उमकांत त्रिपाठी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों के दौरे के तहत स्वीडन की यात्रा पूरी कर अब नार्वे पहुंच चुके हैं। इसके बाद वह इटली का दौरा करेंगे। लेकिन स्वीडन यात्रा के दौरान हुई कई अहम मुलाकातें और खास पल अब दुनियाभर में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
भारतीय समय के अनुसार सोमवार तड़के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और स्वीडन के रिश्तों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। बैठक में व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी और रणनीतिक साझेदारी जैसे कई अहम मुद्दों पर बात हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर इस मुलाकात की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के साथ उनकी शानदार बातचीत हुई और दोनों देशों के मजबूत रिश्तों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और स्वीडन के संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और मानव-केंद्रित विकास जैसे सिद्धांतों पर आधारित हैं।
इस खास बैठक में स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया भी मौजूद रहीं। उन्होंने स्वीडन के राजा कार्ल-16 गुफ्ताफ और रानी क्वीन सिल्विया की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी ने इसके लिए उनका आभार जताया और स्वीडन के राजा को उनके 80वें जन्मदिन की शुभकामनाएं भी दीं।
प्रधानमंत्री मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री ने यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री यानी ERT को भी संयुक्त रूप से संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने भारत, स्वीडन और यूरोप के बीच बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है और यूरोप के साथ साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।
स्वीडन दौरे का सबसे भावुक पल तब आया, जब प्रधानमंत्री मोदी को गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की दो हस्तलिखित कविताओं की प्रतियां उपहार में दी गईं। पीएम मोदी ने कहा कि यह उपहार उनके लिए बेहद खास है। उन्होंने स्वीडन की सरकार और वहां के लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह भारत और स्वीडन के सांस्कृतिक संबंधों की गहराई को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गुरुदेव टैगोर के विचार आज भी पूरी दुनिया को प्रेरित करते हैं। मानव गरिमा, ज्ञान और भाईचारे पर आधारित उनकी सोच हमेशा प्रासंगिक रहेगी।
पीएम मोदी की इस यात्रा को भारत और स्वीडन के बीच सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी यह दौरा लगातार चर्चा में बना हुआ है और लोग इसे भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत का संकेत बता रहे हैं।














