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पहलगाम के आतंकियों को सेना ने कैसे ठोका: ऑपरेशन महादेव की पल-पल की जानकारी ले रहे थे अमित शाह, ऐसे हुआ ऑपरेशन

उमाकांत त्रिपाठी।ऑपरेशन महादेव में तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया गया. ये तीनों आतंकवादी पहलगाम हमले के लिए ज़िम्मेदार थे. सरकार के सामने चुनौती यह थी कि इनका पुख्ता पहचान करें ताकि संसद के माध्यम से पूरे देश को ठोस जानकारी दी जा सके. इसका जिम्मा गृह मंत्री अमित शाह ने संभाला जो पूरी रात जगे और मंगलवार सुबह पांच बजे तक इस बारे में पल पल की रिपोर्ट लेते रहे.सूत्रों के अनुसार चंडीगढ़ फ़ोरेंसिक लैब के अधिकारियों से शाह लगातार संपर्क में रहे. जब वहां से यह रिपोर्ट आई कि बंदूक़ें मैच कर रही हैं तो उन्होंने रिपोर्ट मंगाई और वीडियो कॉल के माध्यम से पुष्टि की.

 

फ़ोरेंसिक जांच में हुई पुष्टि
दरअसल, फ़ोरेंसिक जांच में तीन बातों की पुष्टि की जाती है. पहला कि गोली इसी बंदूक़ से निकली, दूसरा खोखो का मिलान और तीसरा उसकी क्षमता जांची जाती है. फ़ोरेंसिक अधिकारी ने बताया कि- ये वहीं बंदूक़ें हैं जिनसे पहलगाम में निर्दोष लोगों की हत्याएं की गईं. यह मिलान 99% तक हुआ. जब शाह ने इसका कारण पूछा तो बताया गया कि उसके बाद से इनका इस्तेमाल ही नहीं हुआ.

गृहमंत्री ने दिया था साफ निर्देश
ऐसा इसलिए क्योंकि आतंकवादियों को घेरने की ठोस रणनीति बनाई गई थी. जब शाह हमले के बाद श्रीनगर गए थे तब सेना और सीएपीएफ के बलों से उन्होंने स्पष्ट कहा था कि – अब इन्हें किसी भी सूरत में वापस पाकिस्तान जाने से रोकना है. इसके लिए ठोस रणनीति बनाई गई. भागने के रास्ते में अधिकांश जगह चट्टानें थीं जहाँ से उनका जाना मुश्किल था. केवल आठ किलोमीटर का एक संकड़ा मुहाना था जिससे वे भाग सकते थे. यहां निगरानी बढ़ा दी गई. तीस फ़ीट से अधिक की खुदाई कर दी गई जिससे आतंकवादियों के भागने की सुरंगों में पानी भर गया. इससे उनका भागना असंभव हो गया.शाह का स्पष्ट निर्देश था कि हर हाल में इन्हें निपटाना होगा. सेना और अर्द्ध सैन्य बल इसी काम में लगे रहे. आख़िरकार ऑपरेशन महादेव को कामयाबी मिली और देश के दुश्मनों का सफाया हुआ.

 

अहमदाबाद से चंडीगढ़ लाया गया जांच के लिए मशीन
शाह के निर्देश पर वायु सेना के मालवाहक जहाज़ से अहमदाबाद फ़ोरेंसिक लैब से मशीन चंडीगढ़ भेजी गई. चंडीगढ़ में जाँच का काम पहले से ही तैयार था. जब आतंकवादियों से बरामद बंदूकों को वहाँ भेजा गया तो उनसे फायरिंग की गई ताकि खोखो और नली का मिलान सटीक ढंग से हो सके. यह फ़ोरेंसिक जाँच का अहम हिस्सा है. दरअसल, संसद सत्र के दौरान और वह भी ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा में सरकार ठोस तथ्यों और सबूतों के साथ देश के सामने जाना चाहती थी. इसीलिए गृह मंत्री अमित शाह पूरी रात जाग कर इसका पल पल की रिपोर्ट लेते रहे.

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