उमाकांत त्रिपाठी।गृह मंत्री अमित शाह ने असम में आयोजित सीआरपीएफ (Central Reserve Police Force – CRPF) के 87वें स्थापना दिवस परेड को संबोधित करते हुए देश की आंतरिक सुरक्षा में अर्धसैनिक बल के योगदान की सराहना की. उन्होंने CRPF के 2200 से अधिक शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि देश की शांति और एकता बनाए रखने में बलिदान देने वाले जवानों का योगदान अविस्मरणीय है.
गृह मंत्री ने कहा कि- लगभग 11-12 वर्ष पहले देश के तीन प्रमुख अशांत क्षेत्र (पूर्वोत्तर, नक्सल प्रभावित इलाके और जम्मू-कश्मीर) लगातार हिंसा की चपेट में रहते थे. उस समय बम धमाकों और गोलीबारी की घटनाएं आम थीं, लेकिन आज इन क्षेत्रों में स्थिति काफी हद तक शांतिपूर्ण है. उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर में 700 से अधिक जवानों, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 736 और जम्मू-कश्मीर में करीब 500 जवानों ने देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए, जबकि लगभग 250 जवानों ने देश के अन्य हिस्सों में बलिदान दिया.
‘CRPF का मतलब सुरक्षा का अहसास’,शाह अमित शाह ने CRPF के 87वें स्थापना दिवस पर असम में आयोजित कार्यक्रम में अर्धसैनिक बल के योगदान को याद किया और शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी. शाह ने कहा कि- देश के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक पूर्वोत्तर में इस (CRPF) परेड का आयोजन होना गौरव का विषय है. गृह मंत्री ने कहा कि- जब भी कहीं अशांति की खबर मिलती है और वहां सीआरपीएफ के जवानों की मौजूदगी होती है, तो देशवासियों को भरोसा और सुरक्षा का एहसास होता है. गृह मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में शांति बहाली के लिए सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के योगदान को विशेष रूप से उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि- माओवाद (जिसने लंबे समय तक देश के कई हिस्सों को जकड़ रखा था) उसे खत्म करने में सीआरपीएफ और कोबरा कमांडो की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है.
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’31 मार्च तक देश नक्सल मुक्त’
शाह ने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार 31 मार्च 2026 तक देश को माओवाद की समस्या से पूरी तरह मुक्त कर देगी. उन्होंने कहा कि एक समय देश के 12 राज्यों और अनेक जिलों में माओवाद का गहरा प्रभाव था, लेकिन सरकार के ठोस संकल्प और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से स्थिति तेजी से बदली है. उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इतनी जटिल और चुनौतीपूर्ण समस्या को कुछ वर्षों के भीतर नियंत्रित करना सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता है. गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में संवैधानिक बदलावों (अनुच्छेद 370 हटाना) के बाद भी बड़े पैमाने पर अशांति नहीं हुई और एक भी गोली चलाने की आवश्यकता नहीं पड़ी, जिसमें सीआरपीएफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही.












