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पाकिस्तान के दोस्त तुर्की को सख्त संदेश देंगे पीएम मोदी, कनाडा से खोलेंगे पूरी पोल, जानें दौरे के पूरी डिटेल

उमाकांत त्रिपाठी।नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साइप्रस भी जाएंगे। ऐसा करने वाले वह देश के तीसरे प्रधानमंत्री होंगे। साइप्रस के बाद पीएम मोदी जी7 शिखर सम्मेलन के लिए कनाडा जाएंगे। फिर स्वदेश लौटते समय क्रोएशिया भी जाएंगे। भारत यूरोप में अपनी भूमिका बढ़ाना चाहता है और उनकी इन यात्रा कार्यक्रमों से भी यही बात निकल कर आ रही है। साइप्रस और क्रोएशिया दोनों ही यूरोपियन यूनियन (EU) के सदस्य हैं। साइप्रस अगले साल के पहले छह महीनों के लिए यूरोपियन यूनियन काउंसिल की अध्यक्षता भी करेगा। पहले पीएम मोदी को पिछले महीने क्रोएशिया जाना था। इसके साथ वे नीदरलैंड और नॉर्वे भी जाने वाले थे। लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के कारण यह दौरा रद्द हो गया था।

पीएम मोदी की साइप्रस यात्रा तुर्की-पकिस्तान को संदेश
जी7 (G7 Summit) शिखर सम्मेलन कनाडा के अल्बर्टा में 15 से 17 जून को होगा। प्रधानमंत्री इसके आखिरी दिन एक विशेष सत्र में भाग लेंगे। कनाडा से अचानक निमंत्रण मिलने के कारण पीएम का पूरा कार्यक्रम अभी तय नहीं है। लेकिन, सरकारी सूत्रों का कहना है कि- द्विपक्षीय बैठकें करने की कोशिश की जा रही हैं। लेकिन, इससे पहले उनकी साइप्रस की यात्रा बहुत ही महत्वपूर्ण है। 2002 में अटल बिहार वाजपेयी और 1983 में इंदिरा गांधी के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली साइप्रस यात्रा होगी। पहलगाम आतंकी हमले से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक में तुर्की ने जिस तरह से पाकिस्तान के आतंकवाद का साथ दिया है,उससे भारत के साथ उसका तनाव चल रहा है। यहां तक कि तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप एर्दोगन ने भी पाकिस्तान के साथ एकजुटता दिखाई है। ऐसे में पीएम मोदी की यह साइप्रस यात्रा बहुत महत्वपूर्ण है।

साइप्रस के इलाके पर तुर्की ने कर रखा है जबरन कब्जा
दरअसल, तुर्की ने उत्तरी साइप्रस को कथित ‘तुर्की गणराज्य उत्तरी साइप्रस’ के रूप में मान्यता दे रखी है। इस क्षेत्र पर 1974 में तुर्की की सेना ने जबरन कब्जा कर लिया था। पूर्वी भूमध्य सागर में गैस खोजने के अधिकारों को लेकर भी तुर्की और साइप्रस के बीच विवाद है। भारत हमेशा से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय कानून के माध्यम से साइप्रस समस्या का समाधान चाहता है। वहीं, तुर्की पाकिस्तान के साथ खड़ा है। इसलिए भारत, साइप्रस और ग्रीस के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है। भारत रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहा है। पीएम मोदी 40 वर्षों में ग्रीस जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन चुके हैं। उन्होंने 2023 में एथेंस की यात्रा की थी।

साइप्रस और ग्रीस आतंकवाद-कश्मीर मुद्दे पर भारत के साथ
साइप्रस और ग्रीस दोनों ही देशों ने आतंकवाद और कश्मीर के मुद्दे पर भारत का समर्थन किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार साइप्रस ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत का साथ दिया है। इनमें UNSC में भारत का चुनाव, भारत-अमेरिका परमाणु समझौता, एनएसजी सदस्यता और 1998 के परमाणु परीक्षण शामिल हैं। ऐसे में साइप्रस और ग्रीस के साथ भारत का मजबूत रिश्ता तुर्की को एक संदेश है। भारत यह दिखाना चाहता है कि उसके दोस्त भी हैं और वह अकेला नहीं है।

क्रोएशिया जाने वाले पहले प्रधानमंत्री होंगे नरेंद्र मोदी
यही नहीं, पीएम मोदी की क्रोएशिया की यात्रा भी बहुत खास है। यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली क्रोएशिया यात्रा होगी। एस जयशंकर 2021 में क्रोएशिया जाने वाले पहले भारतीय विदेश मंत्री बने थे। दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाना चाहते हैं। दो साल बाद, भारत और क्रोएशिया ने रक्षा सहयोग के लिए एक समझौता भी किया। यूरोपियन यूनियन के सदस्य होने के नाते, विश्व में इसी अपन अहमियत है।

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