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चुनावी उलटफेर के चलते शेयर बाजार के निवेशकों को एक ही दिन में हुआ 31 लाख करोड़ रुपये का नुकसान

उमाकांत त्रिपाठी।मंगलवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए ऐसा अमंगल साबित हुआ है जिसे भूला पाना संभव नहीं है. लोकसभा चुनाव के जब नतीजों के रूझान आने शुरू हुए तो पतझड़ के समान शेयर बाजार में गिरावट शुरू हो गई. बीजेपी अपने दम पर इन चुनावों में बहुमत नहीं जुटा पाई और इस सदमे के चलते बाजार में सुनामी आ गई. सेंसेक्स 6000 तो निफ्टी में 2000 अंकों तक नीचे जा फिसला. बाजार में इस हाहाकार के चलते दिन के कारोबारी सत्र में निवेशकों के 45 लाख करोड़ रुपये खाक हो गए. पर निचले लेवल से बाजार ने थोड़ी रिकवरी दिखाई इसके बावजूद बाजार बंद होने पर निवेशकों को आज के सत्र में 31 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

निवेशकों ने गंवा दी 9 मई के बाद हुई कमाई

बाजार में इस भीषण गिरावट के चलते बीएसई पर लिस्टेड स्टॉक्स का मार्केट कैप घटकर 394.83 लाख करोड़ रुपये पर क्लोज हुआ है जो पिछले कारोबारी सत्र में 425.91 लाख करोड़ रुपये पर क्लोज हुआ था. यानि आज के कारोबारी सत्र में निवेशकों को 31.08 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. 9 मई 2024 के बाद भारतीय शेयर बाजार के मार्केट कैपिटलाइजेशन में जितनी बढ़ोतरी देखने को मिली थी वो एक झटके में ही बाजार ने गंवा दिया.

अडानी समूह के मार्केट कैप में बड़ा सेंध

भारतीय शेयर बाजार के मार्केट कैपिटलाइजेशन में आई इस गिरावट में बड़ा योगदान अडानी समूह के स्टॉक्स का रहा है जिसके शेयरों के रेट में 10 से 20 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली है इसके चलते ग्रुप के मार्केट कैप में 3.63 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है. रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में 7.5 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है जिसके चलते मार्केट कैप में 1.27 लाख करोड़ रुपये की सेंध लगी है. एसबीआई का स्टॉक 13 फीसदी जा लुढ़का जिसके चलते बैंक के मार्केट कैप में 1.07 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है और एसबीआई का मार्केट कैप 7 लाख करोड़ रुपये के नीचे जा फिसला है.

EVM खुलते ही निवेशक हुए कंगाल!
आपको बता दें 13 मई 2024 को गृह मंत्री अमित शाह ने तब तीन चरणों में कम वोटिंग और मोदी सरकार की वापसी पर संदेह को खारिज करते हुए निवेशकों को 4 जून से पहले शेयर बाजार में खरीदारी की सलाह दी थी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में तीसरी बार सरकार बनेगी और बाजार लाइफटाइम हाई को छूएगा. एग्जिट पोल के नतीजों के बाद बाजार ने लाइफटाइम बनाया तो सही लेकिन जब ईवीएम में वोटों की गितनी शुरू हुई तो निवेशकों को ऐसा नुकसान उठाना पड़ा है जिसकी भरपाई की फिलहाल नजर नहीं आ रही है.

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