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पीएम मोदी को थाइलैंड से मिला खास तोहफा, गिफ्ट की गई पवित्र ग्रंथ ‘वर्ल्ड तिपिटक’, प्रधानमंत्री बोले- थैंक्यू

उमाकांत त्रिपाठी।थाईलैंड की राजकीय यात्रा पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगटर्न शिनावात्रा ने ‘वर्ल्ड तिपिटक’ नामक पवित्र ग्रंथ भेंट किया। प्रधानमंत्री मोदी ने हाथ जोड़कर उपहार स्वीकार करते हुए ‘बुद्ध भूमि’ भारत की ओर से प्रधानमंत्री शिनावात्रा को उपहार के लिए धन्यवाद दिया।

जानें- क्या है ‘वर्ल्ड तिपिटक’?
थाई सरकार ने इस पवित्र ग्रंथ को 2016 में राजा भूमिबोल अदुल्यादेज (राम IX) और रानी सिरिकित के 70 वर्षों के शासन को सम्मान देने के लिए प्रकाशित किया था। यह भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का संकलन है, जिसमें पाली तिपिटक के नौ मिलियन से अधिक अक्षरों का शुद्ध उच्चारण दिया गया है। थाईलैंड की सरकार इसे “शांति और ज्ञान का उपहार” बताते हुए 30 से अधिक देशों को भेंट कर चुकी है।पीएम मोदी ने इस उपहार को स्वीकार करते हुए कहा,कि- पीएम शिनावात्रा ने मुझे अभी तिपिटक भेंट किया। ‘बुद्ध भूमि’ भारत की ओर से मैंने इसे हाथ जोड़कर स्वीकार किया। पिछले साल भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष भारत से थाईलैंड भेजे गए थे। यह हर्ष का विषय है कि 40 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को उनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए शुक्रिया थाईलैंड-पीएम
पीएम मोदी ने शिनावात्रा के साथ हुई बैठक को लेकर सोशल मीडिया पर लिखा,कि- थोड़ी देर पहले बैंकॉक में प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा संग बेहद सार्थक और उपयोगी बैठक हुई। मैं थाई लोगों और सरकार को उनके गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए शुक्रिया कहना चाहता हूं और कुछ दिन पहले आए भूकंप के बाद थाई लोगों के साथ एकजुटता भी व्यक्त करता हूं। उन्होंने आगे कहा,कि- भारत की एक्ट ईस्ट और थाईलैंड की एक्ट वेस्ट नीति एक- दूसरे की पूरक हैं और ये नीतियां द्विपक्षीय सहयोग कई क्षेत्रों में दोनों देशों के लिए अवसर के द्वार खोलती है। इससे पहले थाई सरकार ने 18वीं शताब्दी के रामायण भित्ति चित्रों पर आधारित एक विशेष डाक टिकट भी जारी किया था।

भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष भेजे जाएंगे थाइलैंड-पीएम
इस दौरान पीएम मोदी एक खास एलान भी किया। पीएम मोदी कहा,कि- मुझे यह एलान करते हुए खुशी हो रही है कि 1960 में गुजरात के अरावली में पाए गए भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों थाई नागरिकों के दर्शन के लिए थाईलैंड भेजा जाएगा। गुजरात पर्यटन वेबसाइट के अनुसार, ये अवशेष देवनी मोरी से मिले थे। इसमें तीसरी-चौथी शताब्दी के बौद्ध मठ के अवशेष हैं। स्तूप की खुदाई से बुद्ध के अवशेष वाला एक ताबूत मिला था। इससे पहले भी राजा राम नवें के सिंहासन पर बैठने की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर 1995-96 में भारत से बुद्ध के पवित्र अवशेषों को थाईलैंड ले जाया गया था।

महाकुंभ में देखने को मिली हमारे संबंधों की गहराई
पीएम मोदी ने इस दौरान भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को लेकर कहा,कि- महाकुंभ के दौरान भारत में हमारे प्राचीन संबंध भी देखने को मिले। थाईलैंड और कई अन्य देशों से 600 से अधिक बौद्ध श्रद्धालु इस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम का हिस्सा बने। महाकुंभ ने विश्व शांति का संदेश दिया।

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