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पीएम मोदी ने किया भारत पर्व 2024 का उद्घाटन, लाल किले से बोले- हम कहीं तक भी पहुंच सकते हैं

उमाकांत त्रिपाठी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज 127वीं जयंती है। देश इसे पराक्रम दिवस के रूप में मना रहा है। इस अवसर पर लाल किले में संस्कृति मंत्रालय नेताजी सुभाष चंद्र बोस को समर्पित पराक्रम दिवस का आयोजन कर रहा है।
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत पर्व 2024 का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि अगले 9 दिनों में भारत पर्व में गणतंत्र दिवस की झांकियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के द्वारा देश की विविधता का प्रदर्शन किया जाएगा।

PM बोले- कल ही पूरी दुनिया भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक ऐतिहासिक पड़ाव का साक्षी बना है। भव्य राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की ऊर्जा को पूरे विश्व ने अनुभव किया है।
उन्होंने आगे कहा कि सूर्य हो या समंदर की गहराई, हमारे लिए किसी भी रहस्य तक पहुंचना मुश्किल नहीं है। हम दुनिया की शीर्ष 3 आर्थिक ताकतों में से एक बन सकते हैं। हमारे पास विश्व की चुनौतियों का समाधान देने का सामर्थ्य है। ये विश्वास आज भारत के युवाओं में दिख रहा है।

PM मोदी के भाषण की 5 अहम बातें…

1. ये नेताजी ही थे जिन्होंने पूरी ताकत से ‘Mother of Democracy’ के रूप में भारत की पहचान को विश्व के सामने रखा। जब दुनिया में कुछ लोग भारत में लोकतंत्र के प्रति आशंकित थे, तब नेताजी ने उन्हें भारत के लोकतांत्रिक अतीत को याद दिलाया। नेताजी कहते थे कि लोकतंत्र, मानव संस्था है।
2. नेताजी जानते थे कि गुलामी सिर्फ शासन की ही नहीं होती है, बल्कि विचार और व्यवहार की भी होती है। इसलिए उन्होंने विशेष रूप से तब की युवा पीढ़ी में इसको लेकर चेतना पैदा करने का प्रयास किया।
3. नेताजी का जीवन और उनका योगदान, युवा भारत के लिए एक प्रेरणा है। हमने कर्तव्य पथ पर नेताजी की प्रतिमा को उचित स्थान दिया है। हमारा मकसद है- कर्तव्य पथ पर आने वाले हर देशवासी को नेताजी का कर्तव्य के प्रति समर्पण याद रहे।
4. पिछले कुछ सालों में हमने देखा है कि 23 जनवरी को जबसे पराक्रम दिवस घोषित किया गया है, तब से गणतंत्र दिवस का महापर्व 23 जनवरी से लेकर बापू की पुण्यतिथि 30 जनवरी तक चलता है। गणतंत्र दिवस के इस महापर्व में अब 22 जनवरी का आस्था का महापर्व भी जुड़ गया है।
5. नेताजी ने भारत की आजादी के लिए अपने सपनों, अपनी आकांक्षाओं की तिलांजलि दे दी। वे चाहते तो अपने लिए एक अच्छा जीवन चुन सकते थे, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को भारत के संकल्प के साथ जोड़ दिया।

संविधान सदन में नेताजी को श्रद्धांजलि दी गई
दिल्ली के संविधान सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नेताजी को श्रद्धांजलि दी गई। प्रधानमंत्री मोदी ने बोस को याद करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- आज नेताजी की जयंती पर हम उनके जीवन और साहस को याद करते हुए उनका सम्मान कर रहे हैं। हमारे देश की आजादी के प्रति उनका अटूट समर्पण प्रेरणा हमें देता है।

राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने भी X पर बोस को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा- पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जा रही नेताजी की जयंती पर मैं अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं। नेताजी ने भारत की स्वतंत्रता के लक्ष्य के लिए असाधारण प्रतिबद्धता प्रदर्शित की थी। उनके अद्वितीय साहस और करिश्माई व्यक्तित्व ने भारतवासियों को औपनिवेशिक शासन के खिलाफ निडरता से लड़ने के लिए प्रेरित किया। उनके ओजस्वी व्यक्तित्व का हमारे स्वतंत्रता संग्राम पर गहरा प्रभाव पड़ा। हमारे देशवासी नेताजी को कृतज्ञतापूर्वक सदैव याद रखेंगे।

2021 से पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जा रही नेताजी की जयंती
सुभाष चंद्र बोस साहस, नेतृत्व कौशल और असाधारण वक्ता थे। वे खुद तो भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल थे ही साथ ही अन्य कई लोगों को भारतीय राष्ट्रीय सेना में शामिल होने और भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया था। ऐसे में 2021 में सरकार ने उनकी जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था।
नेताजी का निधन हुए 76 साल हो चुके हैं, लेकिन, उनकी मौत आज भी रहस्य बनी हुई है। उनकी मौत का सच जानने के लिए तीन कमेटियां बनीं। दो ने कहा उनकी मौत प्लेन क्रैश में हुई। तीसरी रिपोर्ट में कहा गया ‍कि ऐसा कोई प्लेन क्रैश ही नहीं हुआ तो हादसे में जान जाने की बात कैसे सही मानी जाए। उनके निधन के सालों बाद तक देश के अलग-अलग हिस्सों में नेताजी को देखे जाने के दावे किए जाते रहे।
18 अगस्त 1945 की है। जापान दूसरा विश्व युद्ध हार चुका था। अंग्रेज नेताजी के पीछे पड़े हुए थे। इसे देखते हुए उन्होंने रूस से मदद मांगने का मन बनाया। 18 अगस्त 1945 को उन्होंने मंचूरिया की तरफ उड़ान भरी। इसके बाद किसी को फिर वो दिखाई नहीं दिए।

5 दिन बाद टोक्यो रेडियो ने जानकारी दी कि नेताजी जिस विमान से जा रहे थे वो ताइहोकू हवाई अड्डे के पास क्रैश हो गया। इस हादसे में नेताजी बुरी तरह से जल गए। ताइहोकू सैनिक अस्पताल में उनका निधन हो गया। उनके साथ सवार बाकी लोग भी मारे गए। आज भी उनकी अस्थियां टोकियो के रैंकोजी मंदिर में रखी हुई हैं।
आजाद भारत की सरकार ने तीन बार इस घटना की जांच के आदेश दिए। पहले दोनों बार प्लेन क्रैश को हादसे का कारण बताया गया। 1999 में तीसरा आयोग मनोज कुमार मुखर्जी के नाम पर बना। इस आयोग की रिपोर्ट में ताइवान सरकार के हवाले से कहा गया कि 1945 में कोई प्लेन क्रैश की घटना ही नहीं हुई। इस प्लेन क्रैश का कोई रिकॉर्ड नहीं है। हालांकि, सरकार ने इस रिपोर्ट को अस्वीकार कर दिया था।

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