उमाकांत त्रिपाठी। ओपीएस यानी ओल्ड पेंशन स्कीम… इस मुद्दे की चर्चा अक्सर तब होती है,जब किसी राज्य या देश में चुनाव हो। हर बार विपक्षी पार्टीयों की तरफ से ये मुद्दा उछाला जाता है। फिर होती है इस मांग पर राजनीति का खेल… मोदी सरकार ने अब तक इस मांग को लेकर सकरात्मक रुख अपनाया है, तो वहीं कांग्रेस इस मुद्दे पर हिमाचल प्रदेश में सरकार बना चुकी है। अब ओपीएस को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का भी बयान सामने आया है। उनके इस बयान से केंद्रीय कर्मचारियों को राहत और खुशी दोनों मिली है। आपको बता दें कि केंद्रीय कर्मचारी लगातार पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
क्या बोले गृहमंत्री अमित शाह
शाह से सवाल पूछा गया था कि- हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों राज्यों में पुरानी पेंशन योजना की बहाली बड़ा चुनावी मुद्दा रहा। कांग्रेस लगातार इसे मुद्दा बना रही है और पुरानी पेंशन बहाल करने का वादा कर रही है। इस पर अमित शाह ने कहा कि- यह सच है कि सरकारी कर्मचारियों की तरफ से पुरानी पेंशन योजना की वापसी की मांग की जा रही है। लेकिन हमें इसे बहाल करने से पहले संसाधनों की उपलब्धता और बजटीय दिक्कत को भी देखना होगा। उन्होंने कहा कि इसकी जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी की तरफ से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर पेंशन के मामले पर फैसला किया जाएगा। यानी रिपोर्ट आने के बाद ही केंद्र की मोदी सरकार इस मुद्दे को लेकर अगला कदम उठाएगी।
चुनावी साल में हर बार जोर पकड़ती है ये मांग
देश के कुछ राज्यों में ओपीएस की मांग को लेकर सरकारी कर्मचारियों ने हड़ताल की थी। कांग्रेस शासित राज्यों में ओपीएस की बहाली के बाद रिटायर्ड कर्मचारियों को आर्थिक फायदा हुआ है,जिसके चलते अब केंद्र सरकार भी इस मांग को लेकर सकरात्मक दिख रही है। रिपोर्ट्स की मानें तो केंद्र सरकार की तरफ से इस साल के अंत तक नेशनल पेंशन स्कीम में बदलाव किया जा सकता है। सरकार यह तय करने की तैयारी कर रही है कि कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद उनके आखिरी दिनों में सैलरी से कम से कम 40 से 45 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिले। इस बारे में एक उच्च स्तरीय पैनल की तरफ से यह सिफारिश की गई है।














