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7 साल की उम्र में उठा ले गए.. अमित शाह ने सुनाई नक्सल पीड़ित बच्ची की भावुक कहानी, सुनिए संसद में क्या कहा

उमाकांत त्रिपाठी।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त करने के प्रयासों पर चल रही चर्चा के दौरान सरकार का पक्ष रखा। लोकसभा में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई पर बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज मैं इस मंच से देश की जनता को बताने आया हूं कि माओवादी हिंसा करने वालों और नक्सली हिंसा करने वालों के अब दिन लद गए हैं। उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की पीड़ा का उदाहरण देते हुए बताया कि नक्सलवाद ने बच्चों और परिवारों का जीवन बुरी तरह प्रभावित किया है।

इस दौरान अमित शाह ने नक्सली हिंसा में प्रभावित हुए एक लड़की के बारे में बताते हुए कहा, जब बच्ची को नेल पॉलिश दी जाती है, तो वह लगाते-लगाते रो उठती है। जब उससे सवाल पूछा गया कि वह क्यों रो रही है तो, उसने बताया कि 7 साल की उम्र में उसे नक्सली उठा ले गए थे। तब से मैं पैंट-शर्ट में घूम रही हूं, मैंने जीवन को कभी देखा नहीं है।

नक्सलियों ने बर्बाद किया बच्चों का जीवन: अमित शाह
शाह ने कहा, कि- बस्तर में साप्ताहिक बाजार लगते हैं, कुछ लोग वहां पर बच्चों के सामने मां-बाप को पीटने लगते हैं। उन्होंने कहा, 25-30 साल तक बच्चे जंगल में भटकते रहे। विपक्ष से अमित शाह ने कहा, आप लोगों से निवेदन है कि नक्सलवाद के कैंप में जाकर देखिए, वहां आपको पता चल रहा जाएगा कि नक्सलवादियों ने क्या किया है।

लोक सभा में नियम 193 के तहत वामपंथी उग्रवाद के खात्मे से जुड़ी चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि 1947 से पहले इस देश के ट्राइबल्स बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, रानी दुर्गावती, और मुर्मु बंधुओं को अपना आदर्श मानते थे। वहीं, आदिवासी 1970 आते-आते माओ को अपना हीरो मानने लगे। ये परिवर्तन क्यों हुआ?

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