उमाकांत त्रिपाठी।Kiren Rijiju on Parliament Uproar को लेकर शुक्रवार को संसद के मानसून सत्र में राजनीतिक माहौल और गरमा गया। लोकसभा और राज्यसभा में लगातार जारी विपक्ष के हंगामे के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल नारेबाजी और सदन की कार्यवाही बाधित करना रह गया है, जबकि सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा चाहती है।
संसद का मानसून सत्र लगातार हंगामे की भेंट चढ़ रहा है। विपक्ष राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा और गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान की मांग कर रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि संसदीय परंपरा के अनुसार जिस मंत्रालय से विषय जुड़ा होता है, उसी मंत्री द्वारा जवाब दिया जाता है। विपक्ष यह तय नहीं कर सकता कि कौन सा मंत्री कब सदन में बोलेगा।
किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर साधा निशाना
Kiren Rijiju on Parliament Uproar पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष ने संसद को चर्चा का मंच बनाने के बजाय विरोध का अखाड़ा बना दिया है। उन्होंने कहा कि लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण संसद में गंभीर विषयों पर चर्चा प्रभावित हो रही है।
रिजिजू ने कहा कि विपक्ष की यह आदत बन गई है कि किसी भी मुद्दे पर पहले हंगामा किया जाए और बाद में चर्चा की मांग की जाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बहस और संवाद का महत्व है, लेकिन विपक्ष सदन की कार्यवाही को बाधित कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हर मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन संसदीय नियमों का पालन सभी को करना होगा।
अमित शाह को लेकर दिया बड़ा बयान
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने गृह मंत्री अमित शाह का बचाव करते हुए कहा कि विपक्ष जानबूझकर उनका नाम लेकर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा,
“गृह मंत्री अमित शाह का नाम सुनते ही चरमपंथी और आतंकवादी भी कांप उठते हैं। जिस दिन अमित शाह सदन में जवाब देंगे, उस दिन विपक्ष उनकी बात सुन नहीं पाएगा।”
रिजिजू ने आगे कहा कि संसद में किस मंत्री को किस विषय पर जवाब देना है, यह सरकार और सदन की प्रक्रिया तय करती है। विपक्ष यह तय नहीं कर सकता कि किस मंत्री को कब बुलाया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि गृह मंत्री सुबह से देर रात तक संसद में मौजूद रहते हैं और सरकार किसी भी संवैधानिक जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट रही है।
परिसीमन और महिला आरक्षण पर भी सरकार का जोर
Kiren Rijiju on Parliament Uproar के दौरान उन्होंने सरकार के आगामी विधायी एजेंडे का भी उल्लेख किया। रिजिजू ने कहा कि सरकार संसद में कई महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, जिनमें परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे अहम विषय शामिल हैं।
उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि विपक्ष इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रहा है।
रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता लगातार हंगामा करते हैं, जिसकी वजह से नए सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल पाता। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण देश की महिलाओं के सशक्तिकरण का बड़ा कदम है और इसका विरोध महिलाओं के हितों के खिलाफ माना जाएगा।
सूत्रों के अनुसार सरकार जल्द ही परिसीमन विधेयक संसद में पेश कर सकती है और इसके लिए उसे पर्याप्त राजनीतिक समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है।
संसद में क्यों हो रहा है गतिरोध?
मानसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेर रहा है। विपक्ष राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले पर विस्तृत चर्चा और गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहा है।
इसी मांग को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में लगातार नारेबाजी हो रही है, जिसके कारण दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
सरकार का कहना है कि विपक्ष नियमों के तहत चर्चा करे, जबकि विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है। इसी कारण संसद में गतिरोध लगातार बना हुआ है।
“अमित शाह बोलेंगे तो विपक्ष को सुनना पड़ेगा”
अपने बयान में किरेन रिजिजू ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि जब गृह मंत्री अमित शाह सदन में बोलेंगे तो विपक्ष के पास उनकी बात सुनने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल राजनीतिक प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन जब तथ्य सामने आएंगे तो उसे जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्ष सदन छोड़कर जाता है तो बाद में उसे अपने व्यवहार पर माफी मांगनी पड़ेगी।
आगे क्या?
संसद का मानसून सत्र अभी जारी है और सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है। वहीं विपक्ष अपनी मांगों पर कायम है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद का राजनीतिक माहौल और गर्म रहने की संभावना है।
यदि सरकार परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों को सदन में लाती है, तो इन पर व्यापक राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है। फिलहाल Kiren Rijiju on Parliament Uproar को लेकर दिए गए बयान ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहे टकराव को और तेज कर दिया है।
सरकार का दावा है कि संसद में चर्चा होनी चाहिए, जबकि विपक्ष अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की रणनीति पर कायम है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में गृह मंत्री अमित शाह का सदन में बयान कब होता है और उसके बाद संसद की कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती है।














