उमाकांत त्रिपाठी।नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जुलाई के आखिरी हफ्ते में यूके जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, यह भारत और UK के रिश्तों के लिए एक महत्वपूर्ण पल हो सकता है। दोनों देश लंबे समय से अटके FTA (Free Trade Agreement) को औपचारिक रूप देने की तैयारी कर रहे हैं। यह यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि कीर स्टार्मर के ब्रिटिश प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी की यह पहली UK यात्रा होगी। उम्मीद है कि दोनों नेता FTA पर हस्ताक्षर करने की घोषणा करेंगे, जिस पर कई सालों की बातचीत के बाद मई में सहमति बनी थी।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी हाल ही में UK का दौरा किया था, जिसे प्रधानमंत्री की संभावित यात्रा की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। इसके अलावा, मोदी इस महीने मालदीव भी जा सकते हैं, जहां राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने उन्हें 26 जुलाई को देश के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है।
भारत और UK के बीच FTA को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही थी। अब जाकर इस समझौते पर सहमति बनी है। दोनों देशों का मानना है कि यह समझौता ऐतिहासिक, महत्वाकांक्षी और पारस्परिक रूप से फायदेमंद’ होगा। इसका उद्देश्य व्यापक रणनीतिक साझेदारी को गहरा करना और द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ाना है। मोदी और पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने 2022 तक इस समझौते को पूरा करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन कुछ मुद्दों जैसे टैरिफ और UK में राजनीतिक अस्थिरता के कारण इसमें देरी हुई। अब, कई सालों के बाद, दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए तैयार हैं।
पीएम मोदी का मालदीव का दौरा है खास
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने प्रधानमंत्री मोदी को 26 जुलाई को देश के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। यह निमंत्रण भारत और मालदीव के बीच हालिया तनाव को कम करने का संकेत है। कुछ समय पहले दोनों देशों के बीच रिश्ते थोड़े खराब हो गए थे, लेकिन अब ऐसा लगता है कि चीजें बेहतर हो रही हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रधानमंत्री मोदी की UK और मालदीव यात्रा से दोनों देशों के साथ भारत के रिश्ते कैसे बदलते हैं। फिलहाल, सभी की निगाहें इन महत्वपूर्ण यात्राओं पर टिकी हुई हैं।














