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कौन है क्राउन प्रिंसेज विक्टोरिया, जिन्होंने दिया PM मोदी को स्वीडन का सबसे बड़ा सम्मान, कही जाती हैं गॉडमदर

उमाकांत त्रिपाठी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वीडन दौरे के बाद वहां की क्राउन प्रिंसेज विक्टोरिया दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गई हैं। रविवार को उन्होंने पीएम मोदी को स्वीडन के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल “रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार – कमांडर ग्रैंड क्रॉस” से सम्मानित किया। खास बात यह है कि यह सम्मान पाने वाले नरेंद्र मोदी पहले एशियाई नेता बन गए हैं।

पीएम मोदी ने इस सम्मान को भारत के 1.4 अरब लोगों और भारत-स्वीडन की दोस्ती को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों और मजबूत साझेदारी का प्रतीक है। इसके बाद लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा कि आखिर पीएम मोदी को सम्मान देने वाली क्राउन प्रिंसेज विक्टोरिया कौन हैं?

क्राउन प्रिंसेज विक्टोरिया स्वीडन के राजा किंग कार्ल-16 गुस्टाफ की सबसे बड़ी संतान हैं। वह स्वीडन की सिंहासन उत्तराधिकारी हैं और भविष्य में देश की महारानी बन सकती हैं। अगर ऐसा होता है, तो वे स्वीडन के इतिहास की चौथी महिला शासक होंगी।

दिलचस्प बात यह है कि जन्म के समय विक्टोरिया को उत्तराधिकारी नहीं बनाया गया था। 1979 में उनके छोटे भाई प्रिंस कार्ल फिलिप के जन्म के बाद उन्हें सिंहासन का वारिस घोषित किया गया था, क्योंकि उस समय नियम था कि बेटा ही उत्तराधिकारी बनेगा। लेकिन 1980 में स्वीडन ने अपने संविधान में बदलाव किया और सबसे बड़ी संतान को ही सिंहासन का अधिकार देने का फैसला किया, चाहे वह लड़का हो या लड़की। इसके बाद विक्टोरिया क्राउन प्रिंसेज बन गईं।

48 साल की विक्टोरिया अपनी सादगी और लोकप्रियता के लिए जानी जाती हैं। उन्हें “यूरोप की गॉडमदर” भी कहा जाता है। इसकी वजह यह है कि यूरोप की कई रॉयल फैमिली के बच्चों की वह गॉडमदर हैं। यूरोप में गॉडपैरेंट बनने की परंपरा सदियों पुरानी है और इसे सम्मान की नजर से देखा जाता है।

विक्टोरिया सामाजिक कार्यों में भी काफी सक्रिय रहती हैं। पर्यावरण, शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर वह खुलकर काम करती हैं। यही वजह है कि स्वीडन ही नहीं बल्कि पूरे यूरोप में उनकी एक खास पहचान है।

वहीं पीएम मोदी को मिला “रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार” सम्मान स्वीडन के सबसे पुराने पुरस्कारों में गिना जाता है। इसकी शुरुआत साल 1818 में हुई थी। यह सम्मान विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को उनके योगदान और स्वीडन के साथ मजबूत रिश्ते बनाने के लिए दिया जाता है।

पीएम मोदी को यह सम्मान मिलने के बाद भारत और स्वीडन के रिश्तों को नई मजबूती मिलने की बात कही जा रही है। सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से वायरल हो रही है और लोग इसे भारत के लिए गर्व का पल बता रहे हैं।

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