस्थान को यमुना से मिलेगा लगभग 580 MCM पानी
29 जून को हुए समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर के बीच लगभग 580 MCM पानी यमुना नहर से तीन भूमिगत पाइपलाइनों के माध्यम से राजस्थान तक पहुंचाने की योजना है।
इस परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन के जरिए राजस्थान के हिस्से का यमुना जल पहुंचाना है। इससे राजस्थान को 1994 के अपर यमुना बेसिन समझौते के तहत मिले पानी का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलेगी।
राजस्थान के सूखे और कम बारिश वाले क्षेत्रों के लिए यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लगातार पेयजल उपलब्धता से स्थानीय लोगों को राहत मिलने के साथ सामाजिक और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इस तरह के समझौते यह दिखाते हैं कि राज्यों के बीच जल संसाधनों के बंटवारे को लेकर बातचीत और आपसी सहमति के जरिए समाधान निकाला जा सकता है।
## किशाऊ बांध परियोजना पर भी बनी राज्यों में सहमति
16 जून 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण बैठक हुई थी।
इस बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के बीच परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर सहमति बनी। लंबे समय से लंबित इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित राज्यों ने समझौता ज्ञापन पर सहमति जताई।
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना में जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय सहायता के रूप में दिया जाएगा, जबकि बाकी 10 प्रतिशत वित्तीय भार संबंधित छह राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा।
परियोजना के विद्युत घटक और पानी के आवंटन को लेकर भी राज्यों के बीच सहमति बनाई गई। हिमाचल प्रदेश के विद्युत घटक की लागत साझा करने के बदले हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध कराने पर सहमति बनी।
## जल विवादों के समाधान से किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों को फायदा
**Bihar Jharkhand Water Agreement** सहित हाल के अंतरराज्यीय समझौतों का व्यापक उद्देश्य जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल और संबंधित राज्यों की जरूरतों के अनुसार पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
भारत में कई नदियां एक से अधिक राज्यों से होकर गुजरती हैं। ऐसे में नदी के पानी के बंटवारे को लेकर राज्यों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। इन विवादों का असर सिंचाई, पेयजल और कई विकास परियोजनाओं पर पड़ सकता है।
अगर राज्यों के बीच सहमति से ऐसे विवादों का समाधान निकलता है तो परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में आसानी होती है। इससे किसानों को सिंचाई का पानी, ग्रामीण इलाकों को पेयजल और शहरों को आवश्यक जल संसाधन उपलब्ध कराने की योजनाओं को गति मिल सकती है।
बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी जल बंटवारे पर बनी सहमति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब इस समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन और पानी की वास्तविक उपलब्धता पर नजर रहेगी। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों राज्यों में समझौते के तहत तय व्यवस्थाओं को किस तरह जमीन पर लागू किया जाता है और इससे किसानों तथा आम लोगों को कितना प्रत्यक्ष लाभ मिलता है।
केंद्र सरकार की ओर से अंतरराज्यीय परिषद के माध्यम से जल विवादों के समाधान की कोशिशों के बीच **Bihar Jharkhand Water Agreement** को सहकारी संघवाद की दिशा में एक और उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। अलग-अलग राज्यों की जरूरतों और हितों के बीच संतुलन बनाकर जल संसाधनों का इस्तेमाल करना आने वाले वर्षों में भी एक बड़ी प्राथमिकता रहने वाला है।













