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जब एक गीत सुनकर भावुक हुए पीएम मोदी, पूर्व पीएम अटल बिहारी से है कनेक्शन, जानें मैथिली गीत का पूरा इतिहास

उमाकांत त्रिपाठी।16 अगस्त को श्री अटल बिहारी वाजपेई की 7वीं पुण्यतिथि थी, यह दिन सभी मैथिली लोगों के लिए बहुत गौरव का दिन रहा. दरअसल पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में कल पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम नरेंद्र मोदी सहित देश के तमाम बड़े नेता शामिल हुए. इस दौरान मैथिल लोगों के लिए बहुत ही शानदार वाकया सामने आया. दरअसल मिथिला की बेटी समृद्धि पाठक और सान्वी पाठक ने आठवीं अनुसूची में शामिल मैथिली भाषा के प्रसिद्ध लोकगीत ‘जय-जय भैरवी असुर भयाविनी’ गाकर मंच पर बैठे बड़े नेताओं को भी भाव विभोर कर दिया.

जो हमेशा अटल रहे
देश के 13वें पीएम श्री अटल बिहारी वाजपेयी 1996 में 13 दिनों के लिए भारत के प्रधानमंत्री रहे और 1998 से 2004 तक दो अपूर्ण कार्यकालों तक भारत के प्रधानमंत्री रहे. उन्हें भारत के आर्थिक विकास में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए जाना जाता है. इस बार उनकी 7वीं पुण्यतिथि मनाई गई. जिसमें पूरे मिथिला के लिए ध्यान केंद्रित करने वाला पल रहा है. बहरहाल विद्यापति रचित मैथिली रचना को मंच पर गाया गया, जिसे सुनकर देश के आला अधिकारी सहित प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति , सांसद ओम बिरला,राजनाथ सिंह , राज्य सभा सांसद संजय कुमार झा सहित तमाम नेता झूम उठें और सुरीली आवाज और उनके अर्थ को समझकर भावविभोर हो गए.

मिथिला के लिए है खुशी का दिन
मैथिली भाषा के आठवें अनुसूचि में शामिल होने से बाद इसे राष्ट्रीय भाषा का दर्जा पहले ही मिल चुका है, अब राष्ट्रीय मंच पर सर्वोच्च लोगों के सामने ‘जय जय भैरवी असुर भयाविनी’ गीत गाना सांकेतिक तौर पर मिथिला के लिए खुशी का दिन है. हालांकि जानकारी के लिए बता दें कि मैथिल हर शुभ कार्यों में ये गीत गाते हैं. राष्ट्रीय स्तर पर इसका गायन और बड़े नेताओं द्वारा इसपर भवविभोर हो जाना मिथिला की गहरी सांस्कृतिक समृद्धि को दिखाता है.

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